जापानी, जर्मन या फ्रेंच: विदेशी भाषा सीखकर करियर में खुल सकते हैं नए रास्ते
हिंदी और अंग्रेज़ी के अलावा कोई दूसरी भाषा आने से नौकरी के नए मौके मिल सकते हैं। उधर सीबीएसई ने 2026-27 के लिए तीन भाषाओं पर गाइडलाइन जारी की है।
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आज के दौर में पढ़ाई के साथ नई स्किल सीखना बहुत ज़रूरी हो गया है। अगर आप हिंदी और अंग्रेज़ी के अलावा कोई और भाषा सीख लेते हैं, तो नौकरी के नए मौके खुल सकते हैं। खासकर विदेशी भाषा जानने वालों के लिए अनुवाद, टूरिज़्म, पढ़ाने का काम, कस्टमर सपोर्ट और विदेशी कंपनियों के साथ काम करने के रास्ते बन सकते हैं।
जो विद्यार्थी जापानी कंपनियों में काम करना चाहते हैं, या जापान में पढ़ाई और नौकरी का सपना देखते हैं, उनके लिए जापानी भाषा अच्छा विकल्प हो सकती है। जापान टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के लिए जाना जाता है। जापानी आने वालों को अनुवाद, भाषा सिखाने, कस्टमर सपोर्ट और कंपनियों के बीच संवाद से जुड़े काम मिल सकते हैं। भारत में जापानी कंपनियों के साथ काम करने वाली कुछ संस्थाओं में भी यह भाषा काम आती है। इसे सीखने के लिए शुरुआती कोर्स से शुरू किया जा सकता है। रोज़ नए शब्द सीखना, जापानी सुनना और छोटे वाक्य बोलने की प्रैक्टिस करना फायदेमंद रहेगा। भाषा के साथ किसी काम की स्किल और अनुभव होना भी ज़रूरी है।
जर्मन भाषा सीखने से भी करियर के नए रास्ते मिल सकते हैं। जर्मनी इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल, रिसर्च और टेक्नोलॉजी के लिए पहचाना जाता है। इस भाषा की जानकारी अनुवाद, भाषा की ट्रेनिंग, पर्यटन और कुछ कंपनियों में संवाद के लिए काम की है। अगर आगे की पढ़ाई के लिए जर्मनी जाना है, तो वहां के कोर्स और संस्थाओं के नियमों के हिसाब से जर्मन सीखना आपकी मदद करेगा।
फ्रेंच दुनिया के कई देशों में बोली जाती है। इसे सीखने के बाद पर्यटन, होटल, अनुवाद, पढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय कस्टमर सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में रोज़गार के मौके तलाशे जा सकते हैं। जो विद्यार्थी विदेश में पढ़ाई या नौकरी करना चाहते हैं, उनके लिए भी फ्रेंच काफी काम की है। शुरुआत में रोज़ कुछ नए शब्द सीखें और छोटे वाक्य बोलने की आदत डालें। ऑनलाइन क्लास, भाषा सिखाने वाले ऐप और नियमित प्रैक्टिस से धीरे-धीरे भाषा पर पकड़ बन जाती है।
इस बीच सीबीएसई ने जुलाई 2026 में तीन भाषाओं की पढ़ाई को लेकर गाइडलाइन जारी की थी। इसके मुताबिक 2026-27 में नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना ज़रूरी है। विदेशी भाषा को तीसरी भाषा के तौर पर तभी चुना जा सकेगा, जब बाकी दो भाषाएं भारतीय हों। इस सत्र में दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए दो भाषाओं की पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी। यह नियम स्कूलों की भाषा पढ़ाई से जुड़ा है, जबकि जापानी, जर्मन और फ्रेंच ग्रेजुएशन स्तर के अलग विकल्प हैं।