मुंबई लोकल: कवच 5.0 से दो गाड़ियों के बीच का फासला घट सकता है, भीड़ में बढ़ सकती हैं फेरियां
भारतीय रेलवे उपनगरीय सेवाओं के लिए कवच 5.0 नाम की ऑटोमैटिक सुरक्षा प्रणाली तैयार कर रही है। मध्य रेलवे के मुंबई विभाग में इसे दिसंबर 2026 तक शुरू करने की योजना है।
मुंबई के उपनगरीय रेलवे मुसाफिरों को जल्द बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। भारतीय रेलवे "कवच 5.0" नाम की नई ऑटोमैटिक रेलवे सुरक्षा प्रणाली तैयार कर रही है। मकसद यह है कि दो लोकल के बीच का फासला कम किया जाए, ताकि मौजूदा रेलवे लाइनों पर ही ज्यादा गाड़ियां चलाई जा सकें। इससे भीड़ के वक्त लोकल की फेरियां बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है।
अभी मुंबई की उपनगरीय लाइनों पर लगातार चलने वाली दो लोकल के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए एक तय वक्त रखना पड़ता है। इसी वजह से सुबह और शाम की भीड़ में मौजूद इन्फ्रास्ट्रक्चर का पूरी क्षमता से इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है।
कवच 5.0 का निशाना दो गाड़ियों के बीच की सुरक्षित दूरी और उसके लिए लगने वाले वक्त को घटाना है। नतीजा यह हो सकता है कि आज जो लाइनें मौजूद हैं, उन्हीं पर ज्यादा लोकल दौड़ें। अंदरूनी कागजात के आधार पर बताया गया है कि मध्य रेलवे के मुंबई विभाग में कवच 5.0 को लागू करने का काम दिसंबर 2026 तक शुरू करने की योजना है। हालांकि असल में कितनी अतिरिक्त फेरियां जुड़ेंगी, यह आखिरी फैसला सिग्नल व्यवस्था, उपलब्ध गाड़ियों, इन्फ्रास्ट्रक्चर और अंतिम परिचालन टाइमटेबल पर निर्भर करेगा।
इस प्रणाली में ड्राइवर को अगले सिग्नल की जानकारी, अगले सिग्नल तक की दूरी और दूसरी जरूरी जानकारी मिलती रहेगी। अगर गाड़ी इजाजत से ज्यादा रफ्तार से दौड़ी, तो प्रणाली अपने आप ब्रेक लगा सकती है। सामने से या बगल से होने वाली संभावित टक्कर से बचाने की क्षमता भी इसमें बताई गई है। कवच 5.0 से मौजूदा टाइमटेबल में करीब 30 फीसदी ज्यादा सेवाओं की गुंजाइश बन सकती है।
दो लोकल के बीच का फासला घटने पर प्लेटफॉर्म पर इंतजार का वक्त कम हो सकता है। भीड़ के घंटों में लोकल ज्यादा बार मिलने की संभावना है। मौजूदा रेलवे ढांचे का और बेहतर इस्तेमाल होगा तो मुसाफिरों को ढोने की क्षमता भी बढ़ सकती है। रेलवे की जानकारी के मुताबिक कवच 5.0 खास तौर पर उपनगरीय रेलवे सेवाओं के लिए बनाई जा रही है। कम फासले पर चलने वाली, बार-बार रुकने वाली और जिनमें बड़ी तादाद में मुसाफिर चढ़ते-उतरते हैं, ऐसी लोकल सेवाओं को ध्यान में रखकर इसका डिजाइन तैयार किया गया है।
कवच का सफर 2016 में शुरू हुआ था। जुलाई 2020 में इसे भारत की देसी ऑटोमैटिक रेलवे सुरक्षा प्रणाली के तौर पर अपनाया गया। 2024 में कवच 4.0 को आखिरी मंजूरी मिली। अप्रैल 2025 में उपनगरीय सेवाओं के लिए कवच 5.0 का ऐलान किया गया। अब मुंबई की लोकल सेवा में इसे लागू करने की तैयारी चल रही है।