प्रोटोकॉल चूक पर मीरा-भाईंदर की अतिरिक्त आयुक्त प्रियंका राजपूत का तबादला, सचिन बांगर आए
सरकारी कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र में कैबिनेट मंत्री का प्रोटोकॉल के हिसाब से नाम न होने पर राज्य सरकार ने जांच के बाद कार्रवाई की।
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मीरा-भाईंदर महानगरपालिका के प्रशासन को सरकारी कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र में कैबिनेट मंत्री का नाम प्रोटोकॉल के हिसाब से न लिखना भारी पड़ गया है। प्रोटोकॉल के कथित उल्लंघन को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया और जांच करवाई। जांच के बाद महानगरपालिका की अतिरिक्त आयुक्त प्रियंका राजपूत का मीरा-भाईंदर से तबादला कर दिया गया है।
प्रियंका राजपूत को वसई-विरार शहर महानगरपालिका में उपायुक्त के पद पर नियुक्त किया गया है। उनकी जगह सचिन बांगर को अतिरिक्त आयुक्त बनाया गया है। इस कार्रवाई के बाद महानगरपालिका के गलियारों में जोरदार चर्चा शुरू हो गई है।
पूरा मामला 15 अप्रैल 2026 को हुए क्रीड़ा संकुल के लोकार्पण समारोह से शुरू हुआ। इस कार्यक्रम के लिए छपे निमंत्रण पत्र का मसौदा प्रोटोकॉल अधिकारियों से जंचवाना और प्रमाणित करवाना जरूरी था। जांच में सामने आया कि यह प्रक्रिया पूरी किए बगैर ही निमंत्रण पत्र छाप दिया गया।
खास बात यह रही कि इस निमंत्रण पत्र में महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री और धाराशिव जिले के पालकमंत्री प्रताप सरनाईक के नाम का प्रोटोकॉल और वरिष्ठता क्रम के हिसाब से जरूरी जिक्र नहीं किया गया था। इससे यह मामला सिर्फ एक निमंत्रण पत्र की इबारत का नहीं रहा। यह सीधे सरकारी प्रोटोकॉल के पालन का सवाल बन गया।
इसी दौरान 5 मई 2026 को महानगरपालिका के रजत महोत्सवी साल के मौके पर हुए कामगार दिवस सत्कार समारोह के निमंत्रण पत्र का मुद्दा भी जांच के दायरे में आ गया। जांच में दर्ज किया गया कि इस निमंत्रण पत्र का मसौदा आधिकारिक मंजूरी और जरूरी प्रोटोकॉल प्रक्रिया पूरी किए बिना फाइनल कर दिया गया।
दोनों घटनाओं की जांच के लिए पांच सदस्यों की समिति बनाई गई थी। समिति ने 20 जुलाई 2026 को बैठक की और उसके बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में कहा गया कि संबंधित विभागों और अधिकारियों ने सामान्य प्रशासन विभाग के 20 नवंबर 2025 के परिपत्र और महानगरपालिका आयुक्त के 11 मार्च 2026 के आदेशों का पालन नहीं किया।
जांच रिपोर्ट आने के बाद प्रोटोकॉल विभाग और नगरविकास विभाग ने मामले का संज्ञान लिया। इसके बाद सरकार के स्तर पर कार्रवाई हुई और तबादले के आदेश निकले।
क्रीड़ा संकुल के उद्घाटन के निमंत्रण पत्र का मजमून जरूरी प्रमाणन के बगैर फाइनल करने के मामले में शहर अभियंता दीपक खांबित के खिलाफ भी अनुशासन भंग की बात दर्ज की गई है। अब महानगरपालिका के गलियारों की नजर इस पर है कि उन पर क्या कार्रवाई होती है।
इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि प्रशासन के अधिकारियों को सरकारी नियमों और प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि सरकारी कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल निभाना सिर्फ किसी मंत्री या व्यक्ति का सम्मान नहीं है, यह जनप्रतिनिधियों के संवैधानिक पद का सम्मान है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासनिक कामकाज में नियम के बाहर के तरीकों की जगह नहीं होनी चाहिए और आगे प्रोटोकॉल का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। एक निमंत्रण पत्र में नाम के क्रम से शुरू हुआ यह विवाद आखिरकार अतिरिक्त आयुक्त के तबादले तक पहुंच गया। अब देखना होगा कि महानगरपालिका के आगामी सरकारी कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल के नियम कितनी सख्ती से लागू होते हैं।