गर्मी के तूफान से कोको की फसल चौपट, दाम करीब तीन गुना, चॉकलेट पर असर का डर
आयवरी कोस्ट और घाना में कोको की पैदावार करीब आधी रह गई है। दाम करीब तीन गुना हो गए हैं।
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चॉकलेट खाने के शौकीनों के लिए दुनिया के बाज़ार से फिक्र वाली खबर आई है। मौसम में बदलाव की मार अब सीधे चॉकलेट इंडस्ट्री पर पड़ रही है। दुनिया में सबसे ज़्यादा कोको पैदा करने वाले दो देश आयवरी कोस्ट और घाना हैं। दावा किया गया है कि वहाँ 'हीट स्टॉर्म वेरा' की वजह से कोको की फसल को भारी नुकसान पहुँचा है।
इन दोनों देशों में पैदावार करीब आधी रह गई, तो दुनिया के बाज़ार में कोको की कमी हो गई। नतीजा यह कि कोको के दाम करीब तीन गुना हो गए हैं और इसका असर चॉकलेट के दामों पर भी पड़ने की आशंका है।
आयवरी कोस्ट और घाना को कोको उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। दुनिया की कोको पैदावार में इन दोनों का मिलाकर करीब 50 फीसदी हिस्सा है। इसी वजह से इन देशों के मौसम में कोई भी बदलाव सीधे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार पर असर डालता है।
'हीट स्टॉर्म वेरा' से इस इलाके का तापमान काफ़ी बढ़ गया। गर्मी की तेज़ी से कोको के पेड़ों पर दबाव पड़ा। फूल आने, फल बनने और कोको की फलियों के बढ़ने पर इसका असर हुआ। इससे किसानों की पैदावार में भारी गिरावट आई। दोनों देशों की फसल करीब आधी घटने से कोको की दुनिया भर की सप्लाई पर दबाव बन गया।
कोको चॉकलेट बनाने का मुख्य कच्चा माल है। इसलिए कोको की सप्लाई घटती है, तो पूरी चॉकलेट इंडस्ट्री पर उसका असर पड़ता है। आयवरी कोस्ट और घाना में उत्पादन घटने से चॉकलेट बनाने वाली कंपनियों के सामने दोहरी दिक्कत खड़ी हो गई है। एक तरफ कच्चा माल मिलना मुश्किल है, दूसरी तरफ खर्च बढ़ रहा है।
कोको के दाम करीब तीन गुना होने से कंपनियों को अपने उत्पादन खर्च पर फिर से सोचना पड़ रहा है। कुछ कंपनियों को चॉकलेट के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं। कुछ कंपनियाँ बढ़ते खर्च का बोझ संभालने के लिए चॉकलेट का वज़न घटाने की कोशिश कर सकती हैं। इसलिए ग्राहकों की जेब पर भी असर पड़ने की आशंका है।
कोको की पैदावार घटने का सबसे ज़्यादा असर वहाँ के स्थानीय किसानों पर पड़ रहा है। गर्मी से पेड़ों की पैदावार कम होना, फसल का नुकसान और बारिश के बदलते चक्र ने खेती को और मुश्किल बना दिया है।
दाम बढ़े हैं, फिर भी उसका पूरा फायदा किसानों तक पहुँचता हो, ऐसा नहीं है। खेती का बढ़ता खर्च, बीमारियाँ और कम पैदावार से उनकी कमाई अनिश्चित हो गई है। इसके अलावा कोको की खेती के लिए अनुकूल मौसम बनाए रखना भी बड़ी चुनौती बन गया है।
दुनिया का तापमान बढ़ने का असर अब सिर्फ खेती या पानी की सप्लाई तक सीमित नहीं रहा। हमारे रोज़ के पसंदीदा खाने की चीज़ों पर भी इसका असर दिखने लगा है। कोको उत्पादन में आई गिरावट को इसका उदाहरण माना जा रहा है। आगे भी अगर गर्मी की तेज़ लहरें और बेतरतीब बारिश बढ़ी, तो कोको की पैदावार पर और दबाव आ सकता है। ऐसे में चॉकलेट इंडस्ट्री के सामने कच्चे माल की स्थिर सप्लाई बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।