शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

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बीड: भर्ती घोटाला खोलने वाले वैभव चव्हाण पेड़ से लटके मिले, परिजनों को साजिश का शक

जुर्म PT24 टीम

बीड तालुका के इमामपूर इलाके में नींबू के पेड़ से लटकी हालत में मिला शव, परिवार का आरोप कि कुराश संगठन का हाथ है। मौत से पहले दोस्त को भेजी ऑडियो क्लिप सामने आई।

कुछ दिन पहले पुणे समेत पूरे महाराष्ट्र में पुलिस भर्ती से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया था। फर्जी खिलाड़ी सर्टिफिकेट के सहारे सरकारी नौकरी दिलाने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ बीड के वैभव चव्हाण ने किया था। अब इसी मामले में एक बेहद चौंकाने वाली और गुस्सा दिलाने वाली खबर आई है। वैभव चव्हाण की संदिग्ध हालत में मौत हो गई है।

गुरुवार को बीड तालुका के इमामपूर परिसर में एक नींबू के पेड़ से उनका शव फंदे पर लटका मिला। शव मिलते ही उनके परिवार में कोहराम मच गया। रिश्तेदारों का कहना है कि वैभव के शरीर पर मारपीट के निशान थे और पैर में चोटें भी थीं। इसी वजह से उनका आरोप है कि यह खुदकुशी नहीं, बल्कि साजिश के तहत की गई वारदात है। रिश्तेदारों ने यह गंभीर आरोप भी लगाया है कि इस मौत के पीछे कुराश संगठन का हाथ है।

इस बीच वैभव की एक ऑडियो क्लिप सामने आई है, जो उन्होंने मौत से पहले एक दोस्त को भेजी थी। इस क्लिप ने कई लोगों को चौंका दिया है। रिकॉर्डिंग में वैभव ने कहा था, "कुराश संगठन का रैकेट उजागर करने के बाद से मेरी जान को खतरा है। मेरी मौत किसी भी तरीके से हो, उसके लिए कुराश संगठन जिम्मेदार होगा।" इस संदिग्ध मौत के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है।

वैभव मूल रूप से बीड के रहने वाले थे। दो साल पहले वे धाराशिव पुलिस बल में भर्ती होने की कोशिश कर रहे थे। साल 2024-25 में उन्होंने पुलिस भर्ती के लिए खिलाड़ी कोटे से आवेदन किया था। लेकिन उनके बराबर अंक पाने वाले एक दूसरे उम्मीदवार ने खिलाड़ी होने का फर्जी सर्टिफिकेट जमा कर दिया और नौकरी हासिल कर ली। इस वजह से वैभव की भर्ती का मौका हाथ से निकल गया।

इस नाइंसाफी के खिलाफ वैभव ने जोरदार पैरवी शुरू की। इसी पैरवी के दौरान उन्होंने फर्जी खेल सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरियां दिलवाने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया था।

दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए, इस मांग को लेकर वैभव के रिश्तेदारों ने पुलिस स्टेशन के सामने पूरे 12 घंटे तक धरना दिया। इसके बाद पुलिस ने जरूरी आश्वासन पूरे करते हुए जांच शुरू कर दी है। परिवार को अब इंसाफ का इंतजार है।

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