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17:44 IST

ऑफिस में जेन ज़ी का अंदाज़: मानसिक शांति पहले, ये हैं उनकी 10 खास आदतें

कॉरपोरेट दुनिया में काम का तरीका बदल रहा है। जेन ज़ी के युवा तनख्वाह के लिए मानसिक शांति और निजी ज़िंदगी की कीमत देने को तैयार नहीं हैं।

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पिछले कुछ सालों में कॉरपोरेट दफ्तरों में काम करने का तरीका काफी बदल गया है। एक वक्त था जब सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक अपनी जगह से हिले बिना लगातार काम करना ईमानदारी माना जाता था। अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। पुराने वर्क कल्चर के आदी लोग आज के ट्रेंड देखकर हैरान हो सकते हैं। आज के मॉडर्न ऑफिस में कदम रखते ही एक अलग एनर्जी और नए तरह का कल्चर दिखता है। इस नई कार्यसंस्कृति की अगुवाई आज की युवा पीढ़ी यानी जेन ज़ी कर रही है।

जेन ज़ी के युवा तनख्वाह के बदले अपनी मानसिक शांति या निजी ज़िंदगी की कीमत चुकाने को तैयार नहीं हैं। वे काम को ज़िंदगी का सिर्फ एक हिस्सा मानते हैं। प्रोडक्टिविटी के साथ-साथ मानसिक शांति भी उनके लिए बहुत मायने रखती है। जेन ज़ी के ऑफिस कल्चर में सबसे ज़्यादा चर्चा "माइक्रो ब्रेक्स" की होती है। पुराने मैनेजर इसे काम से भागना समझते हैं, लेकिन आज के युवा इसे खुद को रिचार्ज करने का तरीका मानते हैं। घंटों स्क्रीन के सामने बैठे रहने की जगह थोड़ा टहलना, स्ट्रेचिंग करना या कॉफी पीते हुए दोस्तों से गपशप करना उनके लिए ज़रूरी होता है।

नई पीढ़ी काम को लेकर बिल्कुल साफ रहती है। वह सिर्फ "घंटे गिनने" पर नहीं, बल्कि "स्मार्ट वर्क" पर भरोसा करती है। यही कार्यशैली कॉरपोरेट जगत में बड़े बदलाव की नींव रख रही है, जहां सीनियर और जूनियर के बीच वर्क कल्चर को लेकर नई बहसें छिड़ गई हैं। आइए जानते हैं जेन ज़ी के ऑफिस कल्चर की 10 खास आदतें, जो आजकल हर जगह चर्चा में हैं।

पहली आदत माइक्रो ब्रेक्स का क्रेज़ है। जेन ज़ी घंटों कुर्सी से चिपककर बैठे रहना पसंद नहीं करती। नई पीढ़ी के युवा हर 45 से 60 मिनट के बाद छोटा सा ब्रेक लेते हैं, कभी पानी पीने के लिए तो कभी थोड़ा चलने के लिए। उनका मानना है कि इससे फोकस और रचनात्मकता बढ़ाने में मदद मिलती है।

दूसरी आदत "डिस्टर्ब न करें" वाला हेडफोन कल्चर है। कानों पर बड़े हेडफोन लगाकर काम करना जेन ज़ी की पहचान बन गया है। इससे वे ऑफिस के शोरगुल से दूर अपनी धुन में रहते हैं और उनका फोकस बेहतर होता है। यह अनचाही बातचीत से बचने का एक स्मार्ट तरीका भी है।

तीसरी आदत वर्क-लाइफ बाउंड्री है, यानी काम और निजी ज़िंदगी के बीच की लकीर। पुराने कर्मचारियों की तरह जेन ज़ी ऑफिस टाइम के बाद बॉस के फोन कॉल या मैसेज का फौरन जवाब देने के पक्ष में नहीं रहती। शाम होते ही उनके लिए काम खत्म हो जाता है और वे अपनी निजी ज़िंदगी या शौक को वक्त देते हैं।

चौथी आदत यह है कि मेंटल हेल्थ उनके लिए सबसे ऊपर है। आज की युवा पीढ़ी अपनी मानसिक सेहत से किसी तरह का समझौता नहीं करती। किसी दिन ज़्यादा तनाव लगे तो वे खुलकर "मेंटल हेल्थ डे" या छुट्टी लेने की बात करते हैं, जिसे पुरानी पीढ़ी के लोग अक्सर बहाना समझते थे।

पांचवीं आदत सीधी और साफ बातचीत है। जेन ज़ी पीढ़ी ऑफिस पॉलिटिक्स या घुमा-फिराकर बोलने की जगह सीधी और साफ बात करना पसंद करती है। मीटिंग में बिना डरे अपनी राय रखना और सीनियर्स से खुलकर सवाल पूछना उनके स्वभाव में शामिल है।

छठी आदत फॉर्मल ड्रेस कोड से दूरी है। टाई और सूट-बूट का ज़माना अब पीछे छूट रहा है। जेन ज़ी पीढ़ी ऑफिस में कैज़ुअल, आरामदायक और ट्रेंडी कपड़ों में आना पसंद करती है। इससे उन्हें अपने वर्कप्लेस पर रिलैक्स महसूस करने में मदद मिलती है।

सातवीं आदत अपने डेस्क को पर्सनलाइज़ करना है। जेन ज़ी के वर्क डेस्क पर सिर्फ लैपटॉप रखने की जगह नहीं होती। वे अपनी टेबल पर पौधे, पसंदीदा कॉफी मग, मोटिवेशनल कोट्स या मिनिमलिस्टिक डेकोरेशन रखना पसंद करते हैं, जिससे ऑफिस का माहौल आरामदायक लगता है।

आठवीं आदत "वर्क बेस्टी" का बढ़ता कॉन्सेप्ट है। ऑफिस का तनाव हल्का करने के लिए जेन ज़ी करीबी दोस्तों यानी "वर्क-बेस्टी" का एक मज़बूत ग्रुप बना लेती है। उनके साथ लंच शेयर करना और हंसी-मज़ाक करना उनके दिन का सबसे अच्छा हिस्सा होता है।

नौवीं आदत फीडबैक और तारीफ की चाह है। नई पीढ़ी के युवा सिर्फ काम करने के लिए काम नहीं करते। उन्हें अपने काम पर फौरन फीडबैक और अप्रूवल चाहिए होता है। अगर उनके अच्छे काम की तारीफ हो, तो उनका जोश दोगुना हो जाता है।

दसवीं आदत हाइब्रिड और रिमोट वर्किंग को तरजीह देना है। जेन ज़ी वर्क फ्रॉम होम या हाइब्रिड मॉडल का विकल्प देने वाली कंपनियों को ज़्यादा पसंद करती है। ट्रैफिक में और ऑफिस आने-जाने में वक्त बर्बाद करने के वे सख्त खिलाफ हैं।

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