GCC में बढ़ रही है MBA वालों की मांग, फाइनेंस से मार्केटिंग तक खुल रहे हैं मौके
भारत के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स अब सिर्फ आईटी तक सीमित नहीं हैं। वित्त, मार्केटिंग, एचआर और सप्लाई चेन के काम भी यहीं से संभाले जा रहे हैं।
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भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स का दायरा अब सिर्फ आईटी और टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रहा। बहुराष्ट्रीय कंपनियां इन केंद्रों के जरिए वित्त, मार्केटिंग, मानव संसाधन, बिजनेस एनालिटिक्स और सप्लाई चेन मैनेजमेंट जैसे अहम काम भी संभाल रही हैं।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स वे केंद्र हैं, जहां बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार से जुड़े अलग-अलग कामकाज चलाती हैं। इसके साथ ही वे कारोबारी रणनीति, नयापन और फैसले लेने की प्रक्रिया को भी मजबूत करती हैं। भारत में इनकी मौजूदगी बढ़ने से ऐसे लोगों की मांग बढ़ी है, जिन्हें कारोबार की समझ के साथ डेटा एनालिसिस, संवाद और टीम मैनेजमेंट का हुनर भी आता हो।
2026 की NASSCOM-Zinnov इंडिया GCC लैंडस्केप रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2,117 GCCs हैं। इनमें करीब 23.6 लाख प्रोफेशनल्स काम करते हैं। इस क्षेत्र से करीब 98.4 अरब अमेरिकी डॉलर का रेवेन्यू मिलता है।
GCC के फैलाव से MBA प्रोफेशनल्स के लिए भी करियर के कई रास्ते बने हैं। फाइनेंस में बजटिंग, फाइनेंशियल प्लानिंग और रिस्क मैनेजमेंट के मौके हैं। ह्यूमन रिसोर्स में टैलेंट एक्विजिशन, कर्मचारियों का विकास और ग्लोबल टीम्स का मैनेजमेंट आता है। मार्केटिंग और कस्टमर एक्सपीरियंस में मार्केट रिसर्च, ग्राहकों के बर्ताव का विश्लेषण और अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग ऑपरेशन्स से जुड़े रोल अहम होते जा रहे हैं।
EY के नवंबर 2025 के GCC प्लस सर्वे के मुताबिक सर्वे में शामिल 79 फीसदी केंद्रों ने फाइनेंस, 65 फीसदी ने ह्यूमन रिसोर्सेस, 54 फीसदी ने सप्लाई चेन मैनेजमेंट और 31 फीसदी ने मार्केटिंग से जुड़े काम की जानकारी दी। यह आंकड़ा इन कामों की मौजूदगी बताता है, कुल नौकरियों में उनका हिस्सा नहीं।
MBA की मांग बढ़ने की वजहें भी गिनाई गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक GCCs बड़े पैमाने पर प्रोडक्ट डेवलपमेंट और ग्लोबल ओनरशिप की तरफ बढ़ रहे हैं। इससे भारत के केंद्रों में ग्लोबल लीडरशिप रोल्स 2030 तक 6,500 से बढ़कर 30,000 से ज्यादा होने का अंदाजा है।
कंपनियां फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजिनियर्स (FDEs) और हाइब्रिड मैनेजर्स जैसे टैलेंट की तेजी से तलाश कर रही हैं। ये लोग बिजनेस सेन्स को टेक्निकल या प्रोडक्ट फ्लूएंसी के साथ जोड़ते हैं और AI व डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को आगे ले जाते हैं।
GCCs के फाइनेंस और ऑपरेशन्स विंग अब रूटीन अकाउंटिंग से आगे बढ़ चुके हैं। वे 500+ रेग्युलेटरी मैंडेट्स में एंटरप्राइज-वाइड ट्रांसफॉर्मेशन, रिस्क मैनेजमेंट और कम्प्लायंस की अगुवाई कर रहे हैं। हायरिंग का झुकाव अब मिड-करियर प्रोफेशनल्स की तरफ है, यानी 4 से 10 साल के अनुभव वाले लोग, जिनके पास डोमेन एक्सपर्टीज भी है और मैनेजमेंट की तेज समझ भी।
नौकरी के मौके कई क्षेत्रों में हैं। फाइनेंस और अकाउंटिंग में बजट बनाना, आर्थिक योजना, जोखिम संभालना और वित्तीय नियमों का पालन। ह्यूमन रिसोर्स में कर्मचारियों की भर्ती, ट्रेनिंग, उनका संतोष और अलग-अलग देशों में काम करती टीम्स का मैनेजमेंट। मार्केटिंग और कस्टमर एक्सपीरियंस में मार्केट स्टडी, ग्राहकों की पसंद समझना, ब्रांड से जुड़े काम और अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग गतिविधियां।
बिजनेस एनालिटिक्स में आंकड़ों का विश्लेषण, कारोबारी फैसलों में मदद और कंपनी का प्रदर्शन सुधारने के रास्ते खोजना शामिल है। ऑपरेशन्स और सप्लाई चेन मैनेजमेंट में खरीद, लॉजिस्टिक्स, सप्लाई व्यवस्था, कामकाज के तरीके में सुधार और वेंडरों के साथ तालमेल का काम आता है।
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