अमरावती के बेलोरा में एयर इंडिया की फ्लाइंग अकादमी को डीजीसीए की मंजूरी, 34 विमान पहुंचे
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बेलोरा हवाई अड्डे पर बन रही एयर इंडिया फ्लाइंग अकादमी का करीब 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। डीजीसीए की मंजूरी मिल गई है और पहले बैच में 180 प्रशिक्षणार्थी होंगे।
अमरावती में बन रही एयर इंडिया फ्लाइंग अकादमी (एफटीओ) का प्रोजेक्ट अब आखिरी दौर में पहुंच गया है। बेलोरा हवाई अड्डे पर तैयार हो रहे इस बड़े प्रोजेक्ट का करीब 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। देश के विमान यातायात क्षेत्र को नई दिशा देने वाला और विदर्भ के विकास के लिए अहम माना जा रहा यह प्रोजेक्ट अब शुरू होने के करीब है।
पायलट ट्रेनिंग के लिए जितने विमान चाहिए थे, वे सभी 34 विमान बेलोरा हवाई अड्डे पर आ चुके हैं। इनमें 31 सिंगल इंजन वाले 'Piper Archer' और तीन ट्विन इंजन वाले 'Diamond DA 42 NG' विमान हैं। अब डीजीसीए ने भी इसे आधिकारिक मंजूरी दे दी है, इसलिए ट्रेनिंग शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
यह केंद्र महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी और टाटा समूह के मालिकाना हक वाली एयर इंडिया के साझा सहयोग से खड़ा किया जा रहा है। इसे दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा पायलट ट्रेनिंग सेंटर बताया गया है। इसकी वजह से देश के भावी पायलटों को महाराष्ट्र में ही वर्ल्ड क्लास ट्रेनिंग लेने का मौका मिलेगा।
प्रशासनिक और ऑपरेशन से जुड़ी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगले एक महीने में असली ट्रेनिंग शुरू करने का प्लान है। पहले जत्थे यानी पहले बैच में कुल 180 प्रशिक्षणार्थी लिए जाएंगे।
कमर्शियल पायलट लाइसेंस पाने के लिए कोर्स 18 महीने का रहेगा। इस दौरान हर प्रशिक्षणार्थी को असली विमान से 200 घंटे की उड़ान ट्रेनिंग पूरी करनी होगी। इसमें सिंगल इंजन विमान से 185 घंटे की ट्रेनिंग शामिल है, और मल्टी इंजन विमान से भी उड़ान ट्रेनिंग दी जाएगी।
जानकारों का कहना है कि अमरावती का मौसम उड़ान के लिए अनुकूल है। साल में कम से कम 300 दिन फ्लाइंग ट्रेनिंग के लिए अच्छा माहौल मिल सकता है। इसी वजह से उम्मीद है कि अमरावती पायलट ट्रेनिंग का एक अहम केंद्र बनकर उभरेगा।
ट्रेनिंग सेंटर का परिसर 10 एकड़ में फैला है। यहां प्रशिक्षणार्थियों के लिए हॉस्टल और भोजनालय बनाया गया है। इसके अलावा आधुनिक क्लासरूम, ब्रीफिंग रूम और हैंगर हैं, और विमानों की देखभाल और मरम्मत के लिए अलग इंतजाम किया गया है।
असली उड़ान से पहले प्रैक्टिस के लिए तीन फ्लाइट सिम्युलेटर भी रखे गए हैं। इनमें दो सिंगल इंजन के और एक मल्टी इंजन का सिम्युलेटर है। ट्रेनिंग का स्तर बना रहे, इसके लिए हर फ्लाइट इंस्ट्रक्टर के पास सिर्फ छह प्रशिक्षणार्थी रखने का अनुपात तय किया गया है।
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