डेटिंग में Gen Z का नया चलन 'बेंचिंग', सामने वाले को बैकअप बनाकर रखना
Gen Z में डेटिंग का नया चलन 'बेंचिंग ट्रेड' चर्चा में है, जिसमें किसी को पहली पसंद की जगह बैकअप ऑप्शन बनाकर रखा जाता है।
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Gen Z, यानी आज की नई पीढ़ी, प्रेम के मामलों में भी दो कदम आगे निकल गई है। उनके बीच इन दिनों एक नया चलन चल पड़ा है, जिसे 'बेंचिंग ट्रेड' का नाम दिया गया है। 90 के दशक में ऐलियन की कहानियां जिस तरह बढ़ा-चढ़ाकर सुनाई जाती थीं, Gen Z का नाम सुनकर वैसा ही एहसास होता है। इंसान का बनाया एक अलग ही रसायन, जिसकी अपनी दुनिया है और जो बाकी सब में सबसे आगे रहता है।
तो बेंचिंग आखिर है क्या? आज के दौर में डेटिंग करते वक्त किसी का पसंद आना और उसे अपनी जिंदगी में जगह देना, ये दोनों अलग बातें बन गई हैं। कई बार सामने वाला बात करता है, फ्लर्ट करता है, हालचाल पूछता है, लेकिन रिश्ते को लेकर कोई साफ इशारा नहीं देता। आपको लगता है कि बात आगे बढ़ सकती है, पर वह न आपको पूरी तरह अपना मानता है और न दूर जाने देता है। डेटिंग की दुनिया में इसी बर्ताव को बेंचिंग कहा जाता है।
बेंचिंग का मतलब है किसी को रिश्ते में पहली पसंद चुनने की जगह बैकअप ऑप्शन की तरह रख लेना। जैसे क्रिकेट में किसी खिलाड़ी को मैदान पर उतारने की बजाय बेंच पर बैठाकर अपनी बारी का इंतजार कराया जाता है। उसी तरह Gen Z डेटिंग में किसी को भी इंतजार में लटकाए रखते हैं।
इंतजार एक बहुत खूबसूरत उर्दू लफ्ज है, लेकिन इसी इंतजार में कई लोगों की जान अटकी रहती है। बेंचिंग में सामने वाला बीच-बीच में बात करता है या अचानक मैसेज करके अपनी दिलचस्पी दिखाता है। पर जब मिलने, कमिटमेंट या रिश्ते को आगे बढ़ाने की बात आती है, तो वह अचानक पीछे हट जाता है।
मान लीजिए आप कई दिनों से किसी से बात कर रहे हैं। वह घंटों चैट पर आपसे बातें करता है, फिर अचानक कई दिनों के लिए गायब हो जाता है। जब आप भी उससे दूर जाने की कोशिश करते हैं, तब उसका या उसकी तरफ से फिर अचानक मैसेज आ जाता है। मैसेज में कुछ ऐसा होता है कि कैसी हो, कैसे हो, या काफी दिनों से बात ही नहीं हुई। आपको लगता है कि शायद वह आपको लेकर सीरियस हो रहा है, लेकिन कुछ वक्त बाद वह फिर गायब हो जाता है।
यह सामने वाले को उलझन में रखने की एक अलग ही कला है। Gen Z एक अलग किस्म का रसायन है, जिसकी अपनी दुनिया है और जिसे पढ़ाई के जरिए जल्दी ही दुनियादारी आ गई है। इसलिए उन्हें पता होता है कि किसी के साथ कैसे पेश आना है। जब कोई बात करते-करते गायब हो जाता है, तो उसे या उसे लगता है कि शायद उसका कहीं और चक्कर चल रहा होगा और आप सिर्फ उसके लिए दूसरा ऑप्शन हैं। हालांकि मैसेज का जवाब देर से आना या कम बात करना बेंचिंग नहीं है। असल मुद्दा लगातार होने वाले तजुर्बे, उसके बर्ताव और उसके इरादों का है।
लेकिन वे ऐसा करते क्यों हैं? कुछ लोगों को अकेले नहीं रहना होता। कुछ अपने ऑप्शन खुले रखना चाहते हैं, और कुछ को यही समझ नहीं आता कि उन्हें यह रिश्ता चाहिए भी या नहीं। सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स पर नए लोगों से मुलाकात होने की वजह से कुछ लोग एक ही वक्त में कई लोगों से चैट करते रहते हैं।
अगर कोई बार-बार आप में दिलचस्पी दिखाता है, मगर मिलने का प्लान बनाकर टाल देता है, या रिलेशनशिप जैसे मुद्दों पर बात करने से बचता है, तो उसके इस बर्ताव पर ध्यान देना जरूरी है। ऐसे में खुद को उलझाए रखने की बजाय सीधे सामने वाले से पूछिए कि वह इस रिश्ते से आखिर चाहता क्या है, और तुम ऐसा क्यों कर रहे हो।
किसी को आप पसंद आएं ही, इसके लिए बार-बार उसका ध्यान खींचने की जरूरत नहीं है। अगर सामने वाला आपको सिर्फ अपने खाली वक्त में याद करता है, तो अब आपको भी सोचना होगा कि आप उसे उतनी ही जगह अपनी जिंदगी में दें। बाकी Gen Z बहुत होशियार है।
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