चिन्मयी मोरे ने नवरात्रि पर स्त्रीशक्ति पर रखी बात, कामयाबी के पीछे बताया मां का हाथ
'धाकट्या सुनबाई' में राधिका बनीं अभिनेत्री चिन्मयी मोरे ने नवरात्रि के मौके पर स्त्रीशक्ति पर अपने विचार रखे और अपने सफर में मां की भूमिका बताई।
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झी मराठी की मालिका 'धाकट्या सुनबाई' में राधिका की मुख्य भूमिका निभा रही अभिनेत्री चिन्मयी मोरे ने नवरात्रि के मौके पर स्त्रीशक्ति को लेकर अपनी बात रखी। इसी दौरान उन्होंने अपनी कामयाबी में मां के योगदान का जिक्र किया और बात करते हुए भावुक हो गईं।
नवरात्रि का त्योहार शक्ति, धैर्य और स्त्रीत्व का उत्सव माना जाता है। इन नौ दिनों में देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है। स्रोत के मुताबिक देवी की शक्ति सिर्फ मंदिर की मूर्ति तक सीमित नहीं है, वह अपने आसपास की हर स्त्री में भी होती है। मां की ममता से लेकर अपने सपने पूरे करने के लिए संघर्ष करने वाली स्त्री की जिद तक, स्त्रीशक्ति कई रूपों में दिखती है।
चिन्मयी मोरे ने कहा कि शक्ति सिर्फ देवी की मूर्ति में नहीं होती, वह हर स्त्री के मन, विचार और काम में भी होती है। स्त्री अपनी जिंदगी में बेटी, पत्नी, मां और बहन जैसी कई भूमिकाएं बखूबी निभाती है। उन्हें लगता है कि हालात कितने भी मुश्किल हों, खुद के साथ अपने परिवार को आगे ले जाने की ताकत ही असली स्त्रीशक्ति है।
चिन्मयी ने यह भी कहा कि आज के वक्त में हर स्त्री को सबसे पहले खुद पर भरोसा रखना चाहिए। सपनों को पंख देने वाला आत्मविश्वास, फैसलों को ताकत देने वाला आत्मसम्मान और मुसीबतों का सामना करने का हौसला ही स्त्री की असली ताकत है। उनका संदेश था कि दूसरों की छाया में खड़े रहने के बजाय हर स्त्री अपने काम से अपनी अलग पहचान बनाए।
लड़कियों और महिलाओं से चिन्मयी ने अपील की कि मन में कोई सपना हो तो उसे सिर्फ मन में न रखें। उसे लक्ष्य बनाएं और जिद के साथ आगे बढ़ें। उनके मुताबिक खुद पर विश्वास रखना ही अपने भीतर की देवीशक्ति की पहली सीढ़ी है।
अपने सफर के बारे में चिन्मयी ने बताया कि सपना देखने से लेकर आज पर्दे पर मुख्य भूमिका निभाने तक का उनका रास्ता मेहनत, भरोसे और कई छोटी-छोटी कोशिशों से बना है। उन्होंने कहा कि नाकामी मिले तो रुकना नहीं चाहिए और कामयाबी मिले तो पांव जमीन पर रहने चाहिए।
इस सफर में उनकी मां का बड़ा हाथ है। बचपन से मां ने ही उन्हें पाला और हर सुख-दुख में मजबूती से साथ दिया। मां ने चिन्मयी के सपनों को अपने सपनों की तरह संभाला। इसलिए आज वे जहां हैं, वहां तक पहुंचने के पीछे मां की जिद, त्याग और संस्कार हैं, यह भावना उन्होंने जाहिर की।
चिन्मयी ने बताया कि उन्हें गढ़ते वक्त मां ने कई बार अपनी इच्छाएं किनारे रखीं, लेकिन उनके सपनों के लिए कभी कोई कमी नहीं आने दी। इसलिए अपनी कामयाबी को देखते हुए उन्हें मां के संघर्ष का एहसास और गहरा होता है। उन्होंने कहा, "मेरी कामयाबी की रोशनी के पीछे मां की संभाली हुई एक छोटी सी ज्योत है!" यानी उनकी कामयाबी की रोशनी के पीछे मां की संभाली हुई एक छोटी सी ज्योत है। इन शब्दों में मां के लिए प्यार, शुक्रगुजारी और उनके संघर्ष की समझ साफ दिखती है।
चिन्मयी के विचारों से स्त्रीशक्ति का असली मतलब सामने आता है, चाहे वह अपने सपनों के लिए लड़ने वाली स्त्री हो या बच्चों के भविष्य के लिए अपनी इच्छाएं छोड़ने वाली मां। नवरात्रि के मौके पर देवी की शक्ति को नमन करने के साथ-साथ अपनी जिंदगी में प्यार, धैर्य और जिद से रोशनी फैलाने वाली हर स्त्री को सलाम करने का संदेश चिन्मयी ने दिया है।