चलती बस में ड्राइवर को हार्ट अटैक, कंडक्टर ने संभाली स्टीयरिंग, 25 सवारियां बचीं
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
अकोला के पास एसटी बस चला रहे राजेंद्र लासूरकर के सीने में अचानक दर्द उठा। कंडक्टर प्यारेलाल चव्हाण ने बस खुद चलाकर उन्हें अस्पताल पहुंचाया।
अकोला में राज्य परिवहन महामंडल की एक बस चलाते वक्त ड्राइवर को अचानक हार्ट अटैक जैसी तकलीफ शुरू हो गई। बस में उस समय 25 सवारियां थीं और सबकी जान खतरे में आ गई थी। लेकिन बस के कंडक्टर ने समझदारी दिखाई और बड़ा हादसा टल गया।
नागपुर डिपो की यह बस (एमएच 06/बीडब्ल्यू 0903) शुक्रवार को 25 सवारियों को लेकर नागपुर से धुले के लिए निकली थी। दोपहर में बस अकोला पहुंची तो वहां ड्राइवर बदला गया। इसके बाद आगे के सफर की जिम्मेदारी राजेंद्र लासूरकर ने संभाली।
बस बालापुर तालुका के व्याला गांव तक पहुंचती, उससे पहले ही लासूरकर के सीने में दर्द उठने लगा। उनकी हालत अचानक बिगड़ गई और उन्होंने यह बात कंडक्टर को बताई।
ड्राइवर की तबीयत बिगड़ती देखकर कंडक्टर प्यारेलाल चव्हाण ने एक पल भी नहीं गंवाया। उन्होंने लासूरकर को बस की पिछली सीट पर बिठाया। इसमें सवारियों ने भी उनकी मदद की। फिर चव्हाण खुद ड्राइवर की सीट पर बैठे, स्टीयरिंग हाथ में ली और सवारियों के सहयोग से बस सीधे सरकारी सर्वोपचार अस्पताल ले गए। वहां लासूरकर को फौरन इलाज के लिए भर्ती कर लिया गया।
कंडक्टर की इसी सूझबूझ से ड्राइवर समेत बस की 25 सवारियों की जान बच गई और बड़ा नुकसान होने से बच गया। फिलहाल ड्राइवर की हालत चिंताजनक बताई जा रही है और उनका इलाज चल रहा है।
इस बीच ड्राइवर की तरफ से एक आरोप भी सामने आया है। राजेंद्र लासूरकर का गुरुवार को एक्सीडेंट हुआ था, जिस वजह से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। इसी कारण उन्होंने डिपो प्रमुख के पास छुट्टी की अर्जी दी थी। ड्राइवर का आरोप है कि उनकी छुट्टी नामंजूर कर दी गई और उन्हें ड्यूटी पर भेज दिया गया।
ड्राइवर के साथ कुछ सवारियों ने भी यही आरोप लगाया है। उनका कहना है कि तबीयत ठीक न होने पर भी डिपो प्रमुख ने ड्राइवर को ड्यूटी पर भेजा, जिससे 25 सवारियों की जान जोखिम में पड़ गई।
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