पोमण में नाले की जमीन महावितरण को किराये पर देने का आरोप, दो बिल्डरों पर नायगांव में केस
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
वसई के पोमण में प्राकृतिक नाले पर कब्जा कर उसी जमीन पर महावितरण का उपकेंद्र बनवाने का आरोप है। नायगांव पुलिस ने दो पार्टनरों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
वसई तहसील के पोमण में महावितरण के साथ बड़े धोखे का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक प्राकृतिक नाले की जमीन पर कब्जा करके उसे अपनी बताया गया और वही जमीन महावितरण को किराये पर दे दी गई। इस तरह महावितरण और सरकार को 4 करोड़ 81 लाख रुपये का चूना लगाने की बात कही जा रही है।
इस मामले में मेसर्स रॉयल इंडस्ट्रियल हब के पार्टनर पदमशी कल्याणजी गजरा और हरेश रामजी भानुशाली पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी प्राइवेट पैमाइश नक्शे के आधार पर यह सब किया। महावितरण की शिकायत पर नायगांव पुलिस स्टेशन में दोनों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ है। पदमशी गजरा की उम्र 60 साल और हरेश भानुशाली की उम्र 50 साल बताई गई है। दोनों पोमण के रहने वाले हैं।
पूरा मामला पोमण के सर्वे नंबर 126/1/1 की 1858 वर्ग मीटर जमीन का है। यह जमीन मे. रॉयल इंडस्ट्रियल डब कंपनी ने साल 2015 में महावितरण को नया बिजली वितरण उपकेंद्र बनाने के लिए किराये पर दी थी। महावितरण ने इस जगह पर 4 करोड़ 81 लाख 41 हजार 340 रुपये खर्च करके 20 मेगावाट (22/22 केवी) क्षमता का उपकेंद्र, यानी स्विचिंग स्टेशन, खड़ा किया। वहीं जानकारी वाले बोर्ड पर पूरे प्रोजेक्ट की लागत 8 करोड़ 35 लाख रुपये लिखी है।
गड़बड़ी का पता तब चला जब आरटीआई कार्यकर्ता चंदू विजय पाटील ने सह उप निबंधक दफ्तर और उपअधीक्षक भूमि अभिलेख दफ्तर से सरकारी रिकॉर्ड निकलवाए। इन रिकॉर्ड से मामला खुलकर सामने आया।
भूमि अभिलेख विभाग की सरकारी पैमाइश में सामने आया कि महावितरण को दी गई कुल जमीन में से 624.48 वर्ग मीटर हिस्सा प्राकृतिक पानी का नाला है। आरोप है कि गजरा और भानुशाली ने नाले पर हुए कब्जे को अपनी मिल्कियत का बताया, झूठा प्राइवेट पैमाइश नक्शा बनवाया और वह जमीन महावितरण को किराये पर दे दी। कोंकण विभागीय आयुक्त को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में भी कहा गया है कि अपने आर्थिक फायदे के लिए सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।
अपर जिलाधिकारी दत्तात्रेय कवितके ने इस मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उसके बाद महावितरण के कार्यकारी अभियंता प्रवीण उद्धवराव सुटे ने नायगांव पुलिस स्टेशन में आधिकारिक शिकायत दी। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय हजारे के मार्गदर्शन में पुलिस उप निरीक्षक रणजित नलवडे आगे की जांच कर रहे हैं।
स्रोत के मुताबिक अभी किसी की गिरफ्तारी की बात सामने नहीं आई है, लेकिन दोनों डेवलपरों पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है। इस मामले में महावितरण के उस वक्त के अधिकारियों की भूमिका होने की संभावना भी जताई गई है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।