5 नवंबर को वसुबारस से शुरू होगी दिवाली, 11 नवंबर को भाऊबीज पर होगा समापन
इस साल दिवाली वसुबारस से भाऊबीज तक चलेगी। धनत्रयोदशी, लक्ष्मीपूजन और बलिप्रतिपदा की तारीखें और मुहूर्त यहां देखिए।
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हिंदू धर्म में दिवाली को सबसे बड़ा, खुशी और मंगल का त्योहार माना जाता है। दीयों की रोशनी, दरवाजे के सामने रंग-बिरंगी रंगोली, पटाखों की आतिशबाजी और पकवानों की खुशबू से पूरा माहौल उत्साह से भर जाता है। अंधेरे पर रोशनी की और झूठ पर सच की जीत का यह त्योहार अब बस कुछ ही दिन दूर है।
पूरे देश में यह त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। अश्विन कृष्ण त्रयोदशी तिथि से लेकर कार्तिक शुक्ल द्वितीया तक हर तिथि का अपना महत्व है। मान्यता है कि 14 साल का वनवास खत्म करके प्रभु राम सीता के साथ इन्हीं दिनों अयोध्या लौटे थे। तब अयोध्या की प्रजा ने दीपोत्सव मनाया था और तभी से यह उत्सव हर साल मनाया जाता है।
दिवाली का पहला दिन वसुबारस है, जो गुरुवार, 5 नवंबर को पड़ रही है। यह धनत्रयोदशी से एक दिन पहले, यानी अश्विन कृष्ण द्वादशी तिथि को मनाई जाती है। इसे गोवत्सद्वादशी भी कहते हैं। इस दिन सुहागन महिलाएं बछड़े वाली गाय की पूजा करती हैं।
शुक्रवार, 6 नवंबर को धनत्रयोदशी है। यह कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है और इस दिन को बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन धन की पूजा होती है। कहा जाता है कि समुद्रमंथन के वक्त इसी दिन आरोग्य के देवता और देवताओं के वैद्य भगवान धन्वंतरी हाथ में अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए उनकी पूजा की जाती है। घर में सुख, समृद्धि और संपत्ति बनी रहे, इसके लिए संपत्ति की देवी माता लक्ष्मी और संपत्ति का भंडार संभालने वाले भगवान कुबेर की भी पूजा की जाती है।
रविवार, 8 नवंबर को नरक चतुर्दशी और लक्ष्मीपूजन है। नरक चतुर्दशी पर अभ्यंगस्नान किया जाता है। इस दिन सुबह 11.27 बजे अमावस्या शुरू होगी। भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध किया था। उसी की याद में और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के तौर पर यह त्योहार मनाया जाता है।
लक्ष्मीपूजन का मुहूर्त शाम 6 बजे से रात 8.33 बजे तक है। इस दिन घर में संपत्ति, समृद्धि और ऐश्वर्य की देवी माता लक्ष्मी की पूरे मन से पूजा की जाती है।
अश्विन अमावस्या सोमवार, 9 नवंबर को है। अमावस्या रविवार सुबह से शुरू हो रही है और सोमवार, 9 नवंबर को दोपहर 12.31 बजे खत्म होगी।
मंगलवार, 10 नवंबर को बलिप्रतिपदा है। इसी दिन कार्तिक महीना शुरू होता है और गोवर्धन पूजा भी की जाती है। पौराणिक कथा के मुताबिक इस दिन भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि को पाताल भेजा था और उसे धरती पर आने का वरदान दिया था।
बुधवार, 11 नवंबर को भाऊबीज है। इसे यमद्वितीया भी कहते हैं। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को पड़ने की वजह से इसका नाम भाऊबीज पड़ा। कहते हैं कि इस दिन यम अपनी बहन के घर गया था। बहन ने उसकी आरती उतारी और खुशी जताई। तभी से बहन के भाई की आरती उतारने की परंपरा शुरू हुई।
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