डोंबिवली के सावित्रीबाई फुले नाट्यगृह के लिए 30 करोड़ मंजूर, कुल रकम 45 करोड़ हुई
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नगरविकास विभाग ने 4 नवंबर को सरकारी आदेश जारी किया। पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी और काम की जिम्मेदारी कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका की होगी।
डोंबिवली के सावित्रीबाई फुले नाट्यगृह के पुनर्विकास को आखिरकार पैसों का सहारा मिल गया है। राज्य सरकार के नगरविकास विभाग ने बचे हुए कामों के लिए 30 करोड़ रुपये का फंड मंजूर किया है। इससे पहले इस प्रोजेक्ट के लिए 15 करोड़ रुपये मंजूर हो चुके थे। अब उसमें 30 करोड़ जुड़ने से कुल 45 करोड़ रुपये का प्रावधान हो गया है।
नगरविकास विभाग ने इस बारे में 4 नवंबर को सरकारी आदेश जारी किया। यह निर्णय उपमुख्यमंत्री और नगरविकास मंत्री एकनाथ शिंदे के आदेश पर निकला। फंड "महानगरपालिका क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए विशेष प्रावधान" योजना के तहत मंजूर हुआ है। प्रोजेक्ट का पूरा 100 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार करेगी, जबकि अमल की जिम्मेदारी कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका को सौंपी गई है।
कल्याण लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे इस मामले में लगातार पीछे लगे रहे। उन्होंने नाट्यगृह के पुनर्विकास के लिए जरूरी फंड दिलाने की मांग राज्य सरकार से बार-बार की थी, ताकि पैसों की तंगी की वजह से काम न रुके। उनकी इसी पैरवी के बाद बचे कामों के लिए 30 करोड़ की मंजूरी मिली है।
डोंबिवली को सांस्कृतिक नगरी की पहचान दिलाने में सावित्रीबाई फुले नाट्यगृह का बड़ा हाथ रहा है। यहां कई सालों तक नाटक, संगीत की महफिलें, साहित्यिक कार्यक्रम और तरह-तरह के सांस्कृतिक समारोह होते रहे। स्थानीय कलाकारों से लेकर नामी कलाकारों तक, सबके लिए यह अपना मंच था। लेकिन इमारत जर्जर हो जाने की वजह से नाट्यगृह को बंद करना पड़ा। इससे नाट्यसंस्थाओं, कलाकारों और नाटक देखने वालों को काफी परेशानी हुई। डोंबिवली की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के हिसाब से नाट्यगृह फिर खड़ा हो, यह मांग लगातार उठ रही थी।
पुनर्विकास के बाद नाट्यगृह में कई आधुनिक सुविधाएं होंगी। इनमें ये शामिल हैं:
नाटकों के लिए भव्य और आधुनिक रंगमंच।
दर्शकों के लिए बेहतर बैठने की व्यवस्था।
आधुनिक लाइटिंग और आकर्षक अंदरूनी सजावट।
छोटे नाट्यप्रयोगों के लिए अलग ड्रामा थिएटर।
कलाकारों की रिहर्सल के लिए अलग अभ्यास कक्ष।
चित्रकला और दूसरी कलाओं की प्रदर्शनी के लिए अलग आर्ट गैलरी।
नाट्यगृह के बाहरी परिसर और अंदरूनी हिस्से का विकास।
इन सुविधाओं के साथ सावित्रीबाई फुले नाट्यगृह सिर्फ नाटकों का सभागार नहीं रहेगा, बल्कि डोंबिवली का सर्वसमावेशी सांस्कृतिक केंद्र बनकर उभरेगा। उम्मीद है कि डोंबिवली की नाट्यसंस्थाओं, शौकिया कलाकारों और सांस्कृतिक क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं को फिर से अपना मंच मिलेगा। फंड मंजूर होने से पुनर्विकास के कामों में तेजी आने की उम्मीद है। अब डोंबिवली के लोग इस इंतजार में हैं कि बचे काम पूरे हों और नाट्यगृह सचमुच चालू हो जाए।
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