गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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00:10 IST

जलगांव की महिला को 5 साल से कान में धड़कन जैसी आवाज से जसलोक हॉस्पिटल में मिली राहत

जसलोक हॉस्पिटल में मिनिमली इनवेसिव प्रोसीजर के बाद जळगाव की 25 साल की महिला पल्साटाइल टिनिटस से पूरी तरह ठीक हुई।

जलगांव की महिला को 5 साल से कान में धड़कन जैसी आवाज से जसलोक हॉस्पिटल में मिली राहत
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मुंबई: महाराष्ट्र के जळगाव की रहने वाली 25 साल की एक महिला को पिछले पांच साल से ज्यादा टाइम से कान में एक अजीब सी आवाज सुनाई दे रही थी, जो एकदम धड़कन के साथ मैच करती थी, "व्हूशिंग" जैसी। जसलोक हॉस्पिटल अँड रिसर्च सेंटर में एक मिनिमली इनवेसिव प्रोसीजर के बाद उसे इस तकलीफ से पूरी तरह छुटकारा मिल गया है। डॉक्टरों का कहना है कि इस केस से पता चलता है कि रक्तवाहिनियों से जुड़ी असली वजह पकड़ में आ जाए तो सालों की परेशानी झेल रहे पल्साटाइल टिनिटस के मरीजों का असरदार इलाज मुमकिन है।

महिला को धड़कन के साथ लगातार व्हूशिंग आवाज सुनाई देती थी। सालों तक कई डॉक्टरों को दिखाया, कई टेस्ट और इलाज भी करवाए, लेकिन तकलीफ से पक्का आराम कभी नहीं मिला। आखिरकार उसने मुंबई आकर जसलोक हॉस्पिटल अँड रिसर्च सेंटर में इलाज कराने का फैसला किया। यहां न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. फाली पोंचा, एंडोवस्कुलर न्यूरोसर्जन डॉ. सुधीर आंबेकर और हेमॅटोलॉजिस्ट डॉ. समीर शाह की टीम ने मरीज की एमआरआई और एमआरव्ही जांच की। इसमें पता चला कि दिमाग की मेन रक्तवाहिनी सिकुड़ गई है, जिसे "वेनस साइनस स्टेनोसिस" कहते हैं। इसकी वजह से खून का बहाव गड़बड़ा गया था और इसी वजह से कान में लय में व्हूशिंग आवाज आ रही थी।

इलाज के तौर पर मरीज पर "मिनिमली इनवेसिव वेनस साइनस स्टेंटिंग" प्रोसीजर की गई, जिसमें रक्तवाहिनी का रास्ता चौड़ा किया गया। स्टेंट लगाते ही 5 साल से चली आ रही पल्साटाइल टिनिटस की तकलीफ फौरन गायब हो गई। जसलोक हॉस्पिटल अँड रिसर्च सेंटर के एंडोवस्कुलर न्यूरोसर्जन डॉ. सुधीर आंबेकर ने बताया, "इस बीमारी का अक्सर गलत डायग्नोसिस हो जाता है या इसे मेंटल स्ट्रेस समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन सही डायग्नोसिस के बाद जांघ की नस से कैथेटर दिमाग तक ले जाकर स्टेंट लगाने की मिनिमली इनवेसिव प्रोसीजर से लक्षण तुरंत दूर हो जाते हैं। कम चीरफाड़ वाले इस इलाज की वजह से मरीज को सिर्फ दो दिन में डिस्चार्ज दे दिया गया।"

पल्साटाइल टिनिटस एक बहुत रेयर बीमारी है, जिसमें मरीज को कान में धड़कन की लय में व्हूशिंग या धड़कने जैसी आवाज सुनाई देती है। दुनिया भर में 14.4 प्रतिशत बड़ों को टिनिटस की तकलीफ है, लेकिन पल्साटाइल टिनिटस का हिस्सा कुल केसों में 10 प्रतिशत से भी कम है। ऑटोलॉजी की एक स्टडी के मुताबिक नए मरीजों में से सिर्फ 0.09 प्रतिशत में ही इसका डायग्नोसिस होता है, और गंभीर केसों की अलग से कोई परिभाषा न होने की वजह से इसकी गंभीरता को लेकर अब भी साफ आंकड़े मौजूद नहीं हैं।

जसलोक हॉस्पिटल अँड रिसर्च सेंटर के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. फाली पोंचा ने कहा, "पल्साटाइल टिनिटस को नजरअंदाज करने के बजाय इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। यह केस याद दिलाता है कि लगातार बने रहने वाले और साफ न हो पाने वाले लक्षणों की कभी-कभी कोई ऐसी वजह होती है जिसका इलाज मुमकिन है। इसलिए 'कुछ भी गड़बड़ नहीं है' सुनने के बाद भी मरीजों को उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए।"

जसलोक हॉस्पिटल अँड रिसर्च सेंटर के सीईओ श्री जितेंद्र हरियाण ने कहा, "इतने सालों की तकलीफ के बाद मरीज का पूरी तरह लक्षणमुक्त हो जाना बहुत संतोष की बात है। यह केस दिखाता है कि मरीज की जिंदगी पर गंभीर असर डालने वाली बीमारियों से पार पाने के लिए खास एक्सपर्टीज और एडवांस मिनिमली इनवेसिव टेक्नोलॉजी कितनी जरूरी है। मरीज की स्थिति चाहे कितनी भी कॉम्प्लिकेटेड या रेयर क्यों न हो, उसे सही डायग्नोसिस और बेस्ट इलाज देना ही हमारा मकसद है।"

यह सक्सेसफुल इलाज दिखाता है कि कान में लगातार आने वाली और धड़कन से मैच करने वाली आवाज को नजरअंदाज किए बिना उसकी सही मेडिकल जांच होना कितना जरूरी है। कई इलाजों के बाद भी अस्पष्ट रह गए पल्साटाइल टिनिटस की असली वजह ढूंढ निकालना ही मरीज को सही इलाज और इस तकलीफ से पूरी तरह छुटकारा दिलाने का सबसे अहम कदम साबित होता है।

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