येवला के पिंपळगाव जलाल में डांगर की 70 फीसदी फसल खराब, भाव सिर्फ 4 से 5 रुपये किलो
नाशिक जिले के येवला तालुका के पिंपळगाव जलाल में डांगर उगाने वाले किसान खराब फसल और गिरे हुए भाव की दोहरी मार झेल रहे हैं।
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महाराष्ट्र में इस वक्त सूखे का साया है। नाशिक जिले के येवला तालुका के पिंपळगाव जलाल गांव के किसान इसकी मार सबसे ज्यादा झेल रहे हैं। बारिश वक्त पर नहीं आई, जिसका असर उनकी पैदावार पर साफ दिख रहा है।
पितृपक्ष और नवरात्र के आसपास किसानों को आम तौर पर अच्छा बाजार भाव मिलता है। इसी उम्मीद में पिंपळगाव जलाल के किसानों ने डांगर (कद्दू) की खेती करने का फैसला किया। उन्हें लगा था कि दूसरी फसलों के मुकाबले डांगर का भाव बेहतर मिलेगा।
लेकिन बारिश ने पीठ फेर ली और ऊपर से धूप की तेज मार पड़ी। इसकी वजह से डांगर की करीब 70 फीसदी फसल खराब हो गई। किसानों को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जो फसल बची, उसका हाल भी अच्छा नहीं है। पके हुए डांगर में से 30 फीसदी उत्पादन को भी उम्मीद के मुताबिक भाव नहीं मिल रहा। बाजार में डांगर 4 से 5 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहा है। यानी एक तरफ फसल का नुकसान हुआ और दूसरी तरफ जो माल बचा उसे कौड़ियों के भाव में बेचना पड़ रहा है। किसान दोहरे संकट में फंस गए हैं।
पैदावार घटने के बाद भी बाजार में सही दाम नहीं मिल रहा, इसलिए किसान हताश हैं। कुछ किसानों ने तो डांगर बेचने के बजाय उसे काटकर जानवरों को खिला दिया। इतनी मेहनत और खर्च के बाद भी उगाए हुए डांगर से उन्हें मनचाही कमाई नहीं हो रही है। इस वजह से किसान आर्थिक संकट में आ गए हैं।
किसानों का अपना कहना है कि सूखे की वजह से बारिश कम हुई है। उनके मुताबिक उन्होंने डांगर की खेती शुरू की थी, लेकिन अब बाजार में उसे सही भाव नहीं मिल रहा। नवरात्र सिर पर है और डांगर का सीजन बेकार चला गया। किसानों का कहना है कि 30 से 40 फीसदी डांगर अच्छा है, पर 60 फीसदी डांगर खराब हो चुका है। बाजार में डांगर को 3 से 4 रुपये का भाव मिल रहा है, इसलिए उन्हें नुकसान सहना पड़ रहा है।