बिना काम किए दो साल मोटी तनख्वाह, न्यूयॉर्क की MNC के कर्मचारी का रेडिट दावा
न्यूयॉर्क की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के कर्मचारी ने रेडिट पर दावा किया है कि री-स्ट्रक्चरिंग के बाद उसे करीब दो साल बिना काम के पगार मिलती रही।
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कॉर्पोरेट दुनिया में कई बार ऐसी बातें होती हैं कि यकीन करना मुश्किल हो जाता है। सोचिए, कोई कर्मचारी कहे कि उसे बिना कोई काम किए हर साल करोड़ों तक की तनख्वाह मिलती रही, तो क्या आप मानेंगे? सुनने में यह किसी फिल्मी कहानी जैसा लगता है, लेकिन न्यूयॉर्क की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) के एक कर्मचारी के साथ ठीक यही हुआ है। उसका दावा है कि दो साल तक कोई काम न करने के बावजूद कंपनी उसे पगार के रूप में करोड़ रुपये देती रही।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'रेडिट' पर इस कर्मचारी की कहानी तेजी से वायरल हो रही है। उसका कहना है कि कंपनी में हुए री-ऑर्गनाइजेशन की वजह से उसे करीब दो साल तक बिना काम के भारी पगार मिलती रही। इस दौरान उसने बिना कुछ किए 5 लाख डॉलर कमाए, यानी करीब 4.7 करोड़ रुपये से ज्यादा। उसने यह भी बताया कि इन दो सालों में उसने जिंदगी का खूब मजा लिया। इस अनोखे मामले की पूरी बात इसी वायरल पोस्ट से सामने आई है।
पोस्ट के मुताबिक, यह कर्मचारी न्यूयॉर्क की एक MNC में करीब 10 साल अलग-अलग विभागों में काम कर चुका था। 2025 की शुरुआत में उसने कंपनी के अंदर ही एक नई टीम जॉइन की। वह इसे बड़ा प्रमोशन मान रहा था। लेकिन पहले ही दिन कंपनी में री-स्ट्रक्चरिंग हो गई और मैनेजर व डायरेक्टर को नौकरी से निकाल दिया गया। न उसके पास कोई टीम बची, न काम देने वाला बॉस। फिर भी उसे बिना किसी जिम्मेदारी और मैनेजमेंट के मार्गदर्शन के हर साल 2.75 लाख डॉलर की पगार मिलने लगी।
शुरू में उसे यह सब बड़ा मजेदार लगा। पर लंबे समय तक बिना काम के रहना किसी भी प्रोफेशन के लिए भारी पड़ सकता है। वह ऑफिस के कैफे में नेटफ्लिक्स और यूट्यूब देखकर दिन काटता था। न्यूयॉर्क में नया होने की वजह से हफ्ते में कई बार नए और मशहूर रेस्टोरेंट में लंच करने जाता था। उसने बताया कि इन दो सालों में उसने मैनहैटन का कोना-कोना पैदल घूम डाला। शुरुआत में उसने नए मैनेजर से काम मांगा था और नए प्रोजेक्ट्स में शामिल होने की कोशिश भी की थी, मगर मैनेजमेंट की तरफ से कोई जवाब नहीं आया।
बिना काम के लगातार पगार मिलने से पहले उसके मन में थोड़ा गिल्ट आया, जो धीरे-धीरे निराशा में बदल गया। उसे लगता है कि इतने लंबे खाली वक्त ने उसके आत्मविश्वास पर बहुत बुरा असर डाला। उसे महसूस होने लगा कि करियर में वह दूसरों से पीछे छूट रहा है। आखिर में लगातार 6 महीने इंटरव्यू देने के बाद उसे उसी कंपनी के अंदर एक दूसरी और बेहतर भूमिका मिल गई। उसने लिखा कि कॉर्पोरेट दुनिया सचमुच बहुत अजीब है और इस दौर से उसे जिंदगी का एक अलग ही सबक मिला।