त्योहारी खरीदारी में मुंबई सबसे आगे, क्रेडिट कार्ड का सबसे ज्यादा इस्तेमाल
'हाऊ अर्बन इंडिया पेज रिपोर्ट 2026' के मुताबिक त्योहारों में मुंबई के लोग क्रेडिट कार्ड से सबसे ज्यादा खरीदारी करते हैं, और 77 प्रतिशत शहरी भारतीय सामान्य से कम से कम 50 प्रतिशत ज्यादा खर्च करते हैं।
दिवाली और दूसरे त्योहारों के मौके पर देशभर में खरीदारी का जोश बढ़ रहा है। इसी बीच एक राष्ट्रीय सर्वे से मुंबई वालों की खर्च करने की आदतों के बारे में अहम जानकारी सामने आई है। त्योहारों की खरीदारी में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने के मामले में मुंबई देश में सबसे आगे है।
यह रिपोर्ट 'पहले इंडिया फाउंडेशन' और 'अमेज़न पे इंडिया' ने मिलकर जारी की है। 'हाऊ अर्बन इंडिया पेज रिपोर्ट 2026' (How Urban India Pays Report 2026) नाम की इस रिपोर्ट में भारतीय ग्राहकों की बदलती आर्थिक आदतों की तस्वीर दिखती है। रिपोर्ट के मुताबिक डिजिटल पेमेंट अब सिर्फ एक वैकल्पिक सुविधा नहीं रहा, बल्कि शहरी भारतीयों के रोज के लेनदेन का अहम हिस्सा बन चुका है।
सर्वे देश के 20 राज्यों के 100 शहरों में किया गया। इसमें 5,149 ग्राहक और 1,054 व्यापारी शामिल थे। सर्वे में शहरी लोगों के खरीदारी के तरीके, डिजिटल पेमेंट के इस्तेमाल, क्रेडिट कार्ड पर भरोसे, किस्तों पर खरीदारी और आर्थिक प्लानिंग का अध्ययन किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक देश के 77 प्रतिशत शहरी लोग त्योहारों में अपने नियमित खर्च से कम से कम 50 प्रतिशत ज्यादा खर्च करते हैं। इनमें से 46 प्रतिशत लोगों का खर्च नियमित बजट का डेढ़ से दोगुना होता है, जबकि छह प्रतिशत लोग त्योहारों में अपने सामान्य बजट का तीन गुना खर्च करते हैं। जयपुर में 88 प्रतिशत लोग त्योहारों में बजट का दोगुना खर्च करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि राजकोट और अहमदाबाद में तीन गुना खर्च करने वाले ग्राहकों का अनुपात सबसे ज्यादा है।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में त्योहारी खरीदारी के लिए क्रेडिट कार्ड का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है, ऐसा रिपोर्ट में बताया गया है। 'बाय नाऊ पे लेटर' (BNPL), यूपीआई और दूसरे डिजिटल पेमेंट के विकल्प मौजूद होने के बावजूद मुंबई के ग्राहक क्रेडिट कार्ड को खास तरजीह दे रहे हैं। क्रेडिट कार्ड से बड़ी रकम की खरीदारी, किस्तों पर सामान लेना और कई तरह की पेमेंट सुविधाओं का इस्तेमाल मुमकिन होता है। लेकिन खर्च की रकम वक्त पर न चुकाई जाए तो ब्याज और दूसरे शुल्क लग सकते हैं।
त्योहारों में ग्राहक इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों पर बड़ी रकम खर्च करते हैं। खरीदारी की कुल कीमत के हिसाब से कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेज की श्रेणियां आगे हैं। वहीं खरीदने वाले ग्राहकों के अनुपात के हिसाब से फैशन और ब्यूटी प्रोडक्ट को 89 प्रतिशत, घर और किचन के सामान को 87 प्रतिशत और किराने को 84 प्रतिशत ग्राहकों ने पसंद किया।
