गोकुळ में सतेज पाटील का पैनल 13-12 से जीता, अब अध्यक्ष चुनाव पर महायुति की नजर
कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ (गोकुळ) के चुनाव में सतेज पाटील के पैनल ने महायुति को हराया। 29 अक्टूबर को अध्यक्ष का चुनाव होना है।
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कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ, यानी गोकुळ के चुनाव में सत्ताधारी महायुति ने पूरी ताकत झोंक दी थी, फिर भी उसे हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस नेता सतेज पाटील की अगुवाई वाले समविचारी पैनल ने महायुति के पैनल को 13-12 के अंतर से हरा दिया।
चुनाव से पहले अंदाजा लगाया जा रहा था कि सतेज पाटील के समविचारी पैनल को सिर्फ चार सीटें मिलेंगी। लेकिन पैनल ने बहुमत हासिल कर लिया, भले ही वह किनारे का बहुमत हो। इसी दौरान महायुति के कुछ नेताओं ने 25-0 से जीत का दावा किया था। असल चुनाव में सतेज पाटील ने महायुति को झटका देते हुए अपने 13 संचालक जितवा लिए। महायुति के 12 संचालक जीते।
चुनाव के बाद अब आने वाली 29 अक्टूबर को गोकुळ के नए चुने गए संचालक अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। गोकुळ की सत्ता हाथ में न आने से महायुति अब अध्यक्ष पद के चुनाव में नई चाल चल सकती है, ऐसी संभावना जताई जा रही है।
चर्चा है कि महायुति के नेता आज मुंबई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिल सकते हैं। कोल्हापुर के सियासी गलियारों में बात चल रही है कि मुख्यमंत्री की सलाह लेकर महायुति अपनी अगली चाल तय करेगी। आज मुंबई में राज्य मंत्रिमंडल की तय बैठक होनी है, और बताया जा रहा है कि उसके बाद महायुति के नेता फडणवीस से बात करेंगे।
सूत्रों के मुताबिक अध्यक्ष चुनाव की सभा में गैरहाजिर रहने के बारे में महायुति के नए चुने संचालकों को अभी कोई निर्देश नहीं मिला है। मगर गोकुळ के अध्यक्ष पद के लिए महायुति अपना उम्मीदवार उतार सकती है। ऐसा हुआ तो संचालक मंडल के चुनाव की तरह अध्यक्ष पद का चुनाव भी दिलचस्प हो सकता है।
इस बीच सतेज पाटील ने इन तमाम अटकलों को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि अध्यक्ष चुनाव में महायुति के नेता सहयोग करेंगे। इस बारे में उनकी हसन मुश्रीफ, विनय कोरे और चंद्रदीप नरके से पहले ही बात हो चुकी है।
सतेज पाटील ने कहा कि गोकुळ दूध संघ के संस्थापक चेयरमैन स्वर्गीय आनंदराव पाटील चुयेकर के बेटे को अध्यक्ष बनाने का सपना पूरा होने जा रहा है। इसलिए उन्हें नहीं लगता कि महायुति के नेता कोई अलग फैसला लेंगे।
उन्होंने यह भी साफ किया कि शासन मान्य संचालक या स्वीकृत संचालक वोट नहीं दे सकते। उनका कहना था कि अगर ऐसा वोट पड़ने लगा, तो सहकारी क्षेत्र के चुनावों का कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा।
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