गडचिरोली में 73 फीसदी किसानों के पास बहुत कम जमीन, कमाई बढ़ाना बड़ी चुनौती
कृषि गणना के आंकड़ों के मुताबिक गडचिरोली जिले में ज्यादातर किसान छोटे जोत वाले हैं। विशेषज्ञ सामूहिक खेती को आमदनी बढ़ाने का असरदार रास्ता बता रहे हैं।
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कृषि गणना के आंकड़ों से साफ हुआ है कि गडचिरोली जिले में खेती ज्यादातर छोटे और कम जमीन वाले किसानों की है। जिले में कुल 1 लाख 51 हजार 733 भूधारक हैं और उनके पास करीब 2 लाख 42 हजार 451.69 हेक्टेयर खेती का क्षेत्र है।
लेकिन इस क्षेत्र का बंटवारा देखें तो ज्यादातर किसानों के पास बहुत ही थोड़ी जमीन है। इसी वजह से खेती को किफायती और फायदे का सौदा बनाना बड़ी चुनौती बन गया है।
आदिवासी बहुल गडचिरोली जिले में 2 हेक्टेयर तक जमीन वाले किसानों का हिस्सा 73.02 प्रतिशत है। इन किसानों के पास जिले के कुल खेती क्षेत्र का 39.59 प्रतिशत है। वहीं 2 से 5 हेक्टेयर जमीन वाले किसान 22.80 प्रतिशत हैं और उनके पास कुल खेती क्षेत्र का 39.89 प्रतिशत है। यानी करीब 96 प्रतिशत किसानों के पास 5 हेक्टेयर से कम जमीन है।
इसके उलट 5 से 10 हेक्टेयर जमीन वाले किसान सिर्फ 3.55 प्रतिशत हैं। 10 से 20 हेक्टेयर जमीन रखने वालों का हिस्सा 0.55 प्रतिशत है, जबकि 20 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन वाले किसान महज 0.08 प्रतिशत हैं।
खेती का क्षेत्र छोटा होने से कई दिक्कतें खड़ी होती हैं। खेत छोटे टुकड़ों में बंटे हैं, इसलिए आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल, सिंचाई की सुविधा, फसलों में विविधता, भंडारण, कृषि प्रोसेसिंग उद्योग और बाजार तक पहुंच में अड़चनें आती हैं। नतीजा यह कि उत्पादन खर्च बढ़ता है, लेकिन उसके मुकाबले आमदनी नहीं बढ़ती। इसी वजह से कई किसानों को खेती के साथ मजदूरी या दूसरे रोजगार का सहारा लेना पड़ता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक गडचिरोली जैसे जिले में सामूहिक यानी समूह खेती एक असरदार विकल्प बन सकती है। कई किसान एक साथ आकर जुताई, बीज, खाद, सिंचाई, मशीनीकरण, कटाई, भंडारण और बिक्री का काम मिलकर करें, तो उत्पादन खर्च में बचत हो सकती है और उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। किसान उत्पादक कंपनियों, सहकारी संस्थाओं और समूह खेती के जरिए बाजार में बेहतर भाव मिलने का मौका भी बन सकता है।
खास बात यह है कि जिले में संयुक्त धारण क्षेत्र का हिस्सा 24.92 प्रतिशत है। इस क्षेत्र का असरदार इस्तेमाल करके सामूहिक खेती, मशीनीकरण, सिंचाई और आधुनिक खेती के तरीके अपनाए जाएं, तो छोटे किसानों की आमदनी बढ़ने में मदद मिल सकती है।
छोटे किसानों के लिए सिर्फ सब्सिडी वाली योजनाएं काफी नहीं होंगी। खेती को उद्योग का रूप देने के लिए समूह खेती, मूल्यवर्धन, कृषि प्रोसेसिंग उद्योग, जैविक खेती, कृषि पर्यटन और किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने वाली योजनाओं पर असरदार अमल जरूरी है। वरना खेती में आमदनी बढ़ाने का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा, ऐसी आशंका कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञ जता रहे हैं।