मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:27 IST

विधानसभा चुनावों के खर्च में भाजप सबसे आगे, अकेले बंगाल में 287 करोड़ खर्च

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम और केरल की विधानसभा चुनावों में पार्टियों के खर्च का ब्यौरा सामने आया, जिसमें भाजप का बंगाल खर्च सबसे ऊपर निकला।

विधानसभा चुनावों के खर्च में भाजप सबसे आगे, अकेले बंगाल में 287 करोड़ खर्च
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

कुछ महीने पहले पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम और केरल में विधानसभा चुनाव हुए थे, जिनमें भाजप समेत सभी पार्टियों ने जोर-शोर से तैयारी की थी। अब इन चुनावों में अलग-अलग पार्टियों ने कितना पैसा खर्च किया, इसका ब्यौरा सामने आया है। इसमें सामने आया है कि भाजप ने अकेले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 286.99 करोड़ रुपये खर्च किए। यह रकम बाकी चारों राज्यों के चुनावी खर्च से भी ज्यादा बैठती है।

भाजप ने बंगाल चुनाव में जितना पैसा लगाया, वह साल की शुरुआत में चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में हुए चुनावों में कांग्रेस के कुल 248.55 करोड़ रुपये के खर्च से भी ज्यादा है। असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुदुचेरी, इन पांच राज्यों में भाजप ने कुल मिलाकर 529.38 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसमें आधे से ज्यादा हिस्सा अकेले बंगाल का रहा। पार्टी ने बंगाल में आम प्रचार पर 217.16 करोड़ रुपये और उम्मीदवारों पर 69.83 करोड़ रुपये खर्च किए। भाजप ने तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बाहर करके पश्चिम बंगाल में पहली बार अपनी सरकार बनाई।

घोषित 293 सीटों में से भाजप ने 207 सीटें जीतीं, जबकि तृणमूल को 80 सीटें मिलीं। राज्य में कांग्रेस ने सभी 293 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा और दो सीटें जीतीं। पार्टी ने अपने केंद्रीय मुख्यालय और राज्य इकाई के जरिए बंगाल में कुल 42.08 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसमें आम प्रचार पर 12.96 करोड़ रुपये और उम्मीदवारों व जुड़े खर्चों पर 29.12 करोड़ रुपये शामिल रहे। 2011 में सत्ता गंवाने से पहले कई दशक तक बंगाल पर राज करने वाली सीपीआई (एम) ने 197 सीटों पर चुनाव लड़ा और सिर्फ एक सीट जीती।

केरल की तस्वीर इससे अलग रही। यहां कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन ने सीपीआई (एम) की अगुवाई वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट को सत्ता से बाहर कर दिया। कांग्रेस ने 63 सीटें जीतीं, सीपीआई (एम) को 26 सीटें मिलीं और भाजप ने तीन सीटें जीतीं। कांग्रेस ने अपने मुख्यालय और राज्य शाखा के जरिए केरल में 105.34 करोड़ रुपये खर्च किए, जो भाजप के 82.67 करोड़ रुपये से ज्यादा रहा।

कांग्रेस के केरल खर्च में आम प्रचार पर 71.30 करोड़ रुपये और उम्मीदवारों व जुड़े खर्चों पर 34.05 करोड़ रुपये शामिल थे। भाजप ने केरल में आम प्रचार पर 54.93 करोड़ रुपये और उम्मीदवारों पर 27.74 करोड़ रुपये खर्च किए। केरल की प्रमुख पार्टी सीपीआई (एम) की राज्य शाखा ने बताया कि उसने कुल 28.60 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसमें आम प्रचार पर 26.30 करोड़ रुपये और उम्मीदवारों पर 2.31 करोड़ रुपये शामिल थे।

पांचों राज्यों को मिलाकर देखें तो कांग्रेस ने प्रचार पर 143 करोड़ रुपये और उम्मीदवारों पर 105.55 करोड़ रुपये खर्च किए, यानी कुल खर्च 248.55 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। सीपीआई (एम) का कुल खर्च 39.04 करोड़ रुपये रहा। बंगाल और केरल के अलावा भाजप ने असम में 96.27 करोड़ रुपये, तमिलनाडु में 51.56 करोड़ रुपये और पुदुचेरी में 11.90 करोड़ रुपये खर्च किए।

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