चंद्रपुर में बच्चों के दिल की जांच, 316 में से 48 के दिल में छेद मिला
सेवा संकल्प अभियान के तहत जिला सामान्य अस्पताल में लगे शिविर में 48 बच्चों की मुंबई में सर्जरी होगी।
चंद्रपुर के जिला सामान्य अस्पताल में बच्चों के दिल की जांच के लिए एक शिविर लगा। इसमें कुल 316 बच्चों की हार्ट जांच हुई। जांच के दौरान 48 बच्चों के दिल में छेद पाया गया। इन सभी बच्चों की जरूरी सर्जरी मुंबई के एक प्राइवेट अस्पताल में की जाएगी।
यह शिविर सेवा संकल्प अभियान के तहत विधायक किशोर जोरगेवार की पहल पर लगा। भारतीय जनता पार्टी चंद्रपुर महानगर की ओर से इसका आयोजन किया गया। मुंबई के किम्स अस्पताल और जिला सामान्य अस्पताल ने इसमें सहयोग दिया। शिविर में जिला शल्य चिकित्सक डॉ. बंडू रामटेके, मुंबई के ज्युपिटर अस्पताल के डॉ. परमानंद आनंदकर, किम्स अस्पताल के डॉ. एल. श्रीनिवास और डॉ. सोनिया कारापूरकर मौजूद थे। भाजपा के महामंत्री रवि गुरुनुले, सविता दंढारे, नामदेव डाहुले, महिला मोर्चा प्रभारी वंदना हातगावकर, विधानसभा अध्यक्ष दशरथसिंह ठाकूर, मंडल अध्यक्ष स्वप्निल डुकरे, विमल कातकर, सुमित बेले और राकेश नाकाडे समेत कई लोग भी आए।
जोरगेवार ने कहा कि पैसों की तंगी की वजह से किसी भी बच्चे को दिल के इलाज से दूर नहीं रहना चाहिए। उनके मुताबिक बच्चों की सेहत सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और जरूरतमंद बच्चों के इलाज के लिए हर जरूरी मदद देने की कोशिश जारी रहेगी।
उन्होंने बताया कि कई परिवारों में जब पता चलता है कि छोटे बच्चे को दिल की बीमारी है, तो इलाज के खर्च का बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है। खर्च न उठा पाने की वजह से कई मां-बाप मानसिक परेशानी झेलते हैं। इसी वजह से सेवा संकल्प अभियान के जरिए यह पहल की गई है ताकि सिर्फ पैसे की दिक्कत से किसी बच्चे का इलाज न रुके। शिविर में जांचे गए बच्चों में से 48 के दिल में छेद मिला है और उनके आगे के इलाज की जिम्मेदारी ली जाएगी।
जोरगेवार की पहल पर पहले भी ऐसे शिविर लग चुके हैं। उन शिविरों के जरिए अब तक करीब 268 बच्चों की दिल की सर्जरी मुंबई में कामयाबी से हो चुकी है। उनका कहना है कि इन ऑपरेशनों के बाद कई बच्चों को नए सिरे से सेहतमंद जिंदगी जीने का मौका मिला। इस बार भी जिन बच्चों को सर्जरी की जरूरत है, उनका ऑपरेशन मुंबई के प्राइवेट अस्पताल में होगा।
शिविर में जांच के साथ-साथ सर्जरी की जरूरत वाले बच्चों को आगे के इलाज के लिए चुना भी गया। मुंबई के विशेषज्ञ डॉक्टरों की मदद से इन बच्चों का इलाज होगा। इस तरह चंद्रपुर जिले के जरूरतमंद बच्चों को मुंबई जैसी जगह मिलने वाले विशेषज्ञ इलाज का फायदा मिलेगा।
जोरगेवार ने यह भी कहा कि सेवा सिर्फ एक दिन के कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जरूरतमंद की जिंदगी में अच्छा बदलाव लानी चाहिए। उनके मुताबिक एक बच्चे का इलाज होने का मतलब पूरे परिवार को नई उम्मीद मिलना है। उन्होंने कहा कि आगे भी सेहत के क्षेत्र में जरूरतमंदों को मदद दिलाने के लिए अलग-अलग कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
शिविर में एक भावुक पल भी आया। करीब डेढ़ साल पहले सिर्फ एक दिन की उम्र में एक बच्ची स्वास्थ्य शिविर में जांच के लिए आई थी और उसके दिल में छेद का पता चला था। जोरगेवार ने पहल करके मुंबई के ज्युपिटर अस्पताल में उसकी दो बार मुफ्त सर्जरी करवाई। अब डेढ़ साल की हो चुकी वह बच्ची नियमित जांच के लिए फिर शिविर में आई, तो जोरगेवार से उसकी मुलाकात हुई। उसे पूरी तरह सेहतमंद देखकर वे भावुक हो गए।
जोरगेवार ने कहा, "किसी बच्चे को बीमारी से बाहर निकालकर उसे तंदुरुस्त और खुश देखने से बड़ा सुकून कुछ नहीं। बच्ची के चेहरे की आज की हंसी ही हमारी सेहत सेवा की कोशिशों की असली पहचान है।" उन्होंने कहा कि उसके चेहरे की मासूम मुस्कान देखकर लगा कि इलाज के लिए की गई कोशिशें सफल रहीं।