यूपीआई का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। शहरी ग्राहकों के खर्च की छह प्रमुख श्रेणियों में से पांच में यूपीआई सबसे पसंदीदा पेमेंट विकल्प है। ऑनलाइन खरीदारी के लिए 71 प्रतिशत, बाहर खाने और सफर के लिए 54 प्रतिशत, ईंधन और ट्रांसपोर्ट के लिए 53 प्रतिशत, दवा-इलाज के लिए 53 प्रतिशत और किराने के लिए 49 प्रतिशत ग्राहक यूपीआई को तरजीह देते हैं। साथ ही 75 प्रतिशत शहरी ग्राहक अपने पेमेंट ऐप पर कम से कम एक वित्तीय प्रोडक्ट इस्तेमाल करते हैं।
रिपोर्ट में देश का पहला 'डिजिटल क्रेडिट इन्क्लूजन इंडेक्स' (DCII) 2026 भी पेश किया गया। इसमें भारत को 100 में से 55.85 अंक मिले हैं और देश को 'इमर्जिंग एंड सर्व्ड' श्रेणी में रखा गया है। इंडेक्स तीन हिस्सों पर आधारित है: डिजिटल क्रेडिट की पहुंच 61.24 अंक, स्वीकार्यता 57.17 अंक और प्रभाव 49.16 अंक।
डिजिटल क्रेडिट के इस्तेमाल में टियर-2 शहरों ने महानगरों से बेहतर प्रदर्शन किया है। टियर-2 शहरों का इंडेक्स 58.64 है, जबकि महानगरों का स्कोर 53.10 है। टियर-2 शहरों में 'बाय नाऊ पे लेटर' का इस्तेमाल 60 प्रतिशत और लोन से जुड़े ऐप का इस्तेमाल 41 प्रतिशत है। कोयंबटूर में 70 प्रतिशत लोग इलेक्ट्रॉनिक्स सामान किस्तों पर खरीदते हैं।
व्यापारियों को भी डिजिटल पेमेंट का फायदा हुआ है। सर्वे के 80.6 प्रतिशत व्यापारी डिजिटल पेमेंट स्वीकार करते हैं, और इनमें से 79.5 प्रतिशत ने कहा कि इससे उनकी बिक्री बढ़ी है। जो व्यापारी डिजिटल पेमेंट लेने में हिचकते हैं, उनमें से 72.1 प्रतिशत ने पैसा खाते में देर से आने को सबसे बड़ी दिक्कत बताया।
सर्वे के 43 प्रतिशत गिग वर्कर्स ने कहा कि डिजिटल क्रेडिट से उनकी आर्थिक आजादी बढ़ी है, जबकि 55 प्रतिशत वरिष्ठ नागरिकों ने डिजिटल पेमेंट से आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास बढ़ने की बात कही। आर्थिक आदतों के मामले में 41 प्रतिशत लोग 'प्लानर' यानी खर्च की प्लानिंग करने वाले हैं। 33 प्रतिशत बचत को प्राथमिकता देते हैं, 15 प्रतिशत रोजमर्रा का खर्च चलाने पर जोर देते हैं, सात प्रतिशत अचानक खरीदारी करते हैं और चार प्रतिशत आत्मविश्वास से कर्ज लेते हैं।
पहले इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि एक दशक से भी कम वक्त में यूपीआई ने भारत की पेमेंट व्यवस्था को बड़े पैमाने पर बदल दिया है। उनके मुताबिक शहरी ग्राहक अब आदत से डिजिटल लेनदेन करते हैं, और इस भरोसे को कर्ज, बचत और निवेश के क्षेत्र तक बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी जानकारी, साइबर सुरक्षा और अनौपचारिक आमदनी वाले लोगों की जरूरतों का ख्याल रखने वाली कर्ज व्यवस्था विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के लिए अहम हो सकती है।
अमेज़न पे इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विकास बंसल ने कहा कि शहरी ग्राहक रोजमर्रा के आर्थिक प्रबंधन के लिए डिजिटल क्रेडिट को ज्यादा आत्मविश्वास से अपना रहे हैं। उन्होंने बताया कि अमेज़न पे के 75 प्रतिशत ग्राहक टियर-2 और टियर-3 शहरों के हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी का जोर ग्राहकों को कर्ज की सुविधा ज्यादा आसान, पारदर्शी और उनकी जरूरत के मुताबिक देने पर है।