शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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दिवाली से पहले सोना 50,000 रुपये से ज्यादा सस्ता, जानिए धनतेरस पर खरीदें या रुकें

दिवाली से पहले सोना 50,000 रुपये से ज्यादा सस्ता, जानिए धनतेरस पर खरीदें या रुकें तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कारोबार PT24 टीम

जनवरी के ऊंचे भाव से 24 कैरेट सोना करीब 20% नीचे आ गया है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, तेल और धनतेरस की खरीद का हिसाब।

धनतेरस और दिवाली का सीजन सिर पर है और सोने के भाव में लगातार आ रही गिरावट की चर्चा हर तरफ है। जनवरी में 24 कैरेट सोना प्रति 10 ग्राम 1.75 लाख से 1.91 लाख रुपये के बीच पहुंच गया था। अक्टूबर के आखिर तक यह गिरकर करीब 1.38 लाख से 1.43 लाख रुपये पर आ गया है।

यानी ऊंचे भाव से देखें तो करीब 20% या 50,000 रुपये से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई है। पिछली दिवाली के मुकाबले इस बार सोना कम भाव पर मिल रहा है। जो ग्राहक महंगाई की वजह से पीछे हट जाते थे, उनके लिए इसे बड़ा मौका माना जा रहा है। फिर भी निवेशकों के मन में डर है कि कहीं भाव और नीचे न चले जाएं।

अब सवाल यह है कि सोना नीचे क्यों आया। इसके पीछे कई वैश्विक कारण हैं और उनमें अमेरिकी सरकार के बॉन्ड की भूमिका सबसे अहम बताई गई है। पहले समझ लें कि बॉन्ड क्या होता है। जब कोई सरकार या संस्था को पैसों की जरूरत होती है, तो वह लोगों से कर्ज लेती है और बदले में एक रसीद देती है, जिसे बॉन्ड कहते हैं। सरकार वादा करती है कि तय वक्त के बाद मूलधन लौटाएगी और बीच में तय दर से ब्याज देगी।

बॉन्ड पर मिलने वाले सालाना रिटर्न या ब्याज को यील्ड कहते हैं। मान लीजिए अमेरिका के 10 साल के बॉन्ड की यील्ड 5% है। तब सरकार से हर साल 5% ब्याज मिलेगा और मियाद पूरी होने पर मूलधन भी वापस मिलेगा। अमेरिकी सरकार की गारंटी होने से इन बॉन्ड को दुनिया के बाजार में बेहद सुरक्षित माना जाता है। बड़े बैंक, वित्तीय संस्थाएं और कई देशों के केंद्रीय बैंक इनमें भारी रकम लगाते हैं।

इस वक्त अमेरिका में महंगाई बढ़ी है और ईरान के साथ तनाव चल रहा है। इससे कच्चे तेल के भाव 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गए हैं। इसी वजह से अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें बढ़ाकर ऊंचे स्तर पर बनाए रखी हैं। नतीजा यह कि अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड 5% से ऊपर चली गई है।

सोना सुरक्षित निवेश जरूर माना जाता है, लेकिन उसे रखने से कोई नियमित ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता। जब अमेरिकी बॉन्ड पर सुरक्षित तरीके से 5% रिटर्न मिल रहा हो, तो बड़े निवेशक और कंपनियां सोने की जगह अमेरिकी बॉन्ड या डॉलर खरीदने पर जोर देती हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग घटी है और भाव नीचे आ रहे हैं। इसी आकर्षक रिटर्न की वजह से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड में लगा रहे हैं, जिसका असर भारत के शेयर बाजार पर भी पड़ा है।

एक्सपर्ट्स को फिलहाल सोने में अचानक बड़ी उछाल की उम्मीद नहीं दिखती। जब तक फेडरल रिजर्व की नीति और तेल के भाव काबू में नहीं आते, बॉन्ड यील्ड ऊंची ही रह सकती है। यानी सोने के भाव कुछ महीने स्थिर या थोड़े नरम रह सकते हैं। धनतेरस या शादियों के सीजन में खरीदारी करने वालों के लिए कुछ बातें ध्यान में रखने लायक हैं।

पहली बात, किस्तों में खरीदें। दुनिया के बाजार में अनिश्चितता को देखते हुए एक ही बार में सारा पैसा लगाना ठीक नहीं होगा। SIP की तरह या थोड़ा-थोड़ा करके सोना खरीदने से खरीद का औसत भाव संतुलित रहता है।

दूसरी बात, लंबे वक्त का नजरिया रखें। अगर निवेश के मकसद से सोना ले रहे हैं, तो कम से कम 2 साल या उससे ज्यादा का सोचें। लंबे दौर में सोने ने हमेशा अच्छा रिटर्न दिया है और वह महंगाई के खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करता है।

तीसरी बात, शगुन और जरूरत की खरीद। अगर धनतेरस के मुहूर्त पर परंपरा निभाने के लिए या शादी के लिए सोना लेना है, तो 50,000 रुपये तक की मौजूदा गिरावट को अच्छा मौका माना जा सकता है।

सोने की यह गिरावट फिलहाल के आर्थिक समीकरणों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के दबाव में है। भू-राजनीतिक तनाव और तेल के भाव जब तक स्थिर नहीं होते, सोने में बड़ा उतार-चढ़ाव रह सकता है। लंबे निवेश के नजरिए से और धनतेरस के मुहूर्त पर खरीद ग्राहकों के लिए फायदेमंद हो सकती है, मगर निवेश सोच-समझकर और किस्तों में ही करना चाहिए।

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