अंबरनाथ में बिलो टेंडर पर भाजपा नगराध्यक्ष शिंदे से मिलीं, परब ने बताई वजह
अंबरनाथ नगर परिषद के बिलो टेंडर के मुद्दे पर भाजपा और शिवसेना शिंदे गुट के बीच मतभेद के संकेत दिख रहे हैं। कल्याण जिला भाजपा अध्यक्ष नंदकिशोर परब ने नगराध्यक्ष की मुलाकात पर सफाई दी है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
अंबरनाथ नगर परिषद में बिलो टेंडर के मुद्दे पर भाजपा और शिवसेना शिंदे गुट के बीच मतभेद के संकेत दिख रहे हैं। परिषद के विकास कामों के लिए कम रेट पर टेंडर भरे जा रहे हैं, इसलिए सवाल उठ रहा है कि ये काम वक्त पर पूरे होंगे या नहीं।
इसी बीच जानकारी सामने आई है कि भाजपा की नगराध्यक्ष तेजश्री करंजुले ने भाजपा के पार्षदों के साथ राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद अंबरनाथ के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
नगर परिषद में अलग-अलग विकास कामों के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। इनमें कुछ कामों के लिए बिलो टेंडर भरे गए हैं, यानी अनुमानित टेंडर कीमत से कम रेट पर टेंडर डाले गए हैं। ऐसे में चिंता जताई जा रही है कि ये काम तय वक्त पर और उम्मीद के मुताबिक क्वालिटी के साथ पूरे हो पाएंगे या नहीं।
बताया जा रहा है कि इसी मुद्दे को लेकर नगराध्यक्ष तेजश्री करंजुले भाजपा पार्षदों के साथ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मिलीं। जानकारी के मुताबिक इस मुलाकात में विकास कामों को लागू करने से जुड़े सवालों पर बातचीत हुई।
इस मुलाकात को लेकर कल्याण जिला भाजपा अध्यक्ष नंदकिशोर परब ने सफाई दी है। उनके कहने के मुताबिक नगर परिषद में कुछ विकास कामों के लिए बिलो टेंडर भरे जा रहे हैं, इसलिए इन कामों के वक्त पर पूरे होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। परब का कहना है कि अगर काम वक्त पर पूरे नहीं हुए तो उसकी जिम्मेदारी भाजपा की नगराध्यक्ष और भाजपा पर डाली जा सकती है। इसी वजह से इस विषय पर बात करने के लिए तेजश्री करंजुले भाजपा पार्षदों के साथ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मिलीं, यह बात परब ने साफ की।
सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि बिलो टेंडर भरने वालों में शिवसेना शिंदे गुट के कुछ लोग भी शामिल हैं। लेकिन इस दावे की अलग से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इससे जुड़े आरोपों या दावों को सावधानी से देखना जरूरी है।
अब बिलो टेंडर का मुद्दा सिर्फ टेंडर प्रक्रिया और विकास कामों तक सीमित नहीं रहा। यह भाजपा और शिवसेना शिंदे गुट के आपसी रिश्तों के लिए भी अहम बन सकता है। काम वक्त पर पूरे होने, टेंडर की प्रक्रिया और कामों की क्वालिटी को लेकर दोनों पार्टियों के बीच मतभेद बढ़ेंगे या नहीं, इस पर राजनीतिक गलियारों की नजर है।
फिर भी, इस मामले से दोनों पार्टियों के बीच सीधा राजनीतिक टकराव शुरू हो गया है, यह पक्के तौर पर कहने के लिए आधिकारिक जानकारी और संबंधित पार्टियों का रुख सामने आना जरूरी है। आने वाले दिनों में अंबरनाथ नगर परिषद बिलो टेंडर के मुद्दे पर क्या रुख लेती है और विकास कामों को लेकर क्या फैसले होते हैं, यह देखना अहम होगा।
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