गिर के बाद अब बरडा जंगल में भी एशियाई शेरों का नया ठिकाना, 17 शेर रह रहे
बरडा वन्यजीव अभयारण्य में इस समय 17 शेर हैं और एक रिसर्च के मुताबिक यह जंगल एशियाई शेरों के लंबे संरक्षण का अहम केंद्र बन सकता है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
गुजरात सरकार की वन्यजीव संरक्षण की कोशिशें रंग लाती दिख रही हैं। गिर के जंगल के बाद अब बरडा वन्यजीव अभयारण्य एशियाई शेरों का नया ठिकाना बन रहा है। पोरबंदर और देवभूमि द्वारका जिलों में फैले बरडा जंगल का पहाड़ी और पथरीला इलाका शेरों के लिए मुफीद साबित हो रहा है। हाल की एक रिसर्च के मुताबिक आगे चलकर यह अभयारण्य एशियाई शेरों के लंबे समय के संरक्षण का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
सौराष्ट्र में बसा बरडा वन्यजीव अभयारण्य 192.31 वर्ग किलोमीटर इलाके में फैला है। इस जंगल में तरह-तरह की वनस्पतियां और औषधीय पौधे मिलते हैं। रिसर्च में सामने आया है कि शेरों के रहने के लिए जरूरी प्राकृतिक हालात, काफी शिकार और माकूल माहौल यहां मौजूद है।
गुजरात सरकार ने शेरों के संरक्षण के लिए कई कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अगुवाई में बरडा जंगल में रहने वाले पशुपालकों के पुनर्वास के लिए भी योजना का ऐलान किया गया है। करीब 144 साल बाद शेरों ने कुदरती तौर पर इस जंगल में दोबारा अपना ठिकाना बनाया। शुरुआत में एक नर शेर यहां आया था। उसके बाद गुजरात वन विभाग ने 5 मादा शेरों को इस इलाके में लाकर छोड़ा।
वन विभाग की जानकारी के मुताबिक बरडा वन्यजीव अभयारण्य में अभी 17 शेर हैं। शेरों की आवाजाही, रहने की जगह की पसंद और खान-पान को समझने के लिए 6 शेरों को रेडियो कॉलर लगाए गए थे। जनवरी 2023 से जुलाई 2025 के बीच उनकी 1.69 लाख से ज्यादा जीपीएस लोकेशन दर्ज की गईं। रिसर्च में पाया गया कि शेर जंगल के घास वाले इलाके का सक्रिय तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं और अपना इलाका तथा आपसी सामाजिक रिश्ते भी बना रहे हैं।
'गिर के पार: एशियाई शेरों के लिए संभावित ठिकाने के रूप में बरडा वन्यजीव अभयारण्य' शीर्षक वाली यह रिसर्च रिपोर्ट 'पीएलओएस वन' पत्रिका में छपी है। यह अध्ययन गुजरात वन विभाग और कृषि व तकनीकी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने किया।
शेरों के लंबे समय तक टिके रहने के लिए वन विभाग जंगल में शिकार करने लायक जानवरों की तादाद बढ़ाने पर जोर दे रहा है। साल 2025-26 में गिर वन्यजीव अभयारण्य से 441 चीतल बरडा जंगल में छोड़े गए। इससे पहले भी 2007 से बड़ी संख्या में चीतल यहां छोड़े जा चुके हैं। इसके अलावा सांभर की संख्या बढ़ाकर उन्हें भी जंगल में छोड़ने की कोशिश चल रही है।
शेरों की आवाजाही और सेहत पर नियमित नजर रखने के लिए आठ पूर्णकालिक शेर ट्रैकर तैनात किए गए हैं। इंसान और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाओं से निपटने के लिए तुरंत कार्रवाई वाली व्यवस्था को भी और मजबूत किया गया है।
बरडा अभयारण्य में 2024 में पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन शुरू किया गया। इससे स्थानीय लोगों को नेचर गाइड और सफारी ऑपरेटर के तौर पर रोजगार के मौके मिले हैं। अभयारण्य आने वाले पर्यटकों की संख्या पहले साल के 2,271 से बढ़कर 2025-26 में 3,359 हो गई। यह बढ़ोतरी करीब 48 प्रतिशत है।
इन घटनाक्रमों से दिखता है कि गुजरात सरकार की संरक्षण पहल से शेरों के लिए दूसरा ठिकाना तैयार होने के साथ-साथ स्थानीय रोजगार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है।