धाराशिव में खरीफ के 919 पीक कटाई प्रयोग पूरे, पीक बीमा मुआवजे का आधार
धाराशिव जिले में खरीफ फसलों के 1 हजार 409 पीक कटाई प्रयोग तय थे, 15 अक्टूबर तक 919 पूरे हुए। इन्हीं आंकड़ों से पीक बीमा का मुआवजा तय होगा।
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धाराशिव जिले में खरीफ सीजन की फसलों का सही अंदाजा लगाने और पीक बीमा योजना के तहत उत्पादन पर आधारित मुआवजा तय करने के लिए पीक कटाई प्रयोग चल रहे हैं। इस साल खरीफ में जिले की आठ अलग-अलग फसलों के लिए कुल 1 हजार 409 प्रयोग तय किए गए थे।
इनमें से 15 अक्टूबर तक 919 प्रयोग पूरे हो चुके हैं, यानी 65.2 प्रतिशत काम निपट गया है। बाकी 490 प्रयोग अभी पूरे होने हैं।
जिले की खेती ज्यादातर बारिश के भरोसे चलती है। बारिश का अनियमित होना, सूखा और दूसरी कुदरती आफतें खरीफ फसलों की पैदावार पर असर डालती हैं। इसीलिए खेत में असल पैदावार को वैज्ञानिक तरीके से दर्ज करने के लिए ये प्रयोग अहम माने जाते हैं। इनसे मिले आंकड़े खेती की पैदावार का अंदाज बनाने में काम आते हैं और पीक बीमा योजना में मुआवजा तय करने में भी।
बाजरा, मक्का, अरहर, सोयाबीन, उड़द, मूंग, कपास और खरीफ प्याज, इन फसलों के लिए प्रयोग तय किए गए थे। मिले आंकड़ों के मुताबिक बाजरे के दो तय प्रयोगों में से दोनों पूरे हो गए हैं। सोयाबीन के 503 तय प्रयोगों में से 387, उड़द के 312 में से 288 और मूंग के 248 में से 237 प्रयोग पूरे हुए हैं।
मक्का के 28 प्रयोग तय हैं, जिनमें से पांच पूरे हुए हैं। अरहर के लिए 224 प्रयोग तय दर्ज हैं, लेकिन इनमें से कितने पूरे हुए, इस बारे में मिले ब्योरे में गड़बड़ी है। कपास और खरीफ प्याज के लिए क्रमशः दो और 90 प्रयोग तय हैं, और मिली रिपोर्ट में इन दोनों फसलों के सामने पूरे हुए प्रयोगों की संख्या शून्य दिखाई गई है।
पीक कटाई प्रयोग में चुने हुए खेत के एक तय हिस्से की फसल काटी जाती है और असल पैदावार दर्ज की जाती है। इस जानकारी से फसल की उत्पादकता तय करने के लिए जरूरी आंकड़े मिलते हैं। अलग-अलग प्रयोगों की जानकारी का विश्लेषण करके फसल की पैदावार का अंदाज बनाया जाता है।
प्रधानमंत्री पीक बीमा योजना में उत्पादन पर आधारित मुआवजा तय करते समय अधिसूचित फसल की असल पैदावार की तुलना तय की गई दहलीज (थ्रेशोल्ड) पैदावार से की जाती है। इस प्रक्रिया में पीक कटाई प्रयोगों के आंकड़े ही इस्तेमाल होते हैं। इसलिए जरूरी है कि प्रयोग तय तरीके से, सही और पारदर्शी ढंग से पूरे हों।
यह जानकारी जिले में खेती की पैदावार के अंदाज, फसल के हिसाब से उत्पादकता के अध्ययन और आगे की खेती की योजना के लिए भी काम की है। इसलिए बाकी प्रयोगों को तय समय में पूरा करने के साथ असल पैदावार को सही दर्ज करने पर भी जोर है।
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