घुग्घूस के वार्ड 10 की आंगनवाड़ी बदहाल, नशेड़ियों के जमावड़े का आरोप
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
घुग्घूस नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 10 की एक आंगनवाड़ी के आसपास झाड़ियां, कचरा और आवारा जानवर हैं। छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
चंद्रपुर जिले के घुग्घूस में नगर परिषद हद के वार्ड क्रमांक 10 की एक आंगनवाड़ी के आसपास की कथित बदहाली से छोटे बच्चों की सुरक्षा का सवाल खड़ा हो गया है। यह सवाल नगर परिषद प्रशासन के इंतजाम पर भी उठ रहा है। यह आंगनवाड़ी दो से तीन साल के बच्चों के लिए चलाई जाती है।
बताया जा रहा है कि आंगनवाड़ी के आसपास झाड़ियां उग आई हैं, कचरा पड़ा है और आवारा जानवर घूमते रहते हैं। इसके अलावा आरोप है कि इस इलाके में असामाजिक तत्व और नशेड़ी इकट्ठा होते हैं। इसी वजह से आंगनवाड़ी में आने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है।
आंगनवाड़ी के आसपास जगह-जगह छोटी झाड़ियां और घनी घास बढ़ गई है। दावा किया जा रहा है कि कुछ जगह घास इतनी बढ़ी है कि छोटे बच्चे दिखना भी मुश्किल हो सकता है। जगह-जगह कचरा जमा है और गायों समेत दूसरे आवारा जानवर भी घूमते हैं, ऐसी शिकायत है।
यह जगह बच्चों के खेलने, बैठने और महफूज माहौल में वक्त बिताने के लिए है। ऐसे में इसकी यह हालत साफ-सफाई और देखरेख के इंतजाम पर सवालिया निशान लगाती है।
आंगनवाड़ी में बहुत छोटी उम्र के बच्चे आते हैं। इसलिए इलाके की नियमित सफाई, झाड़ियों की छंटाई, कचरे का सही निपटारा और सुरक्षित आने-जाने का इंतजाम जरूरी है। अगर नशेड़ियों के घूमने की शिकायत सच निकली, तो मामला और गंभीर हो जाता है।
वार्ड क्रमांक 10 के पार्षद, महिला पार्षद और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। अपने वार्ड की बुनियादी सुविधाओं, सफाई और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर जनप्रतिनिधियों से गंभीरता से ध्यान देने की उम्मीद की जाती है।
ऐसे में यह जांच जरूरी बताई जा रही है कि आंगनवाड़ी के आसपास की यह कथित बदहाली कितने दिनों से चल रही है। यह तय करने की मांग भी अहम होती जा रही है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है और किसकी क्या जवाबदेही बनती है।
आजकल सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर समस्याएं दिखाना कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों के लिए प्रचार का जरिया बनता दिख रहा है। लेकिन जनप्रतिनिधियों के काम की असली कसौटी सोशल मीडिया की सक्रियता नहीं, बल्कि जमीन पर समस्या सुलझाना है। वार्ड 10 की आंगनवाड़ी की कथित बदहाली से यही मुद्दा सामने आया है। बच्चों के सुरक्षित भविष्य की बात करने वाले जनप्रतिनिधियों को अपने वार्ड की बुनियादी सुविधाओं पर भी उतना ही ध्यान देना चाहिए।
घुग्घूस नगर परिषद की दल नेता मीणा मोरपाका ने वार्ड क्रमांक 10 के जनप्रतिनिधियों के कामकाज के तरीके की तीखी आलोचना की है और छोटे बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि दो से तीन साल के बच्चों से जुड़ी आंगनवाड़ी जैसी अहम जगह की हालत को नजरअंदाज करना गंभीर बात है। उनका कहना है कि बच्चों को साफ और सुरक्षित माहौल देना सबकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
अब सवाल उठ रहा है कि नगर परिषद प्रशासन इस आंगनवाड़ी के आसपास सफाई, झाड़ियों की छंटाई, कचरे के निपटारे और आवारा जानवरों को रोकने के लिए ठोस कदम कब उठाएगा। नागरिकों की नजर इस पर भी है कि इलाके में नशेड़ियों के जमावड़े की शिकायत की जांच करके बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए जाएंगे।
उम्मीद जताई जा रही है कि संबंधित अधिकारी फौरन मौके का मुआयना करें, इलाके को साफ और सुरक्षित बनाएं और लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारों पर उचित कार्रवाई करें। बच्चों की सुरक्षा राजनीतिक प्रचार का मुद्दा नहीं, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की बुनियादी जिम्मेदारी है। अब देखना है कि वार्ड 10 की इस आंगनवाड़ी की तस्वीर सचमुच बदलती है या बच्चों की सुरक्षा का सवाल यूं ही अनुत्तरित रहता है।
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