चंद्रपुर के लालपेठ-बायपास पर सड़क के बीच मिला दुर्लभ कछुआ, वन विभाग ने बचाया
लालपेठ-बायपास महामार्ग पर मिला इंडियन फ्लैपशेल कछुआ, श्याम चक्रदेव और अश्विन गोडबोले की पहल से वन विभाग के हवाले
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
चंद्रपुर में लोगों की सूझबूझ से एक दुर्लभ 'इंडियन फ्लैपशेल' (Indian Flap-shelled) प्रजाति के कछुए की जान बच गई। यह कछुआ शहर के भीड़भाड़ वाले लालपेठ-बायपास महामार्ग पर सड़क के ठीक बीच में मिला था। पर्यावरण से लगाव रखने वाले और जागरूक लोगों की कोशिश और वन विभाग की मदद से इस बेजुबान को सुरक्षित नई जिंदगी मिली है।
लालपेठ-बायपास महामार्ग से गुजरते हुए श्याम चक्रदेव की नजर सड़क के बीच बैठे एक जिंदा कछुए पर पड़ी। महामार्ग पर गाड़ियों की आवाजाही लगातार रहती है, इसलिए कछुए की जान को बड़ा खतरा था। हालात की गंभीरता समझते हुए चक्रदेव ने एक पल की भी देर नहीं की और कछुए को सुरक्षित अपने कब्जे में ले लिया।
इसके बाद उन्होंने तुरंत वन्यजीव जानकार अश्विन गोडबोले को इसकी जानकारी दी। गोडबोले ने फौरन आगे बढ़कर वन विभाग से संपर्क किया और पूरी घटना बताई।
वन विभाग की तरफ से मूल मार्ग पर बने ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर (TTC) के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुंदन पोडचलवार की देखरेख में कर्मचारी कृष्णा वाटेकर और महेश वाडगूरे ने कछुए को अपनी निगरानी में ले लिया।
वन विभाग की टीम ने कछुए की शुरुआती सेहत जांच की। जांच में सामने आया कि करीब 10 साल उम्र का यह कछुआ पूरी तरह तंदुरुस्त और स्वस्थ है। वन विभाग जल्द ही इसे इसके सुरक्षित और प्राकृतिक ठिकाने में छोड़ देगा।
वन विभाग की दी हुई जानकारी के मुताबिक 'इंडियन फ्लैपशेल' मीठे पानी में रहने वाला नरम पीठ का कछुआ है। इसकी पीठ चपटी, गोल और चमड़े जैसी होती है। खास बात यह है कि इसकी पीठ के नीचे की तरफ त्वचा के नरम हिस्से, यानी 'फ्लैप्स', होते हैं। खतरा महसूस होने पर यह कछुआ अपने पैर और गर्दन इन्हीं के अंदर पूरी तरह छिपा लेता है। यह कछुआ ज्यादातर पूरे भारत में नदियों, तालाबों, दलदली इलाकों और खेतों में भरे पानी वाली जगहों पर मिलता है।
लोगों की इस सतर्कता से एक बेजुबान जानवर की जान बची, इसलिए हर तरफ उनकी तारीफ हो रही है।