सोम‌वार, 19 अक्टूबर 2026

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06:08 IST

त्योहार से पहले दालें महंगी, अरहर 150 और मोठ 180 रुपये किलो तक पहुंची

चालीसगांव के बाजार में दालों के भाव सौ रुपये के पार चले गए हैं और आम ग्राहक का घरेलू बजट बिगड़ गया है।

त्योहार से पहले दालें महंगी, अरहर 150 और मोठ 180 रुपये किलो तक पहुंची तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

जलगांव जिले के चालीसगांव में त्योहारों के ठीक पहले महंगाई तेज हो गई है। दालों के भाव सौ रुपये के पार निकल गए हैं और आम लोगों की जेब पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। एक तरफ राज्य में सूखे का साया है, दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई ने आम नागरिकों का हिसाब-किताब पूरी तरह बिगाड़ दिया है।

बाजार भाव के मुताबिक चना दाल 100 रुपये किलो हो गई है। मूंग दाल 130 रुपये और अरहर (तूर) दाल 150 रुपये किलो पर है। लोबिया दाल 140 रुपये किलो और मसूर दाल 100 रुपये किलो तक पहुंच गई है। वहीं देसी मोठ का भाव 170 से 180 रुपये किलो तक चला गया है।

दालों के साथ-साथ ज्वार, बाजरा और गेहूं के दाम भी ग्राहकों की चिंता बढ़ा रहे हैं। गेहूं और लोकवन गेहूं का भाव 35 रुपये प्रति किलो है, जिससे परिवारों का महीने भर का किराने का खर्च बढ़ रहा है। चावल के दाम बढ़ने से भी लोगों का बजट बिगड़ रहा है, ऐसी भावना जताई जा रही है।

आम लोगों के सामने अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि गेहूं, चावल और अलग-अलग दालों के बढ़े हुए दाम देखकर गुजारा कैसे किया जाए। कमाई सीमित है और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं, इसलिए गृहिणियों का महीने का बजट गड़बड़ा गया है।

पहले जो परिवार महीने की शुरुआत में ही पूरा किराना भरकर रख लेते थे, उन्हें अब हर चीज की मात्रा तय करके खरीदारी करनी पड़ रही है। महंगाई की वजह से कुछ परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतों में भी कटौती करनी पड़ रही है। उनके सामने सवाल है कि त्योहार का खर्च कैसे पूरा करें।

राज्य में सूखे जैसे हालात हैं। ऐसे में अनाज के दाम बढ़ने का सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। महंगाई का बोझ उठा रहे नागरिकों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी बताया जा रहा है। इनमें बाजार के भावों पर काबू रखना, जमाखोरी और बनावटी महंगाई पर नजर रखना और जरूरतमंद परिवारों को सस्ते दाम पर जरूरी चीजें मुहैया कराना शामिल है।

लोगों की उम्मीद है कि त्योहार के मौसम में सरकार बाजार भावों पर नजर रखे और महंगाई पर काबू पाने के लिए असरदार कदम उठाए। बढ़ती कीमतों से लोगों की नाराजगी भी बढ़ती जा रही है।

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