बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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19:55 IST

खामगांव में सोयाबीन का उत्पादन घटा, दाम भी गिरे; कम बारिश से किसान दोहरी मार में

कम बारिश से सोयाबीन की फसल को भारी नुकसान हुआ है और बाजार भाव भी अच्छा नहीं मिल रहा, इससे किसान परेशान हैं।

खामगांव में सोयाबीन का उत्पादन घटा, दाम भी गिरे; कम बारिश से किसान दोहरी मार में तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

खामगांव इलाके में इस साल कम बारिश ने सोयाबीन की फसल को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। बारिश में खंड पड़ने का असर फसल की बढ़वार पर हुआ। नतीजा यह है कि कई किसानों के खेत में एकड़ पीछे सिर्फ ५० किलो सोयाबीन हुआ है। ऊपर से कटाई के वक्त बाजार भाव भी तसल्लीबख्श नहीं है, इसलिए किसान दोहरी मुसीबत में फंस गए हैं।

सोयाबीन की बुवाई से लेकर कटाई तक किसानों को बीज, खाद, छिड़काव, जुताई और मजदूरी पर बड़ा खर्च करना पड़ता है। लेकिन इस साल बारिश की कमी की वजह से फसल उम्मीद के मुताबिक आई ही नहीं। कई जगह फलियों की संख्या कम रही, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आई। किसानों के सामने सवाल है कि अगर एकड़ पीछे ५० किलो सोयाबीन ही हाथ आएगा, तो खेती का खर्च कैसे निकलेगा।

उत्पादन कम होने से किसानों का आर्थिक हिसाब बिगड़ गया है। बाजार में सोयाबीन को वह भाव भी नहीं मिल रहा जिसकी उम्मीद थी, इससे मुश्किल और बढ़ी है। दिवाली करीब है और घर का खर्च चलाने तथा कर्ज चुकाने के लिए किसानों को सोयाबीन बेचना पड़ रहा है। मगर कम उत्पादन और कम दाम के चलते हाथ में पर्याप्त रकम आने की संभावना कम है। इस साल सोयाबीन उगाने वाले किसान कुदरत की मार के साथ-साथ बाजार भाव की समस्या से भी जूझ रहे हैं।

किसानों की मांग है कि सरकार फसल नुकसान का सर्वे करके आर्थिक मदद दे और सोयाबीन को सही भाव दिलाने के लिए उपाय करे।

खामगांव कृषि उपज बाजार समिति के सभापति श्रीकृष्ण टिकार ने कहा कि सोयाबीन का उत्पादन घटने से किसान पहले ही मुश्किल में हैं। ऊपर से पिछले साल की तुलना में बाजार भाव गिरने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है। उत्पादन खर्च, मजदूरी और छिड़काव का खर्च बढ़ा हुआ है, ऐसे में अपेक्षित भाव मिलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बाजार समिति में सोयाबीन की आवक और दर पर नजर रखी जा रही है।

सत्याग्रह किसान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राजू नाकाडे ने कहा कि इस साल कम बारिश की वजह से सोयाबीन किसानों के खेत में एकड़ पीछे ५० किलो भी उत्पादन नहीं हो रहा, और बाजार में सोयाबीन को सही भाव नहीं मिल रहा। उनके मुताबिक सरकार सिर्फ हमीभाव घोषित करके अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। उन्होंने कहा कि किसानों के असल नुकसान के पंचनामे हो चुके हैं, फिर भी आर्थिक मदद नहीं मिली, इसलिए सरकार वक्त काटने की नीति अपना रही है। नाकाडे ने यह भी मांग की कि हमीभाव पर खरीद केंद्र शुरू करके किसानों को राहत दी जाए।

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