गलत ITC क्लेम किया तो भरना पड़ेगा सालाना 18% ब्याज और जुर्माना भी
जीएसटी में गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने या उसका इस्तेमाल करने पर ब्याज और जुर्माना लगता है।
जो कारोबारी जीएसटी भरते हैं, उनके लिए ITC यानी इनपुट टैक्स क्रेडिट बहुत मायने रखता है। इसकी वजह से कारोबारी अपनी खरीद पर चुकाया हुआ जीएसटी, बिक्री पर बनने वाली जीएसटी देनदारी में से घटा सकते हैं। इससे कारोबार के खर्च और कैश फ्लो, दोनों पर राहत मिलती है।
लेकिन हर खरीद पर ITC नहीं मिलता। अगर किसी कारोबारी ने ऐसी खरीद पर ITC ले लिया जिसका वो हकदार नहीं था, या गलत ITC का इस्तेमाल कर लिया, तो मुसीबत खड़ी हो सकती है। ऐसे मामलों में ब्याज और जुर्माना लगता है। गलत तरीके से लिए और इस्तेमाल किए गए ITC पर ब्याज की दर सालाना 18% है।
एक उदाहरण से समझिए। मान लीजिए एक व्यापारी ने माल खरीदते वक्त Rs 18,000 जीएसटी चुकाया। बाद में वही माल बेचते वक्त उसने Rs 30,000 जीएसटी वसूला। नियमों के हिसाब से अगर वो Rs 18,000 के ITC का दावा करने के काबिल है, तो इसे अपनी जीएसटी देनदारी के सामने एडजस्ट कर सकता है। यानी उसे सरकार को पूरे Rs 30,000 नहीं भरने पड़ेंगे। ITC एडजस्ट होने के बाद उसकी टैक्स देनदारी कम हो जाएगी। मगर ये फायदा तभी मिलता है जब खरीद और ITC, दोनों जीएसटी नियमों पर खरे उतरें।
ITC का दावा करने के लिए सिर्फ बिल होना काफी नहीं है। सिर्फ टैक्स इनवॉइस होने से भी दावा नहीं बनता। व्यापारी को कई शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं। जैसे माल या सेवा असल में मिली हो, सप्लायर ने जीएसटी सिस्टम में जरूरी जानकारी सही दर्ज की हो, और खरीदार ने अपनी एंट्रियों का GSTR-2B जैसे स्टेटमेंट से मिलान कर लिया हो।
अगर सप्लायर ने इनवॉइस दर्ज ही नहीं किया, या उसमें कोई गलती है, तो खरीदार के रिकॉर्ड की वजह से भी ITC में दिक्कत आती है। इसलिए कारोबारियों के लिए जरूरी है कि वो अपनी खरीद की एंट्रियों को GSTR-2B से मिला लें।
जीएसटी में एक और अहम नियम 180 दिन का है। अगर किसी कारोबारी ने माल खरीदा और इनवॉइस की तारीख से 180 दिन के अंदर सप्लायर को पैसे नहीं चुकाए, तो उस खरीद पर लिया गया ITC वापस जोड़ना पड़ सकता है।
अब सवाल ये कि 18% ब्याज कब लगेगा। ITC गलत तरीके से क्लेम करने और उसका कम इस्तेमाल करने में फर्क है। जीएसटी नियमों के मुताबिक गलत तरीके से लिए और इस्तेमाल किए गए ITC पर ब्याज लगता है, और इसकी दर सालाना 18% तय की गई है। ब्याज की गिनती इस हिसाब से होती है कि गलत ITC कब इस्तेमाल हुआ।
एक और उदाहरण लीजिए। अगर किसी कारोबारी ने गलती से Rs 1 लाख के ITC का क्लेम किया और उसे इस्तेमाल भी कर लिया, तो सिर्फ Rs 1 लाख लौटाना काफी नहीं होगा। नियमों के मुताबिक मामले की स्थिति देखकर ब्याज लग सकता है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।