सात महीने में कम से कम छह बार बदले या समझाए गए सीबीएसई के नियम, पैरेंट्स और स्टूडेंट्स उलझन में
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मई से अक्टूबर 2026 के बीच सीबीएसई को डिजिटल मूल्यांकन, त्रि-भाषा नीति, पासिंग मार्क्स और कक्षा 9 के सिलेबस पर बार-बार सफाई देनी पड़ी।
देश के सबसे बड़े एजुकेशन बोर्ड सीबीएसई के लिए 2026 का साल फैसलों और उनकी सफाई का साल बनता जा रहा है। मई 2026 से अक्टूबर 2026 तक, यानी सिर्फ 7 महीने में बोर्ड को कम से कम 6 बार अपने नियमों में बदलाव करना पड़ा या उन पर स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा। डिजिटल मूल्यांकन के विवाद से लेकर एक्स्ट्रा नंबरों की गिनती, थ्री लैंग्वेज फॉर्म्युला, पास होने के नंबरों की उलझन और अब कक्षा 9 के सिलेबस में अचानक हुए बदलाव तक, स्टूडेंट्स, पैरेंट्स और स्कूल प्रशासन सब परेशान हैं।
बोर्ड परीक्षाएं नजदीक हैं। नए शिक्षा मंत्री ने कामकाज संभाल लिया है और बोर्ड को नया अध्यक्ष भी मिल चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आने वाला 2027 स्टूडेंट्स के लिए स्थिरता लाएगा या नियमों में और नए बदलाव देखने को मिलेंगे।
16 मई को कक्षा 12 की आंसर शीट के लिए नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को लेकर शिकायतें और सवाल उठे। सीबीएसई ने अपनी डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया का बचाव किया और समझाया कि स्टेप-वाइज मार्किंग कैसे काम करती है। जिन स्टूडेंट्स को अपने नंबर मंजूर नहीं थे, उन्हें वेरिफिकेशन और री-इवैल्युएशन की प्रक्रिया अपनाने को कहा गया। इस विवाद के बाद 2 जून को सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सेक्रेटरी हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया। इसके बाद OSM सेवाओं की खरीद की जांच शुरू हुई।
4 जून को एक और मुद्दा सामने आया। जिन स्टूडेंट्स को जांची हुई आंसर शीट की स्कैन कॉपी मिली, उन्होंने देखा कि कैल्कुलेटेड शीट में लिखे नंबर और फाइनल टोटल में फर्क है। इस पर सीबीएसई ने बताया कि जब स्टूडेंट्स एक्स्ट्रा सवाल हल करते हैं तो नंबरों की गिनती कैसे होगी, और बेस्ट ऑफ मार्क्स देने के लिए कौन सी प्रक्रिया अपनाई जाती है।
बोर्ड ने 15 मई को ऐलान किया था कि 2026-27 सेशन से कक्षा 9 के स्टूडेंट्स के लिए तीन भाषाएं अनिवार्य होंगी। इसके बाद 29 जून को उसने त्रि-भाषा नीति के फ्रेमवर्क पर विस्तार से सफाई जारी की। उसमें ट्रांजैक्शन और अरेंजमेंट सूट, विदेशी भाषाओं के कॉम्बिनेशन और किस बैच को तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा देनी पड़ेगी, इसकी जानकारी दी गई। फिर भी उलझन खत्म नहीं हुई तो 10 जुलाई को बोर्ड को दोबारा गाइडलाइंस जारी करनी पड़ीं। इनमें तीसरी भाषा में फेल होने पर क्या होगा, टीचरों की व्यवस्था और परिवारों के ट्रांसफर जैसे मुद्दे साफ किए गए।
3 अक्टूबर को एक करिकुलम डॉक्युमेंट की वजह से अफवाह फैल गई कि कक्षा 10 में थ्योरी और इंटरनल असेसमेंट, दोनों में अलग-अलग 33 प्रतिशत नंबर लाना जरूरी है। सीबीएसई को साफ करना पड़ा कि नियम बदला नहीं है। दोनों को मिलाकर कुल 33 प्रतिशत नंबर लाने वाले स्टूडेंट्स पास माने जाएंगे।
सबसे ताजा बदलाव 29 अक्टूबर के नए सर्कुलर में है। इसमें मौजूदा कक्षा 9 के बैच से 'इंडिविजुअल इन सोसाइटी' और 'कंप्यूटेशनल थिंकिंग एंड एआई मॉड्यूल' हटा दिए गए हैं। जब यही बैच 2027-28 में कक्षा 10 में जाएगा, तब उसे 'एनवायरनमेंटल एजुकेशन' भी नहीं पढ़ाई जाएगी। बोर्ड ने वोकेशनल एजुकेशन और विषय बदलने के नियमों पर भी स्पष्टीकरण दिया है।
यह सर्कुलर उन स्टूडेंट्स पर लागू होगा जो अभी कक्षा 9 में हैं और 2028 में कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा देंगे। जो स्टूडेंट्स 2027 में कक्षा 10 की परीक्षा देंगे, उन पर यह लागू नहीं होगा। बोर्ड परीक्षा में पांच विषय अनिवार्य होंगे: दो भाषाएं, गणित, विज्ञान और सोशल साइंस। इसके साथ स्टूडेंट्स को स्किल डेवलपमेंट या 22 स्किल विषयों में से एक चुनना होगा।
अगर कोई स्टूडेंट गणित, विज्ञान या सोशल साइंस में फेल हो जाए और 22 स्किल विषयों में से किसी एक में पास हो, तो स्किल विषय के नंबरों से फेल हुए विषय की जगह ली जा सकेगी। इसका मकसद स्टूडेंट्स को ज्यादा लचीलापन देना है, लेकिन इसके साथ कुछ नए नियम भी जुड़े हैं, जिन्हें स्कूलों और पैरेंट्स को समझ लेना जरूरी है।
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