सौरभ ढुमणे बने वैद्यकीय अधिकारी, माता-पिता के आशीर्वाद को दिया सफलता का श्रेय
कोपरगाव के होमिओपॅथी मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई पूरी कर सौरभ वैद्यकीय अधिकारी के तौर पर सेवा में आ रहे हैं।
सौरभ ने राष्ट्रसंत जनार्दन स्वामी होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर, कोपरगाव, तालुका शिर्डी, जिला अहिल्यानगर से मेडिकल की पढ़ाई पूरी की है और अब चिकित्सा अधिकारी के तौर पर काम शुरू कर रहे हैं। इस खुशी में परिवार, दोस्तों और चाहने वालों की तरफ से उन पर बधाइयों की बौछार हो रही है।
सौरभ ने कृतज्ञता के साथ कहा कि इस कामयाबी के पीछे सबसे बड़ी ताकत माता-पिता का आशीर्वाद और अथक मेहनत है। उनके पिता का नाम विलास नत्थूजी ढुमणे है और माँ सौ. लीला विलास ढुमणे पूर्व नगरसेविका हैं। सौरभ के मुताबिक माता-पिता से मिले संस्कार, प्यार, सहारा और उनकी पढ़ाई के लिए की गई मेहनत की वजह से ही वे इस मुकाम तक पहुँच सके।
मेडिकल की पढ़ाई के सफर में कई लोगों ने उनका मार्गदर्शन किया और हौसला बढ़ाया, ऐसा सौरभ ने बताया। इनमें माधुरी रामटेके, शालिनी चव्हाण, पांडुरंग आंबटकर (चेयरमैन, सोमय्या ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स), एड. अज़र कुरेशी, डॉ. इमरान, नितेशकुमार, डॉ. पंकज कविश्वर, डॉ. शीतलकुमार सोनवणे, महेंद्र रामटेके, प्रवीण दिघोरे और पंकज भासमे के नाम उन्होंने लिए।
इसके अलावा विलास केबल नेटवर्क मित्रपरिवार, गौतम नगर वार्ड के लोगों, अशोक डोंगे (बाबा), सिंधू ढुमणे (दादी), नारायण डोंगे (मामा), महेश मोरे (सरपंच), अतुल कोल्हे, अनिल पडोले (नगरसेवक) और तन्नय चिकटे के सहयोग के लिए भी सौरभ ने खास तौर पर आभार जताया है।
कॉलेज के दिनों में शुभम कांडलकर, योगेश निकाले, उज्ज्वल सोनवणे, साक्षी काकडे, गायत्री वैद्य, पार्नवी खडकर और निलम मैडम ने भी उनका बहुत साथ दिया। सौरभ ने यह भी बताया कि सूरज डाकरे ने निजी और पढ़ाई, दोनों सफर में लगातार मार्गदर्शन किया और हौसला दिया।
चिकित्सा अधिकारी के तौर पर नई जिम्मेदारी शुरू करते वक्त उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे समाज के जरूरतमंद मरीजों की संवेदनशीलता और ईमानदारी से सेवा करने का आदर्श बनाए रखेंगे। उनकी इस कामयाबी पर परिवार, दोस्त, शिक्षक और भद्रावती के लोग शुभकामनाएँ दे रहे हैं।