अमेरिका में आर्थिक हालात पर बढ़ी मायूसी, कर्ज 40.5 ट्रिलियन डॉलर के पार, महंगाई का डर
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अमेरिकी उपभोक्ताओं में अपनी माली हालत को लेकर निराशा बढ़ी है, कर्ज और तेल के दाम चिंता बढ़ा रहे हैं।
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका इस वक्त मुश्किल दौर से गुजर रही है। उस पर जो भी असर पड़ता है, उसका दूर तक ग्लोबल असर होता है। अमेरिकी इकॉनमी कुछ समय से अच्छा प्रदर्शन कर रही थी, फिर भी उसका लगातार बढ़ता कर्ज एक बड़ा मोड़ बन गया है। हाल में महंगाई में काफी इजाफा हुआ है।
इस पर काबू पाने के लिए फेडरल रिजर्व ने सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाईं। दिसंबर में एक और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
आम अमेरिकी अपनी आर्थिक हालत को लेकर काफी निराश हैं। 41 प्रतिशत उपभोक्ताओं को लगता है कि अगले 12 महीनों में उनके हालात और बिगड़ेंगे। 2024 की दूसरी तिमाही से यह आंकड़ा तीन गुना हो गया है। 2008 के आर्थिक संकट के वक्त भी सिर्फ 23 प्रतिशत लोग अपने भविष्य को लेकर निराश थे।
1970 और 1980 के दशक में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI के हिसाब से महंगाई 10 प्रतिशत से ऊपर थी। तब भी लोग अपने भविष्य को लेकर इतने मायूस नहीं थे। अमेरिका अभी मंदी में नहीं है, लेकिन लोगों को उसकी आंच महसूस होने लगी है। 31 प्रतिशत अमेरिकी उपभोक्ताओं का मानना है कि अगले पांच साल में उनकी माली हालत और बिगड़ेगी। यह दर 1980 के दशक की दर से दोगुनी है।
अब कर्ज की बात। अमेरिका का कर्ज 40.5 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो चुका है। 1990 में यह 3.2 ट्रिलियन डॉलर था। हालात ऐसे हैं कि इस कर्ज का ब्याज चुकाने में सरकारी राजस्व का बड़ा हिस्सा जा रहा है। पहली तिमाही के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में प्रति व्यक्ति कर्ज 2,24,000 डॉलर था। इसमें सरकारी, पारिवारिक और कॉर्पोरेट, तीनों तरह का कर्ज शामिल है।
महंगाई के मोर्चे पर भी राहत के आसार कम हैं। देश में महंगाई लंबे वक्त तक ऊंची रह सकती है। ईंधन के दामों ने हाल में महंगाई को काफी रफ्तार दी है। बाजार के अंदाज के मुताबिक दिसंबर में ब्याज दर बढ़ने की 75 प्रतिशत संभावना है। मध्यावधि चुनावों की वजह से फेड ने अपनी हालिया बैठक में ब्याज दर बढ़ाने से परहेज किया। सिर्फ एक साल पहले बाजार को उम्मीद थी कि 2026 तक ब्याज दरों में तीन बार कटौती होगी।
कच्चे तेल को लेकर भी चिंता है। मध्यावधि चुनाव 3 नवंबर को होने हैं। माना जा रहा है कि उसके बाद ईरान पर नए हमले हो सकते हैं। इससे कच्चे तेल के दाम और चढ़ने की आशंका है। अक्टूबर में कच्चे तेल के दाम पहले ही 14 प्रतिशत बढ़ चुके हैं। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 2.37 प्रतिशत की बढ़त के साथ 113.4 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
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