चंद्रपुर में शहीद बाबुराव शेडमाके को श्रद्धांजलि, विधायक जोरगेवार बोले- उनका बलिदान प्रेरणा है
शहीद दिवस पर चंद्रपुर के जिला कारागृह परिसर में श्रद्धांजलि और प्रबोधन कार्यक्रम हुआ।
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चंद्रपुर में क्रांतिवीर शहीद बाबुराव शेडमाके के बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि और प्रबोधन कार्यक्रम रखा गया। विधायक किशोर जोरगेवार ने कहा कि देश की आज़ादी के लिए शेडमाके की लड़ाई, उनकी बेमिसाल बहादुरी, उनका त्याग और समाज के प्रति उनकी निष्ठा आज भी हर किसी के लिए प्रेरणा है। जोरगेवार के मुताबिक उनके क्रांतिकारी विचारों की विरासत नई पीढ़ी तक पहुंचाना और उनके संघर्ष से सीख लेना हमारी ज़िम्मेदारी है।
यह कार्यक्रम 21 अक्टूबर 2026 को चंद्रपुर के जिला कारागृह परिसर में बने शहीद स्मारक पर हुआ। इसका आयोजन क्रांतिवीर शहीद बाबुराव पुलेश्वर शेडमाके स्मारक समिति और आदिवासी कृती समिति, चंद्रपुर ने मिलकर किया था। विधायक किशोर जोरगेवार ने क्रांतिवीर शहीद बाबुराव शेडमाके की तस्वीर पर फूलमाला चढ़ाकर उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री प्रो. डॉ. अशोक उईके, पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहिर, आर्णी के विधायक राजू तोडसाम, चंद्रपुर महानगरपालिका की महापौर संगीताताई खांडेकर, नगर निगम के दल नेता शेखर शेट्टी और भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष रघुवीर अहिर मौजूद थे। शहीद बाबुराव शेडमाके स्मारक समिति के विलास मसराम, गणेश गेडाम और भैय्याजी उईके भी आए थे। पार्षद जितेश कुलमेथे, कमलेश आत्राम, विठ्ठल कुमरे, भोला मडावी, राजेंद्र दुर्वे, शंकर उईके, शाम गेडाम, दिवाकर मेश्राम, नथ्थू गेडाम, वीरेंद्र कुमरे और अनिल सिडाम समेत कई और लोग भी वहां थे।
सभा में आगे बोलते हुए विधायक जोरगेवार ने कहा कि क्रांतिवीर बाबुराव शेडमाके ने अन्याय के ख़िलाफ़ लड़ते हुए देश की आज़ादी के लिए अपनी ज़िंदगी समर्पित कर दी। उनके संघर्ष में स्वाभिमान, हिम्मत और मातृभूमि के प्रति निष्ठा दिखती है, ऐसा जोरगेवार ने कहा। उन्होंने यह भी कहा कि शेडमाके का बलिदान सिर्फ़ इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि वह ऐसा विचार है जो अन्याय के ख़िलाफ़ लड़ने और अपने हक़ के लिए मज़बूती से खड़े होने की प्रेरणा देता है।
जोरगेवार के अनुसार उनके काम को याद करते वक़्त उनके विचारों को अपनाना और अगली पीढ़ी को उनके पराक्रम से वाकिफ़ कराना ज़रूरी है।
विधायक किशोर जोरगेवार ने यह भी कहा कि आदिवासी समाज का इतिहास संघर्ष, बहादुरी और त्याग की शानदार परंपरा से भरा हुआ है। उनके मुताबिक इस परंपरा के क्रांतिकारियों का योगदान समाज के सामने लाना, उनकी यादों को सहेजकर रखना और उनके विचारों को व्यापक रूप देना अहम है।
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