रविवार, 11 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
16:06 IST

अष्टमी पर देवी की गोद कैसे भरें: सामान, साड़ी और ब्लाउज़ पीस के नियम

नवरात्रि की अष्टमी पर देवी की गोद भरने का तरीका, उसमें रखे जाने वाले सामान का मतलब और साड़ी-ब्लाउज़ पीस से जुड़े नियम।

अष्टमी पर देवी की गोद कैसे भरें: सामान, साड़ी और ब्लाउज़ पीस के नियम तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

परंपरा के मुताबिक घर आई सुहागन महिला को कभी खाली हाथ नहीं भेजा जाता। उसकी गोद भरकर ही उसे विदा किया जाता है। आजकल कई लोगों को लगता है कि यह सिर्फ एक फॉर्मैलिटी है, लेकिन इसके पीछे बड़ा अर्थ छिपा है।

गोद भरना इस संस्कृति का एक अहम विधि है। इसका मुख्य मकसद उस स्त्री को आशीर्वाद देना है कि उसे संतान हो और उसकी कोख फले-फूले। एक तरह से यह उसके मां बनने की शक्ति का सम्मान है।

गोद का मतलब है नाभि के नीचे पेट का हिस्सा, जहां स्त्री का गर्भाशय होता है। जैसे जमीन में नया अनाज उगाने की ताकत होती है, वैसे ही स्त्री की गोद में नए जीव को जन्म देने की ताकत होती है। इसी वजह से सिर्फ शादीशुदा औरतों की गोद भरी जाती है, विधवा औरतों की नहीं।

शादी में भी यह विधि होती है। इसे फल भरना या फलशोभन भी कहते हैं। गांव-देहात में आज भी इसे फल भरना ही कहा जाता है। बेटी ससुराल जाती है तो उसकी गोद भरी जाती है, ताकि उसका ससुराल फल-फूलों से भर जाए।

गोद में बिना वजह कुछ भी नहीं डाला जाता, हर चीज का एक अर्थ है। इसमें चावल, गोला, नारियल, सुपारी, हल्दी की गांठ, पांच तरह के फल और हल्दी-कुमकुम होता है। चावल का मतलब समृद्धि है और सुपारी का मतलब अखंडता। नारियल विघ्न दूर करने वाला माना गया है, जबकि हल्दी-कुमकुम सौभाग्य का प्रतीक है। ये सारी चीजें मंगल और आरोग्य देने वाली हैं।

नई दुल्हन की गोद भरते वक्त पांच सुहागनें आकर उसके पल्लू में ये चीजें डालती हैं और आशीर्वाद देती हैं कि उसे अच्छी संतानें हों।

यह तरीका आज का नहीं है, बहुत पुराने समय से चला आ रहा है। लोग कितने भी मॉडर्न हो जाएं, शादी या बच्चे के जन्म जैसे मौकों पर इसे खास तौर पर किया जाता है। इसी से पता चलता है कि इसकी कितनी अहमियत है।

जैसे महिलाओं की गोद भरी जाती है, वैसे ही देवी की भी भरी जाती है। खास तौर पर नवरात्रि की अष्टमी पर या कोई अच्छा काम हो जाने पर देवी की गोद भरते हैं। वजह यह बताई जाती है कि जो सौभाग्य मिला है, वह देवी की वजह से ही मिला है, इसलिए उनका आभार मानने के लिए गोद भरी जाती है।

देवी को कभी छह गज की साड़ी नहीं दी जाती। उन्हें हमेशा नौ गज की साड़ी और ब्लाउज पीस दिया जाता है। नौ गज की साड़ी देवी के नौ रूपों का प्रतीक है, और जो तिकोना ब्लाउज पीस होता है, उसे ब्रह्मा, विष्णु, महेश इन तीन देवों की शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

कहा जाता है कि साड़ी हो सके तो रेशम की होनी चाहिए, क्योंकि देवी की मूर्ति से निकलने वाली अच्छी एनर्जी रेशम में ज्यादा टिकती है। उस साड़ी पर ब्लाउज पीस रखा जाता है और ब्लाउज पीस पर नारियल, चावल वगैरह गोद भराई का सामान। नारियल की चोटी हमेशा देवी की तरफ रहनी चाहिए। फिर देवी से कहा जाता है, "मां, यह गोद भराई स्वीकार करो और तुम्हारी कृपा हम पर ऐसे ही बनी रहे।"

इस तरह गोद भरने की परंपरा है। यह सिर्फ एक रिवाज नहीं है, बल्कि स्त्री की सृजनशीलता और उसके मातृत्व का किया गया आदर है।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे