गोकुल चुनाव में सतेज पाटील के गठबंधन को बहुमत, तीन पूर्व अध्यक्ष हारे
कोल्हापूर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ (गोकुल) के चुनाव में सतेज पाटील की अगुवाई वाले गठबंधन ने 16 सीटें जीतीं, महायुति को 9 सीटें मिलीं।
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कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ यानी गोकुल के चुनाव में सतेज पाटील की अगुवाई वाली राजर्षी शाहू शेतकरी समविचारी आघाडी ने बहुमत हासिल किया है। इस नतीजे से महायुति को झटका लगा है। कोल्हापुर के सहकारिता क्षेत्र में इसके बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक समविचारी गठबंधन ने 16 सीटें जीतीं, जबकि महायुति को 9 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। कोल्हापुर की राजनीति में गोकुल दूध संघ का चुनाव प्रतिष्ठा का माना जाता है और इस बार मुकाबला कांटे का रहा। सतेज पाटील के गठबंधन और महायुति के बीच सीधी टक्कर देखने को मिली।
नतीजे आने के बाद समर्थकों ने अजिंक्यतारा कार्यालय में जश्न मनाया। अब गोकुल दूध संघ के आगे के कामकाज में सतेज पाटील के गुट की भूमिका अहम रहेगी।
इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा अनुभवी नेताओं की हार की है। उपलब्ध खबरों के अनुसार मंत्री हसन मुश्रीफ के बेटे नविद मुश्रीफ, साथ ही अरुण डोंगळे और विश्वास पाटील को हार का सामना करना पड़ा। गोकुल की राजनीति में अहम भूमिका निभा चुके नेताओं के हारने से नतीजे की चर्चा और बढ़ गई है। महायुति के पास राजनीतिक ताकत, अनुभवी नेतृत्व और असरदार संगठन होने के बावजूद समविचारी गठबंधन की यह कामयाबी लोगों का ध्यान खींच रही है।
सतेज पाटील को अब 'जायंट किलर' कहा जा रहा है। यह चुनाव सिर्फ दूध संघ के प्रबंधन तक सीमित नहीं था। कोल्हापुर में राजनीतिक असर और सहकारिता क्षेत्र में दबदबे की लड़ाई के तौर पर भी इसे देखा जा रहा था। इसी वजह से सतेज पाटील की अगुवाई वाले गठबंधन की जीत को खास अहमियत मिल रही है। राजनीतिक तौर पर मजबूत विरोधियों को चुनौती देकर मिली इस जीत से सहकारिता क्षेत्र में उनके नेतृत्व को नई ताकत मिलने की संभावना है।
प्रचार के दौरान भावनात्मक अपील, धार्मिक आस्था का जिक्र और मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिशों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप हुए थे। लेकिन अंतिम नतीजे से साफ हो गया है कि मतदाताओं ने किसके पक्ष में फैसला दिया।
गोकुल दूध संघ कोल्हापुर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। दूध उत्पादक किसान, दूध इकट्ठा करने की व्यवस्था और संघ का आर्थिक लेन-देन, इन सबके लिहाज से संस्था के कामकाज की खास अहमियत है। अब नजर इस पर रहेगी कि नया सत्ताधारी गुट दूध उत्पादकों के हित में क्या फैसले लेता है।
गठबंधन को मिला बहुमत आने वाले दिनों में दूध संघ की फैसला लेने की प्रक्रिया में निर्णायक साबित हो सकता है। दूसरी तरफ महायुति को इस हार की वजहें खंगालनी पड़ेंगी। कुल मिलाकर गोकुल चुनाव का नतीजा सिर्फ दूध संघ तक सीमित नहीं है। इसे कोल्हापुर की राजनीति में नेतृत्व, संगठन की ताकत और सहकारिता क्षेत्र में असर की कसौटी माना जा रहा है।
राजर्षी शाहू शेतकरी समविचारी आघाडी के विजयी उम्मीदवारों में शशिकांत पाटील चुयेकर, बाबासाहेब श्रीपती चौगुले, अभिजित प्रभाकर ताईशेटे, किसन बापू सो चौगुले, राहुल बजरंग देसाई, बाबासाहेब विष्णू देवकर, विश्वजित दिनकरराव जाधव, विद्याधर बाबूराव गुरबे, सचिन दौलतराव घोरपडे, अंजना केदारी रेडेकर, भाग्यश्री धीरज डोंगळे, शशिकांत शामराव खोत, राजुबाबा जयवंतराव आवळे और बयाजी देवू शेळके शामिल हैं।
महायुति प्रणित छत्रपती शाहू शेतकरी विकास आघाडी के जीतने वाले उम्मीदवार हैं राजेश नरसिंगराव पाटील, राहुल पी. एन. पाटील, रणजित के. पी. पाटील, रणजित दिलीप पाटील, अंबरिशसिंह संजय घाटगे, चेतन अरुण नरके, अजित शशिकांत नरके, अजित पांडुरंग पाटील और वीरेंद्र संजय मंडलिक।