GST के 9 साल बाद नया रास्ता: डेटा एनालिसिस से पकड़ी जाएगी कर चोरी, कारोबारियों से सहयोग पर जोर
नागपुर में GST जोन की फीडबैक बैठक में CBIC चेयरमैन ने कहा कि डेटा एनालिसिस से कर चोरी पकड़ी जाएगी और अधिकारी कारोबारियों के साथ सहयोगी रुख अपनाएंगे।
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GST लागू हुए 9 साल हो चुके हैं और अब सरकार का पूरा ध्यान टैक्सपेयर्स का दायरा बढ़ाने और नकद यानी कैश टैक्स कलेक्शन में इजाफा करने पर है। केंद्र और राज्य के GST अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि कर चोरी पकड़ने के लिए पुरानी सख्ती की जगह आधुनिक डेटा एनालिसिस और खुफिया जानकारी का इस्तेमाल करें।
बताया गया कि टैक्स कलेक्शन 14-15 फीसदी की वृद्धि के साथ स्टेबल हो चुका है। इसलिए इसमें और इजाफा तभी हो सकता है, जब करदाता बढ़ाए जाएं। व्यापार और उद्योग जगत की राय जानने के लिए जीएसटी नागपुर जोन की ओर से एक 'फीडबैक' बैठक रखी गई थी।
इस बैठक में केंद्रीय अप्रत्यक्ष बोर्ड (CBIC) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी और सदस्य संजय मंगल ने कारोबारियों से बातचीत की। शहर के प्रमुख उद्यमी, व्यापारी और संगठनों के प्रमुख मौजूद थे। नागपुर जोन के मुख्य आयुक्त संदीप पुरी और अपर आयुक्त मुकुल पाटिल भी वहां थे।
विवेक चतुर्वेदी ने कहा कि पिछले दिनों हुई GST काउंसिल की बैठक में कई बदलाव किए गए हैं। इनका सीधा मतलब यह है कि ईज ऑफ डुइंग बिजनेस को आगे बढ़ाया जाए। लोगों को सरलतम कानून दिया जाए, ताकि नेट में ज्यादा से ज्यादा लोग आएं और राजस्व बढ़ सके।
संजय मंगल ने बताया कि जीएसटी विभाग अब इनकम टैक्स के 'प्यार से नियम मानने के लिए प्रेरित करना' अभियान की तर्ज पर काम करेगा। अधिकारियों से कहा गया है कि वे कारोबारियों के कामकाज में जरूरत से ज्यादा दखल न दें। जीएसटी की दरें और प्रक्रियाएं काफी हद तक स्थिर हो चुकी हैं, इसलिए अधिकारियों का काम सिर्फ टैक्स वसूलना नहीं रहेगा। वे कारोबारियों के लिए 'मददगार' की भूमिका निभाएंगे और बेवजह दबाव डालने के बजाय 'सहयोगी रुख' अपनाएंगे, ताकि आपस में भरोसा बने। इसके निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
कार्यक्रम में प्रशांत मोहता, मालपानी निर्भय संचेती, अजय गुप्ता, दीपेन अग्रवाल, शशिकांत कोठारकर, किशोर मालवीय, जुल्फेश शाह, स्वप्निल अहिरकर और हेमंत सारडा भी उपस्थित थे।
कर अपराधों के मामले में GST के तहत गिरफ्तारी का प्रावधान खत्म करने की सिफारिश की गई है। केस चलाने की न्यूनतम सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ कर दी गई है। न्यूनतम सजा की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है। जिन मामलों में कोई विशिष्ट जुर्माना लागू नहीं होता, वहां सामान्य जुर्माना 25,000 से घटाकर 10,000 कर दिया गया है।
रिफंड को लेकर भी बदलाव हुए हैं। रिफंड दावे की रसीद मिलने की समय-सीमा 15 दिनों से घटाकर 10 दिन कर दी गई है। जोखिम आधारित मूल्यांकन के तहत रसीद मिलने के 3 कार्य दिवसों के भीतर 90% पात्र रिफंड दावों को मंजूरी देकर रिफंड ऑर्डर जारी कर दिया जाएगा।
चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने कहा कि अब जीएसटी दर को लेकर कोई बात नहीं कर रहा है। लोगों को सरल कानून चाहिए, इसलिए वे जीएसटी रजिस्ट्रेशन से लेकर रिफंड की प्रक्रियाओं पर बात करने लगे हैं। उनके मुताबिक काउंसिल ने भी यह समझ लिया है और उसी हिसाब से काम हो रहा है।
उन्होंने कहा कि देशभर के कारोबारियों से चर्चा की जा रही है और उनसे सुझाव मांगे जा रहे हैं। इन सुझावों पर 3 माह में रिपोर्ट बनाई जाएगी और फिर सुधार के और कदम उठाए जाएंगे।