नागपुर मंडल में तबादलों पर रेलवे कर्मचारी संघ ने जांच मांगी, प्रशासन ने आरोप नकारे
मध्य रेलवे कर्मचारी संघ ने नागपुर मंडल में ट्रांसफर और ड्यूटी बांटने के तरीके पर सवाल उठाए हैं, जबकि सीनियर डीओएम कृष्णाथ पाटिल ने आरोपों को खारिज किया है।
मध्य रेलवे के नागपुर मंडल में कर्मचारियों के तबादले, ड्यूटी का बंटवारा और संवेदनशील पदों पर सालों से जमे लोगों का मामला गरमा गया है। एक तरफ मंडल प्रशासन है, दूसरी तरफ कर्मचारी संगठन। भारतीय मजदूर संघ से जुड़े मध्य रेलवे कर्मचारी संघ (एमआरकेएस) ने पारदर्शी ट्रांसफर नीति की मांग की है। संघ ने मंडल प्रबंधन के कामकाज पर गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं।
संघ का कहना है कि जो रेलकर्मी नियमों को किनारे रखकर बरसों से एक ही जगह टिके हैं, और जो अधिकारी इस इंतजाम को संरक्षण दे रहे हैं, उनके खिलाफ उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। संघ ने यह मांग कागजी सबूतों के साथ रखने की बात कही है।
एमआरकेएस के महामंत्री सागर सिंह तोमर ने मध्य रेलवे के महाप्रबंधक (मुंबई) को ज्ञापन भेजा है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि परिचालन विभाग में नियमों का उल्लंघन हो रहा है। तोमर के मुताबिक आम नियम यह है कि संवेदनशील पदों पर कार्यकाल 3 वर्ष का होता है, जिसमें अधिकतम 1 वर्ष का विस्तार मिल सकता है। इसके बावजूद कई स्टेशन मास्टर, ट्रेन मैनेजर और कंट्रोलर 10 से 25 वर्षों से एक ही जगह पर बने हुए हैं।
एमआरकेएस का दावा है कि कुछ कर्मचारी फील्ड में ड्यूटी नहीं करते, फिर भी उन्हें ड्रेस और टॉर्च भत्ता मिल रहा है। संघ का यह भी कहना है कि मेडिकल आधार पर हल्के काम के पात्र बीमार कर्मचारियों से कठिन काम और नाइट ड्यूटी कराई जा रही है। संघ ने वरिष्ठ मंडल परिचालन विभाग प्रमुख और कुछ दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों पर तानाशाही, वित्तीय अनियमितता और एमआरकेएस पदाधिकारियों के साथ द्वेषपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया है। इन अधिकारियों के तत्काल तबादले की मांग भी की गई है।
तोमर ने यह भी कहा कि रेलवे बोर्ड के सर्कुलर के हिसाब से यूनियन पदाधिकारियों के ट्रांसफर के लिए यूनियन की अनुमति जरूरी है, यह बात सही है। लेकिन उनके मुताबिक यह शर्त सिर्फ एक वर्ष की सीमा तक लागू होती है। तोमर का कहना है कि अगर किसी पदाधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज है या कोई कानूनी कार्यवाही चल रही है, तो प्रबंधन उसका ट्रांसफर तुरंत कर सकता है।
तोमर ने आरोप लगाया कि मंडल में कई साल से एक ही स्टेशन और एक ही विभाग में जमे यूनियन पदाधिकारियों में कुछ ऐसे हैं, जिन्होंने 5 जनवरी 2024 को कंट्रोल रूम हाईजैक कर रेल परिचालन ठप करने जैसा संगीन अपराध किया था। उनके मुताबिक इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई, पर ढाई साल बाद भी ये पदाधिकारी कंट्रोल रूम में ही ड्यूटी कर रहे हैं। तोमर ने सवाल किया कि क्या परिचालन विभाग प्रमुख इस बात की गारंटी देंगे कि ये लोग दोबारा कंट्रोल रूम बंद नहीं करेंगे, और मंडल प्रबंधन ऐसे पदाधिकारियों पर इतना मेहरबान क्यों है।
प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। सीनियर डीओएम कृष्णाथ पाटिल की ओर से बताया गया कि संवेदनशील पदों पर काम कर रहे कई कर्मचारी मान्यता प्राप्त यूनियनों के पदाधिकारी हैं। नियम के हिसाब से उनके तबादले के लिए संबंधित यूनियनों की अनापत्ति यानी सहमति जरूरी होती है, इसलिए प्रक्रिया में वक्त लगता है। पाटिल के मुताबिक प्रशासन ऐसे कर्मचारियों के तबादले का प्रस्ताव पहले ही वरिष्ठ स्तर पर भेज चुका है। उन्होंने कहा कि एमआरकेएस की सारी गलतफहमियां दूर कर स्थिति साफ कर दी गई है।