अमडापूर की स्टेट बैंक में किसानों का धरना, सातबारा पर कर्ज दिखाकर फसल कर्ज रोकने का आरोप
बुलढाणा के अमडापूर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा के भीतर किसान धरने पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि सातबारा पर दूसरे कर्ज का बोझ दिखाकर फसल कर्ज देने से टाला जा रहा है।
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बुलढाणा जिले के अमडापूर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में किसानों ने धरना आंदोलन शुरू कर दिया है। शिकायत यह है कि सातबारा पर दूसरी बैंकों और साख संस्थाओं के निजी कर्ज का बोझ होने की वजह बताकर किसानों को फसल कर्ज देने में टालमटोल की जा रही है।
यह आंदोलन शेतकरी संगठन के देविदास कणखर और क्रांतिकारी शेतकरी संगठन के विनायक सरनाईक की अगुवाई में चल रहा है। किसानों की मांग है कि जिला अग्रणी बैंक, बुलढाणा के पत्र में दिए गए निर्देशों को ध्यान में रखकर पात्र किसानों को फसल कर्ज मंजूर किया जाए।
किसानों का कहना है कि कर्जमाफी लागू होने में देर हुई, जिससे कई किसानों को पैसों की तंगी झेलनी पड़ी। फसल कर्ज वक्त पर नहीं मिला तो कुछ किसानों ने दूसरी बैंकों, अर्बन बैंकों और साख संस्थाओं से निजी कर्ज ले लिया। अब नए सिरे से फसल कर्ज के लिए अर्जी दी गई तो सातबारा पर इस कर्ज का बोझ दिखाकर उसे ठुकराया जा रहा है, यह शिकायत किसानों ने की है।
देविदास कणखर और विनायक सरनाईक का कहना है कि दूसरी बैंकों या साख संस्थाओं से लिया गया निजी कर्ज और खेती के मौसमी खर्च के लिए मांगा गया फसल कर्ज, ये दो अलग बातें हैं। इसलिए सातबारा पर दूसरे कर्ज का बोझ देखकर सीधे मना करने के बजाय संबंधित किसान की पात्रता, कर्ज का प्रकार और लागू नियम जांचकर फैसला होना चाहिए।
आंदोलन करने वालों का सवाल है कि जब दूसरी बैंकों ने रास्ता निकाल लिया तो स्टेट बैंक टालमटोल क्यों कर रही है। उनके मुताबिक दूसरी बैंकों ने यह लिखा-पढ़ी की कि संबंधित कर्ज निजी है, फसल कर्ज नहीं, और इस तरह पात्र किसानों को फसल कर्ज देने का रास्ता निकाला। मांग है कि स्टेट बैंक भी उसी प्रक्रिया और उपलब्ध कागजात के आधार पर मामलों पर ठीक से विचार करे। उनका जोर है कि सिर्फ सातबारा पर बोझ देखकर किसानों को लौटाने के बजाय असल कर्ज की प्रकृति देखी जाए और नियम के हिसाब से पात्र किसानों को फसल कर्ज मंजूर हो।
इस बारे में जिला अग्रणी बैंक, बुलढाणा के गुरुवार के पत्र का हवाला दिया गया। निवेदन में कहा गया कि दूसरी बैंकों और अर्बन बैंकों के कर्ज के बोझ की वजह से पात्र किसानों को फसल कर्ज मिलने में अड़चन नहीं आनी चाहिए, और स्टेट बैंक इन निर्देशों को ध्यान में रखकर फैसला करे।
आंदोलन करने वालों के मुताबिक फसल कर्ज किसानों के खेती के मौसम के लिए बेहद अहम है। बीज, खाद, कीटनाशक और जुताई-बुवाई का खर्च उठाने के लिए वक्त पर कर्ज मिलना जरूरी है, ऐसे में बैंक की प्रक्रिया की वजह से किसानों की अड़चन नहीं बननी चाहिए। उनकी मांग है कि जिला अग्रणी बैंक के पत्र के निर्देश, दूसरी बैंकों की अपनाई प्रक्रिया और किसानों के जमा किए कागजात देखकर स्टेट बैंक फौरन फैसला ले और पात्र किसानों के फसल कर्ज का मसला सुलझाए।
आंदोलनकारियों ने साफ किया है कि मांगें पूरी करके पात्र किसानों को फसल कर्ज देने पर साफ फैसला नहीं हुआ तो वे सैकड़ों किसानों के साथ बैंक में ही डेरा डाल देंगे और फैसला होने तक बैंक नहीं छोड़ेंगे। अब किसानों की नजर इस पर है कि स्टेट बैंक प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है।
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