हिंगणघाट के शराब विक्रेता रवींद्र डेकाटे को MPDA में छत्रपति संभाजीनगर जेल भेजा गया
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वर्धा के कलेक्टर ने हिंगणघाट के रवींद्र तुकाराम डेकाटे के खिलाफ MPDA के तहत स्थानबद्धता का आदेश जारी किया। उस पर आठ मामले दर्ज हैं और उसे छत्रपति संभाजीनगर मध्यवर्ती जेल में रखा गया है।
हिंगणघाट पुलिस स्टेशन के रिकॉर्ड में दर्ज रवींद्र तुकाराम डेकाटे को MPDA कानून के तहत हिरासत में लेकर छत्रपति संभाजीनगर मध्यवर्ती जेल भेज दिया गया है। डेकाटे 41 साल का है और हिंगणघाट के संत चोखोबा वार्ड का रहने वाला है। हिंगणघाट तहसील वर्धा जिले में आती है। पुलिस ने उसे शराब विक्रेता और खतरनाक व्यक्ति की श्रेणी में रखा है।
हिंगणघाट पुलिस स्टेशन में 2020 से डेकाटे के खिलाफ कुल 8 मामले दर्ज हैं। इनमें साथियों के साथ मिलकर अश्लील गाली-गलौज करने, जान से मारने की धमकी देने, चोट पहुंचाने और हत्या की कोशिश करने के आरोप हैं। देसी महुआ शराब की तस्करी और बिक्री के आरोप भी हैं। एक मामला तब का है, जब वह जिलाबदर था और इसके बावजूद प्रतिबंधित इलाके में घुसकर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का आरोप उस पर लगा।
पुलिस का कहना है कि डेकाटे ने हिंगणघाट पुलिस स्टेशन के इलाके में लोगों के मन में भारी दहशत बैठा दी थी। इस दहशत की वजह से कई पीड़ित उसके खिलाफ पुलिस स्टेशन में शिकायत देने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाते थे। इससे इलाके की शांति और कानून-व्यवस्था बिगड़ रही थी और आम लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा था।
उसके खिलाफ पहले भी रोकथाम की कार्रवाई हो चुकी थी। यह कार्रवाई महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम 1951 की धारा 56 (अ) (ब) और धारा 56(1) (अ) (ब) के तहत हुई। दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 151(1), 107, 116 (3) और 110 (ग) के तहत भी कार्रवाई की गई। इसके अलावा MPDA 1981 की धारा 3 और भा. ना. सु. सं. 2023 की धारा 129 (ई) के तहत भी रोकथाम की कार्रवाई हुई थी। पुलिस के मुताबिक वह इन कार्रवाइयों को भी नहीं मानता था और इसके बाद भी लगातार अपराध करता रहा।
इसके बाद हिंगणघाट पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक अनिल राऊत ने उसे हिरासत में लेने का प्रस्ताव तैयार किया। यह प्रस्ताव महाराष्ट्र झोपड़पट्टी दादा, कच्ची शराब बनाने वाले, औषधि द्रव्य संबंधी अपराधी, खतरनाक व्यक्ति, रेत माफिया और जीवनावश्यक वस्तुओं का कालाबाजार करने वालों की विघातक गतिविधियों को रोकने संबंधी अधिनियम 1981 (संशोधन 2015) के तहत था। प्रस्ताव वर्धा के पुलिस अधीक्षक सौरभ कुमार अग्रवाल के जरिए जिला मजिस्ट्रेट और कलेक्टर श्रीमती वान्मथी सी. को भेजा गया।
कलेक्टर ने 6 नवंबर 2026 को हिरासत का आदेश जारी किया। इस आदेश के तहत डेकाटे को छत्रपति संभाजीनगर मध्यवर्ती जेल में रखा गया है।
कलेक्टर वान्मथी सी. और पुलिस अधीक्षक सौरभ कुमार अग्रवाल ने संकेत दिया है कि अवैध शराब बेचने वालों और गुंडागर्दी करने वाले खतरनाक लोगों पर MPDA के तहत सख्त कार्रवाई आगे भी होगी। इसका मकसद वर्धा जिले में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, ताकि त्योहार भी शांति से गुजरें।
आंकड़ों के मुताबिक 2025 में कुल 18 शराब विक्रेताओं और गुंडा प्रवृत्ति के अपराधियों को MPDA के तहत अलग-अलग जेलों में हिरासत में रखा गया था। 2026 में अब तक 13 खतरनाक गुंडों और अवैध शराब विक्रेताओं को अलग-अलग जेलों में हिरासत में लिया जा चुका है।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक सौरभ कुमार अग्रवाल, अपर पुलिस अधीक्षक सदाशिव वाघमारे, उपविभागीय पुलिस अधिकारी सुनील महाडिक और स्थानीय अपराध शाखा के पुलिस निरीक्षक विनोद चौधरी के मार्गदर्शन में हुई। वर्धा स्थानीय अपराध शाखा के पुलिस हवालदार अमोल आत्राम और आशिष महेशगोरी इसमें शामिल थे। हिंगणघाट पुलिस स्टेशन से पुलिस निरीक्षक अनिल राऊत, पुलिस हवालदार प्रवीण देशमुख और पुलिसकर्मी संग्राम मुंडे, शिवशंकर यादव और संतोष लोहटे भी कार्रवाई में रहे।


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