दिल्ली में मुनगंटीवार बोले, भारतीय संस्कृति पूरी दुनिया को कल्याण की राह दिखाती है
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गायत्री परिवार के समारोह में विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि मानवता की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है और भारत में जन्म लेना हजारों जन्मों का पुण्य है।
नई दिल्ली में हुए एक समारोह में विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि भारत की महानता सिर्फ उसके भौगोलिक फैलाव, ताकत या इतिहास की शान में नहीं है। उनके मुताबिक यह महानता हजारों साल की तपस्या से बने अध्यात्म, संस्कार, मानवता और विश्वकल्याण के विचारों में बसी है। उन्होंने कहा कि इसी अनमोल भारतीय संस्कृति को घर-घर के लोगों के मन में उतारने और उसकी रोशनी पूरी दुनिया तक पहुंचाने का काम गायत्री परिवार कर रहा है।
यह समारोह वंदनीय माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी वर्ष के मौके पर हुआ। मुनगंटीवार ने कहा कि यह सिर्फ एक बड़ी शख्सियत को याद करने का उत्सव नहीं है। यह भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना को फिर से जगाने और आने वाली पीढ़ियों तक आध्यात्मिक मूल्यों की विरासत पहुंचाने का संकल्प है। इस पवित्र समारोह में शामिल होने का मौका मिलने पर उन्होंने आभार जताया और भारतीय संस्कृति की महानता, राष्ट्रप्रेम और मानवसेवा की आध्यात्मिक बुनियाद पर जोरदार बात रखी।
कार्यक्रम में केंद्रीय युवा कार्य और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, गायत्री परिवार के डॉ. चिन्मय पंड्या, विश्व हिंदू परिषद के महासचिव स्वामी विज्ञानानंद, रामकृष्ण मिशन के प्रमुख स्वामी सर्वलोकानंद और उत्तर प्रदेश के विधायक राजेश्वर सिंह मौजूद थे। इनके अलावा अलग-अलग क्षेत्रों के कई मान्यवर, संत-महात्मा और बड़ी संख्या में भाई-बहन भी आए थे।
माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी वर्ष और अखंड ज्योति के अवतरण के 100 साल पूरे होने पर यह आयोजन रखा गया था। मुनगंटीवार ने कहा कि संतों के विचारों से भरी और छत्रपति शिवाजी महाराज के पराक्रम से पावन हुई महाराष्ट्र की धरती से दिल्ली की इस पवित्र भूमि पर आकर गायत्री परिवार के बीच शामिल होना उनके लिए बड़े सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि हजारों बिजली पैदा करने वाले बिजलीघरों से भी ज्यादा सकारात्मक ऊर्जा उन्हें इस परिवार के साथ रहकर महसूस हुई। न्योता देने के लिए उन्होंने डॉ. चिन्मय पंड्या का खास शुक्रिया अदा किया।
माता भगवती देवी शर्मा और वेदमूर्ति पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के काम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गंगा ऋषिकेश और हरिद्वार की धरती से बहती है, यह सब जानते हैं। लेकिन इन दोनों महान हस्तियों ने समाज को जो वैचारिक और आध्यात्मिक गंगा दी, वह हर इंसान के दिल में बह रही है। उनका काम सिर्फ व्यक्तित्व गढ़ने तक सीमित नहीं है, वह समाज की सोच को नई दिशा देता है।
मुनगंटीवार ने कहा कि गायत्री परिवार ने देवपूजा और मंदिर की उपासना से आगे बढ़कर इंसानियत की पूजा करना सिखाया है। उनके मुताबिक सिर्फ मंदिर जाकर पूजा कर लेना धर्म नहीं है। जरूरतमंद की मदद के लिए दौड़ना, मानवता की सेवा करना और हर किसी की जिंदगी में अच्छा बदलाव लाना ही असली और सबसे ऊंची पूजा है। उन्होंने यह भी कहा कि गायत्री मंत्र सिर्फ कुछ शब्दों का समूह नहीं है। वह इंसान के भीतर ऊर्जा जगाता है, जीवन को बेहतर दिशा देता है और आत्मिक उन्नति की राह दिखाता है। भारतीय संस्कृति की इस आध्यात्मिक ताकत से पूरी दुनिया को वाकिफ कराने का काम गायत्री परिवार कर रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया की कई संस्कृतियों और सभ्यताओं के बीच भारतीय संस्कृति ने अपने ऊंचे मूल्यों के दम पर अलग और कभी न मिटने वाली जगह बनाई है। यह सिर्फ भारत की पहचान नहीं, बल्कि पूरे विश्व को कल्याण की राह दिखाने वाली विचारधारा है।
देश के गौरव पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया का सबसे सुंदर देश कौन सा है, यह पूछा जाए तो जवाब भारत ही है। हजारों जन्मों के पुण्य से इस पवित्र धरती पर जन्म लेने का सौभाग्य मिलता है। उन्होंने कहा कि इससे सुंदर और समृद्ध देश दूसरा नहीं हो सकता। फिर जन्म लेने का मौका मिले तो वह भारत की ही भूमि पर हो, यह भावना हर किसी के मन में होनी चाहिए। साथ ही भारत को सिर्फ भौतिक रूप से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से भी ज्यादा समृद्ध बनाने में हर किसी को अपना योगदान देना चाहिए।
डॉ. चिन्मय पंड्या की तारीफ करते हुए मुनगंटीवार ने कहा कि मेडिकल की पढ़ाई के बाद उनके सामने अच्छा अस्पताल खड़ा करके चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा योगदान देने का मौका था। लेकिन उन्होंने खुद को समाज की मानसिक और आध्यात्मिक सेहत के लिए समर्पित कर दिया। शरीर की सेहत जितनी ही मन की सेहत भी जरूरी है, इस समझ से वे जो काम कर रहे हैं, वह समाज के लिए दिशा दिखाने वाला है। उनके इस सेवाभाव और आध्यात्मिक काम को मुनगंटीवार ने नमन किया।
अपने भाषण के आखिर में मुनगंटीवार ने अपील की कि जन्मशताब्दी वर्ष में सब मिलकर भारतीय संस्कृति को सहेजने, बढ़ाने और दुनिया भर में फैलाने का संकल्प लें। उन्होंने भारतीय होने के गर्व और देश की महानता की भावना जताई। उन्होंने कहा कि जब तक सूरज और चांद हैं, तब तक भारत की महानता और भारतीय संस्कृति का तेज बना रहेगा। लेकिन इसके लिए हर भारतीय को अपने काम से इस महान परंपरा को बचाए रखने की जिम्मेदारी उठानी होगी।
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