मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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प्याज फिर हुआ महंगा, बाजार में 70 रुपये किलो, सरकार के दाम काबू में नहीं आ रहे

प्याज फिर हुआ महंगा, बाजार में 70 रुपये किलो, सरकार के दाम काबू में नहीं आ रहे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

सरकार बफर स्टॉक से 35 रुपये किलो प्याज बेच रही है, फिर भी बाजार में लोगों को 60-70 रुपये किलो तक दाम चुकाने पड़ रहे हैं।

महंगाई ने पिछले कुछ दिनों से आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। चीनी के दाम बढ़ने के बाद अब प्याज ने लोगों को रुला दिया है। इस पर काबू पाने के लिए सरकार ने बफर सिस्टम भी शुरू किया, लेकिन उसका ज्यादा असर होता नहीं दिख रहा। आज भी लोगों को बढ़ी हुई कीमतों से कोई राहत नहीं मिली है और प्याज के दाम आसमान छू रहे हैं।

राहत देने के लिए सरकार अपने बफर स्टॉक से प्याज जनता को 35 रुपये प्रति किलो के दाम पर बेच रही है। इसके बावजूद देश के कई हिस्सों में लोगों को बाजार में 60 से 70 रुपये प्रति किलो के दाम पर प्याज खरीदना पड़ रहा है।

सरकार ने बफर स्टॉक में प्याज जमा तो कर रखा है, लेकिन असली चुनौती यह है कि उत्पादन वाले इलाकों से देशभर के अलग-अलग शहरों और बाजारों तक इसे पहुंचाया कैसे जाए। सरकार ने 24 अगस्त से बफर स्टॉक से प्याज की बिक्री शुरू की है। इसके लिए एनसीसीएफ, नाफेड, केंद्रीय गोदाम और मोबाइल वैन का इस्तेमाल किया जा रहा है। "ऑनियन एक्सप्रेस" के जरिए प्याज उत्पादक राज्यों से बड़े उपभोक्ता शहरों तक भेजा जा रहा है।

प्याज के दाम बढ़ने की एक बड़ी वजह रबी और खरीफ सीजन की कटाई के बीच का गैप बताया जा रहा है। आमतौर पर इस दौरान पुराने रबी प्याज का स्टॉक धीरे-धीरे कम होता जाता है, जबकि नई खरीफ फसल पूरी तरह बाजार में नहीं आ पाती। इस वजह से कुछ समय के लिए प्याज की सप्लाई घट जाती है, जिससे दाम बढ़ जाते हैं।

सरकार का कहना है कि देश में प्याज की कोई कुल कमी नहीं है। 2025-26 में प्याज का उत्पादन 30.737 दशलक्ष टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 30.767 दशलक्ष टन के लगभग बराबर ही है। सरकार ने 2026-27 में बफर स्टॉक के लिए 20 लाख टन रबी प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा था। इसमें से करीब 1.21 दशलक्ष टन प्याज पहले ही खरीदा जा चुका है। बफर स्टॉक के लिए प्याज बेचने वाले किसानों को अच्छा भाव मिले, इसके लिए खरीद दर भी 18.75 रुपये से बढ़ाकर 21.25 रुपये प्रति किलो कर दी गई है।

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