बफर स्टॉक से बिक्री बढ़ी, नई आवक भी आई; आने वाले हफ्तों में प्याज सस्ता होने की उम्मीद
खरीफ के प्याज की आवक बढ़ने और केंद्र की बफर स्टॉक से बिक्री बढ़ाने के बाद त्योहारों से पहले भाव घटने की संभावना है, पर खुदरा दाम अभी खास नहीं गिरे हैं।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
प्याज के बढ़ते दामों से परेशान ग्राहकों को आने वाले कुछ हफ्तों में राहत मिल सकती है। खरीफ सीजन के प्याज की आवक महाराष्ट्र, कर्नाटक और दूसरे उत्पादक राज्यों से बढ़ गई है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने दाम काबू में रखने के लिए बफर स्टॉक से प्याज की बिक्री भी बढ़ा दी है। इसी वजह से त्योहारों के मौके पर प्याज के भाव नीचे आने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल प्याज का औसत खुदरा भाव 52.99 रुपये प्रति किलो है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब दोगुना है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 10 सितंबर के आसपास औसत खुदरा भाव 53.10 रुपये प्रति किलो था। 10 अक्टूबर को यह थोड़ा घटकर 52.99 रुपये प्रति किलो हो गया। थोक बाजार में सप्लाई सुधरने के संकेत दिख रहे हैं, लेकिन इसका फायदा खुदरा ग्राहकों तक बहुत थोड़ा ही पहुंचा है। प्याज का औसत थोक भाव 4591 प्रति क्विंटल रहा। यह एक महीने पहले की तुलना में 2.4 फीसदी और एक साल पहले की तुलना में 123.3 फीसदी ज्यादा है।
राहत की उम्मीद की सबसे बड़ी वजह महाराष्ट्र और दूसरे उत्पादक राज्यों से नई फसल की बढ़ी हुई आवक है। व्यापारियों को उम्मीद है कि नवंबर तक बाजार में प्याज की उपलब्धता बेहतर हो जाएगी। कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से सप्लाई नवंबर के आखिर तक जारी रहने की संभावना है।
सरकार ने वितरण व्यवस्था को मजबूत किया है। इसका मकसद त्योहारों के दौरान दामों में बड़ी उछाल को रोकना और बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखना है। सरकारी स्टॉक से प्याज उपलब्ध होने के बावजूद खुदरा कीमतों में अभी कोई खास गिरावट नहीं आई है।
महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में पुराने प्याज का भी पर्याप्त स्टॉक है। इससे नवंबर के तीसरे हफ्ते तक मांग पूरी करने में मदद मिल सकती है। उधर राजस्थान के अलवर इलाके से प्याज की सप्लाई बढ़ने से उत्तर भारत की महाराष्ट्र पर निर्भरता कम हो सकती है। प्याज के बढ़ते दामों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक से 123 शहरों में प्याज बिक्री का दायरा बढ़ाया है।