जयशंकर यूएई दौरे पर, रास अल खैमाह के शासक से मिले, रिश्ते और मजबूत करने की बात कही
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने तीन दिन के यूएई दौरे के आखिरी दिन रास अल खैमाह के शासक से मुलाकात की और कहा कि भारत यूएई के साथ दोस्ती और मजबूत करेगा।
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भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर तीन दिन के दौरे पर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में थे। दौरे के आखिरी दिन उन्होंने रास अल खैमाह के शासक और यूएई की सर्वोच्च परिषद के सदस्य महामहिम शेख सौद बिन साकर अल कासिमी से मुलाकात की। इस दौरे में उन्होंने कहा कि हम यूएई के साथ दोस्ती और मजबूत करेंगे।
यह दौरा ऐसे वक्त में हुआ है जब पश्चिम एशिया में हालात नाजुक हैं। ईरान में चल रहे संघर्ष, यमन के हूथी बागियों और सऊदी अरब के बीच बढ़े तनाव ने पूरे खाड़ी इलाके में गंभीर अनिश्चितता पैदा कर दी है। इस जंग का असर दुनिया की ऊर्जा सप्लाई और समुद्री रास्तों पर भी पड़ा है।
रास अल खैमाह अमीरात यूएई के सबसे उत्तर में बसा है और उसकी सीमा ओमान से लगती है। यह इलाका होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास है। इस समुद्री रास्ते से दुनिया के कच्चे तेल की करीब पांचवां हिस्सा गुजरता है। मौजूदा ईरान संकट के बीच इस रास्ते की सुरक्षा भारत और पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हो गई है।
रास अल खैमाह के शासक से मिलने के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया पर आभार जताया। उन्होंने लिखा कि दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत करने और इस इलाके के साथ जुड़ाव गहरा करने पर शेख सौद की राय उनके लिए अहम रही। उन्होंने यह भी बताया कि बातचीत में खाड़ी के हालात का मुद्दा भी आया। सूत्रों के हवाले से नहीं, बल्कि बातचीत में खाड़ी की जंग जैसी स्थिति, सुरक्षा और ऊर्जा सप्लाई की रुकावटों पर दोनों नेताओं में गहरी चर्चा हुई। कोशिश यह है कि ईरान की जंग का सीधा झटका खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था और भारत की ईंधन सुरक्षा को न लगे।
भारत अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से मंगाता है, इसलिए इस रास्ते पर शांति और सहयोग भारत के लिए सबसे ऊपर है। रास अल खैमाह के शासकों ने भारत और यूएई की रणनीतिक साझेदारी को जो समर्थन दिया, उसे दोनों देशों के आपसी भरोसे की निशानी माना जा रहा है।
दौरे की शुरुआत में जयशंकर अबू धाबी पहुंचे थे। वहां उन्होंने यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और यूएई की व्यापक सामरिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) में हुई प्रगति का विस्तार से जायजा लिया। व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने पर दोनों के बीच सहमति बनी।
अबू धाबी में रायसीना डायलॉग के एक खास सत्र में भी जयशंकर ने हिस्सा लिया। विषय था "आगे की दुनिया: ताकत, मकसद और संभावनाएं" (The Next World: Power, Purpose and Possibility)। यहां उन्होंने कहा कि आज की दुनिया तेजी से बदल रही है और ग्लोबलाइजेशन ऐसी प्रक्रिया है जिसे पीछे नहीं मोड़ा जा सकता।
जयशंकर ने अपने भाषण में कहा कि मौजूदा बहुपक्षीय व्यवस्था (Multilateral System) कई चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में हर देश अपने राष्ट्रीय हितों के हिसाब से फैसले लेता है और नए भरोसेमंद साझेदार ढूंढता है। उनके मुताबिक पुरानी चौखट से आगे बढ़कर रणनीतिक समझदारी दिखाना आज की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत और यूएई ने जो साझेदारी दिखाई है, वह बदलती दुनिया से तालमेल बिठाने की सबसे अच्छी मिसाल है। दोनों देशों ने सिर्फ व्यापार नहीं बढ़ाया, बल्कि संकट के वक्त एक-दूसरे का मजबूती से साथ भी दिया। जयशंकर ने भरोसा जताया कि छोटे लेकिन मजबूत साझेदार समूहों (Mini-lateral groups) के जरिए वैश्विक व्यवस्था में सुधार लाया जा सकता है। ईरान और यमन के संघर्ष के इस मुश्किल दौर में यूएई के साथ भारत की यह सक्रिय कूटनीति खाड़ी में शांति और स्थिरता बनाए रखने में अहम साबित होगी।