एमबीबीएस के बाद कौन सी स्पेशलाइजेशन चुनें और रोज कितने घंटे पढ़ाई करें
मेडिकल की पढ़ाई में रोज कितना वक्त देना चाहिए और एमबीबीएस के बाद कौन से रास्ते खुलते हैं, इसकी जानकारी।
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इंजीनियरिंग में जैसे कॉम्प्युटर सायन्स (CS) को सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली स्ट्रीम माना जाता है, वैसे ही मेडिकल में यह दर्जा एमबीबीएस (MBBS) को मिला हुआ है। मेडिकल में आगे बढ़ने वाले विद्यार्थियों के बीच एमडी/एमएस (MD/MS) की क्लिनिकल स्पेशलाइजेशन सबसे ज्यादा पसंदीदा पर आती है। लेकिन मेडिकल करिअर सिर्फ एक विषय चुन लेने की बात नहीं है। इसमें कई साल की पढ़ाई और क्लिनिकल ट्रेनिंग शामिल होती है।
भारत में अंडरग्रेजुएट मेडिकल पढ़ाई में दाखिले के लिए 'नीट-यूजी' (NEET-UG) मुख्य राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है। एनटीए (NTA) के मुताबिक देश के मेडिकल संस्थानों में अंडरग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन में प्रवेश लेने के लिए नीट-यूजी सबसे बेहतर रास्ता है।
मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिलने के बाद विद्यार्थियों को कई विषय पढ़ने पड़ते हैं। शुरुआती दौर में एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री जैसे विषय मेडिकल साइंस की नींव बनाते हैं। उसके बाद पैथोलॉजी, फार्माकोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, मेडिसिन, सर्जरी और दूसरे क्लिनिकल विषय पढ़ाए जाते हैं।
एमबीबीएस के बाद असल में स्पेशलाइजेशन की दौड़ शुरू होती है। एमडी में जनरल मेडिसिन, डर्मेटोलॉजी, पेडियाट्रिक्स, रेडियोडायग्नोसिस और साइकियाट्री, तथा एमएस में जनरल सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स और ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी जैसी शाखाएं विद्यार्थियों में लोकप्रिय हैं।
अब बात पढ़ाई के घंटों की। नीट की तैयारी करने वाले विद्यार्थी के लिए आम दिनों में रोज 6 से 8 घंटे पढ़ाई का लक्ष्य रखना फायदेमंद रहता है। एमबीबीएस में सिर्फ किताबें पढ़ लेना काफी नहीं होता। कॉलेज की एकेडमिक एक्टिविटीज के अलावा रोज 3 से 5 घंटे सेल्फ-स्टडी (स्वयंअध्ययन) कई विद्यार्थियों के काम आती है। परीक्षा या प्रोफेशनल एग्जाम के वक्त पढ़ाई का समय बढ़ा देना और भी फायदेमंद हो सकता है।
मेडिकल की पढ़ाई में सिर्फ रटना नहीं होता। उसके साथ क्लिनिकल एप्लिकेशन और प्रैक्टिकल स्किल्स (व्यावहारिक कौशल) भी बेहद अहम होते हैं।
मेडिकल क्षेत्र का दायरा सिर्फ एमबीबीएस और डॉक्टर बनने तक सीमित नहीं है। एमबीबीएस के बाद विद्यार्थी अपनी पसंद और रैंक के हिसाब से मेडिसिन, सर्जरी, पेडियाट्रिक्स, डर्मेटोलॉजी, रेडियोलॉजी, साइकियाट्री, ऑर्थोपेडिक्स और ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी जैसे अलग-अलग विशेष विषयों में आगे जा सकते हैं।
इसके अलावा मेडिकल रिसर्च, पब्लिक हेल्थ, मेडिकल एजुकेशन और हेल्थकेयर मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में भी करिअर के मौके बनाए जा सकते हैं।