दिवाली पर एसटी का किराया नहीं बढ़ेगा, सरनाईक ने 15% बढ़ोतरी का प्रस्ताव ठुकराया
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने 1 से 15 नवंबर 2026 के बीच प्रस्तावित 15% मौसमी किराया बढ़ोतरी नामंजूर कर दी है।
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दिवाली के सीजन में एसटी बस से सफर करने वालों को इस बार टिकट के लिए ज्यादा पैसे नहीं देने पड़ेंगे। परिवहन मंत्री और एसटी महामंडल के अध्यक्ष प्रताप सरनाईक ने 15% की प्रस्तावित मौसमी किराया बढ़ोतरी का प्रस्ताव नामंजूर कर दिया है। सूखे और बढ़ती महंगाई से आम लोग पहले ही आर्थिक तंगी झेल रहे हैं, ऐसे में दिवाली की भीड़ के मौसम में यात्रियों को बड़ी राहत मिली है।
हर साल दिवाली की भीड़ के वक्त एसटी महामंडल की तरफ से किराये में मौसमी बढ़ोतरी की जाती है। इस बार भी एसटी प्रशासन ने 1 नवंबर से 15 नवंबर 2026 के बीच सभी के लिए एक समान 15% बढ़ोतरी का प्रस्ताव परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के सामने रखा था। लेकिन सरनाईक ने यह कहते हुए प्रस्ताव खारिज कर दिया कि जो जनता पहले से आर्थिक संकट में है, उस पर और बोझ डालना ठीक नहीं है।
यह फैसला सूखे से परेशान किसानों, महंगाई के कारण बढ़े घरेलू खर्च को संभाल रहे लोगों और परिवार का गुजारा चलाते हुए आर्थिक खींचतान झेल रहे लोगों को ध्यान में रखकर लिया गया। सरनाईक ने अपना रुख साफ करते हुए कहा, 'पहले से संकटों में घिरी जनता को किराया बढ़ोतरी का झटका देकर उसके जख्म पर नमक छिड़कना मुझे मंजूर नहीं है।'
महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में लाखों लोगों के लिए एसटी की 'लालपरी' सफर का अहम जरिया है। किसान, खेत मजदूर, विद्यार्थी, नौकरीपेशा लोग, बुजुर्ग और मेहनतकश तबका बड़ी तादाद में एसटी की सेवा पर निर्भर है। किराया 15% बढ़ता तो उनके रोज के खर्च में इजाफा होता। खासकर सूखे की वजह से जिन परिवारों की आर्थिक दिक्कतें बढ़ी हैं, उनके लिए यह अतिरिक्त बोझ उठाना मुश्किल होता।
सरनाईक ने साफ किया कि एसटी महामंडल घाटे में जरूर है, लेकिन उसकी भरपाई के लिए यात्रियों पर ही बोझ डालना ठीक नहीं है। परिवहन मंत्री ने भरोसा जताया कि संकट के समय किसानों और आम नागरिकों को बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता की दिक्कतें समझकर उसे राहत देना सरकार की जिम्मेदारी है।
उनके मुताबिक दूर-दराज के गांवों से लेकर शहरों तक सुरक्षित, भरोसेमंद और किफायती सेवा देना एसटी महामंडल का फर्ज है। इसलिए आर्थिक दिक्कतों से उबरने के लिए दूसरे उपाय खोजने की जरूरत है, यह बात उन्होंने रेखांकित की। 'जनता की जेब में हाथ डालने से ज्यादा जरूरी है उसकी आंखों के आंसू पोंछना,' यह कहते हुए उन्होंने प्रस्तावित किराया बढ़ोतरी को नकार दिया। इस तरह दिवाली के दौरान यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न डालने का फैसला लिया गया है।