जटपुरा गेट की दरारों पर मुनगंटीवार ने मांगी विशेषज्ञों से जांच और मरम्मत
विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने चंद्रपुर के जटपुरा गेट के पत्थरों के जोड़ों में आई दरारों को देखते हुए विशेषज्ञ जांच और वैज्ञानिक मरम्मत की मांग की है।
चंद्रपुर के जटपुरा गेट को बचाने के लिए विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने आगे बढ़कर पहल की है। उन्होंने संबंधित विभागों से मांग की है कि गेट की विशेषज्ञों से जांच कराई जाए और उसकी वैज्ञानिक तरीके से मरम्मत की जाए। चंद्रपुर की ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा यह इमारत गोंडकालीन वैभव की गवाह मानी जाती है।
मुनगंटीवार के ध्यान में आया है कि गेट के अंदर की तरफ पत्थर की चिनाई के जोड़ों में बड़े पैमाने पर दरारें पड़ गई हैं। कई जगह पत्थरों के बीच के जोड़ खुल चुके हैं। उनका कहना है कि सैकड़ों साल का इतिहास देखने वाली इस धरोहर को वक्त के साथ अनदेखा नहीं होने देना चाहिए और इमारत की सुरक्षा पर कोई खतरा नहीं आना चाहिए। इसी वजह से उन्होंने तुरंत हरकत में आने की मांग की है।
यह मांग उन्होंने चंद्रपुर के जिलाधिकारी और भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग के मुंबई मंडल के अधीक्षक पुरातत्त्वज्ञ को लिखे पत्र में की है। पत्र में कहा गया है कि पुरातत्त्व विभाग के विशेषज्ञ अधिकारी और इंजीनियर जल्द से जल्द मौके पर जाकर गेट को देखें। पत्थरों के जोड़, दरारें, निर्माण की घिसावट और पत्थरों की मजबूती का विस्तार से तकनीकी आकलन किया जाए।
मुनगंटीवार ने यह भी सुझाया है कि जांच के दौरान अगर ढांचे को फौरी खतरा दिखे तो ज़रूरी एहतियाती कदम उठाए जाएं, ताकि कोई हादसा न हो। उनके मुताबिक वक्त रहते रोकथाम के उपाय और तकनीकी मरम्मत की जाए तो आगे होने वाला नुकसान टल सकता है। इस बात का असर गेट की बनावट की मजबूती पर क्या पड़ सकता है, यह भी विशेषज्ञों से जांचा जाना चाहिए।
मरम्मत को लेकर पत्र में कहा गया है कि खुले जोड़ों और दरारों को भरते समय गेट की मूल स्थापत्य शैली और ऐतिहासिक रूप जैसा है वैसा ही रहे, इसका ध्यान रखा जाए। पुरातत्त्व के सिद्धांतों के हिसाब से मरम्मत का तकनीकी नक्शा और अंदाजा खर्च तैयार करके काम को प्राथमिकता से शुरू किया जाए। मुनगंटीवार ने कहा कि सिर्फ ऊपरी मरम्मत काफी नहीं है, इमारत की मूल बनावट और ऐतिहासिक खासियतें बची रहनी चाहिए।
आगे के लिए उन्होंने नियमित देखभाल, समय-समय पर तकनीकी जांच और ढांचे की हालत पर नज़र रखने की स्थायी व्यवस्था बनाने की ज़रूरत बताई है। साथ ही उन्होंने मांग की है कि साइट निरीक्षण के नतीजे, तकनीकी आकलन, प्रस्तावित मरम्मत का तरीका और काम के लिए तय समय-सीमा की पूरी रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि ऐतिहासिक इमारतों को नुकसान पहुंचने के बाद उनका मूल रूप लौटाना अक्सर मुश्किल होता है, इसलिए नुकसान बढ़ने का इंतज़ार किए बिना वक्त रहते बचाव के कदम उठाना ज़रूरी है।
मुनगंटीवार का आग्रह है कि जटपुरा गेट चंद्रपुर की ऐतिहासिक अस्मिता और गोंडकालीन वैभव की अहम निशानी है। इसे वैज्ञानिक ढंग से सहेजकर यह अमूल्य विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखी जाए।
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