शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

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02:49 IST

पाकिस्तान में गरीबी दर छह साल में 6.4 फीसदी बढ़ी, मेनाप के आधे गरीब यहीं

एक रिपोर्ट के मुताबिक 2018-19 से 2024-25 के बीच पाकिस्तान में तीन डॉलर प्रतिदिन के पैमाने पर गरीबी दर 6.4 फीसदी बढ़ी है।

पाकिस्तान में गरीबी दर छह साल में 6.4 फीसदी बढ़ी, मेनाप के आधे गरीब यहीं तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पाकिस्तान में गरीबी की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018-19 से 2024-25 तक, यानी छह साल के दौरान, तीन डॉलर प्रतिदिन के पैमाने पर गरीबी दर में 6.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक कोविड-19 महामारी, 2022 की तबाही मचाने वाली बाढ़ और व्यापक आर्थिक संकट का देश की जनता पर बड़ा असर पड़ा है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि मध्य पूर्व, उत्तर अफ्रीका और अफगानिस्तान-पाकिस्तान (मेनाप) क्षेत्र की अत्यंत गरीब आबादी में पाकिस्तान का हिस्सा लगभग आधा है। रिपोर्ट के अनुसार मेनाप दुनिया का अकेला ऐसा क्षेत्र है, जहां महामारी से पहले के स्तर की तुलना में गरीबी का अनुपात बढ़ता ही रहा है।

इस क्षेत्र में रोजाना तीन डॉलर से कम आमदनी पर गुजारा करने वालों में से करीब 48 फीसदी लोग पाकिस्तान में रहते हैं। वहीं अफगानिस्तान, सीरिया और येमेन, इन तीन देशों का मिलाकर हिस्सा करीब 47 फीसदी है। ताजा अनुमानों से सामने आया है कि जिबूती, पाकिस्तान, सीरिया और येमेन में तीन डॉलर प्रतिदिन के पैमाने के नीचे जीने वाली आबादी का अनुपात करीब 20 फीसदी या उससे ज्यादा है।

2024 के आंकड़ों के मुताबिक मेनाप क्षेत्र की 14.3 फीसदी आबादी रोजाना तीन डॉलर से कम पर जी रही थी, जबकि दुनिया भर में यह अनुपात 10.4 फीसदी था। इसी तरह रोजाना 4.20 डॉलर से कम आमदनी वालों का अनुपात मेनाप क्षेत्र में 26.9 फीसदी दर्ज हुआ, जबकि वैश्विक स्तर पर यह 18.9 फीसदी रहा।

रिपोर्ट में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में धीरे-धीरे सुधार का अनुमान जताया गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश की जीडीपी विकास दर 3.2 फीसदी रहने का अनुमान है। इसके 2025-26 में 3.7 फीसदी और 2026-27 में 3.8 फीसदी तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक आर्थिक बढ़त में सेवा क्षेत्र का अहम हिस्सा रहने का अनुमान है।

इसके अलावा वित्त वर्ष 2025-26 में पाकिस्तान का चालू खाते का घाटा जीडीपी का 0.1 फीसदी और राजकोषीय घाटा 2.6 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है।

गरीबी के साथ-साथ इस क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा का सवाल भी गंभीर हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वेस्ट बैंक और गाजा के साथ येमेन में खाद्य संकट की तीव्रता ज्यादा है। अफगानिस्तान, जिबूती, लेबनान और पाकिस्तान में भी खाद्य सुरक्षा पर दबाव बना हुआ है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2026 के आखिर तक सामान्य से ज्यादा तीव्र अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना है, जिससे अनाज की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। नतीजतन गरीब और कमजोर तबकों की मुश्किलें और बढ़ने की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक महामारी, प्राकृतिक आपदा और आर्थिक संकट के मिले-जुले असर से इस क्षेत्र में गरीबी की समस्या और गंभीर हुई है, और पाकिस्तान में गरीबी की बढ़ती दर से इस संकट का दायरा साफ दिखता है।

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