सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
AQI 319 | Very Poor 07:46 IST

अल्बर्टा सार्वमत में कनाडा से अलग होने का प्रस्ताव खारिज, भारतीय मतदाताओं की अहम भूमिका

अल्बर्टा के सार्वमत में 76% से ज्यादा मतदाताओं ने कनाडा से अलग होने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। भारतीय और एशियाई मूल के मतदाताओं ने इसमें अहम भूमिका निभाई।

अल्बर्टा सार्वमत में कनाडा से अलग होने का प्रस्ताव खारिज, भारतीय मतदाताओं की अहम भूमिका तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

उत्तर अमेरिका के देश कनाडा का नाम इन दिनों एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक तूफान के बीच आ गया है। तेल के मामले में अमीर और आर्थिक रूप से बेहद ताकतवर माने जाने वाले अल्बर्टा प्रांत को कनाडा से अलग करके नया आजाद देश बनाने की जोरदार मांग पिछले कुछ सालों से उठ रही थी। इसी पृष्ठभूमि में अल्बर्टा में अलग होने की प्रक्रिया पर हाल ही में एक अहम जनमत संग्रह (Referendum) हुआ।

इस जनमत संग्रह में भारतीय मूल के नागरिकों ने कनाडा की अखंडता के लिए जो प्रतिबद्धता दिखाई, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। एक तरफ कनाडा को दो टुकड़ों में बंटने से बचाने में भारतीय समुदाय की भूमिका की तारीफ हो रही है। दूसरी तरफ इसी प्रांत में आगे चलकर बाहर के लोगों, खासकर नए प्रवासियों के आने पर सख्त पाबंदियां लगने की आशंका भी खड़ी हो गई है।

जनमत संग्रह में लोगों से मुख्य सवाल यह पूछा गया था कि क्या अल्बर्टा को कनाडा के संविधान के मुताबिक देश से अलग होने की कानूनी प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। नतीजे आने के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री और वहां एकता के समर्थकों ने राहत की सांस ली। 76% से ज्यादा मतदाताओं ने अलग होने का प्रस्ताव नकार दिया और कनाडा के संघ के साथ ही रहने का फैसला किया।

इस मुहिम का नाम "फॉरएवर कनेडियन" (Forever Canadian) रखा गया था। इस नतीजे से कनाडा के दो टुकड़े होने का खतरा फिलहाल टल गया है और इसे देश की अखंडता की बड़ी जीत माना जा रहा है।

इस जीत में और अल्बर्टा को कनाडा में बनाए रखने में भारतीय मूल के लोगों की बहुत अहम भूमिका रही। आंकड़ों के मुताबिक अल्बर्टा में इस वक्त करीब 32,000 से ज्यादा भारतीय मूल के नागरिक रहते हैं। हाल के दिनों में प्रांत में आए नए प्रवासियों में उनका हिस्सा करीब 16 प्रतिशत है। इसके अलावा प्रांत में रहने वाले एशियाई मूल के लोगों की कुल तादाद 2 लाख से ज्यादा है।

जब अल्बर्टा को कनाडा से अलग करने की कोशिशें तेजी से चल रही थीं, तब भारतीय और दूसरे एशियाई समुदाय ने एकजुट होकर 'नो' (No) यानी अलग होने के खिलाफ वोट दिया। इन मतदाताओं ने अपने वोट से साफ कहा कि उनका और उनकी अगली पीढ़ी का भविष्य एक अखंड कनाडा में ही सुरक्षित है।

भूगोल के हिसाब से देखें तो करीब 50 साल पहले तक आम कनाडाई नागरिक भी अल्बर्टा में रहने को ज्यादा उत्सुक नहीं होते थे। इसकी मुख्य वजह वहां का बेहद सख्त मौसम था, जहां ठंड का पारा हमेशा माइनस 15 डिग्री सेल्सियस (-15 degrees C) तक गिर जाता है।

लेकिन पिछले कुछ दशकों में भारत और दूसरे एशियाई देशों से आए हजारों मेहनतकश प्रवासियों ने इस कड़ाके की ठंड में भी अपनी मेहनत से अल्बर्टा की अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकी। स्थानीय उद्योग, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आईटी और निर्माण क्षेत्र में इन प्रवासियों का बड़ा योगदान रहा है।

कनाडा की एकता बच जाने के बावजूद अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। जनमत संग्रह में सिर्फ अलग होने का सवाल नहीं था। उसके साथ प्रांत में प्रवासन, नागरिकता और स्थानीय संसाधनों पर किसका हक हो, इस बारे में 9 और सवाल भी मतदाताओं से पूछे गए थे।

अल्बर्टा की स्थानीय सरकार और अलगाववादी गुटों के मुताबिक प्रांत में बाहर से आए अस्थायी निवासियों (Temporary Residents / International Students / Workers) की तादाद अब कुल आबादी का करीब 6 प्रतिशत हो गई है। अल्बर्टा सरकार के दावे के मुताबिक इन अस्थायी निवासियों से सरकार को सालाना करीब 150 मिलियन डॉलर का टैक्स मिलता है। मगर इनके लिए सेहत, शिक्षा और दूसरी सामाजिक सुविधाएं देने में राज्य सरकार को हर साल 1 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बढ़ती आबादी और सीमित संसाधनों की वजह से स्कूल, अस्पताल और मकानों की कीमतों पर भारी दबाव पड़ रहा है। इन्हीं वजहों से जनमत संग्रह के दौरान ज्यादातर स्थानीय निवासियों ने बाहर के लोगों के आने पर हद तय करने, अस्थायी निवासियों को मिलने वाली मुफ्त सामाजिक सेवाओं पर रोक लगाने और स्थानीय लोगों को तरजीह देने के प्रस्तावों का समर्थन किया है।

अल्बर्टा ने भले ही कनाडा छोड़ने से इनकार कर दिया हो, लेकिन प्रांत की स्वायत्तता और प्रवासन पर काबू को लेकर स्थानीय राजनीति और आक्रामक होने के आसार हैं। प्रांतीय सरकार अब ओटावा (कनाडा की राजधानी) की केंद्र सरकार पर दबाव डालकर अल्बर्टा आने वाले नए प्रवासियों, अंतरराष्ट्रीय छात्रों और कामगारों की तादाद सीमित करने की नीति चला सकती है।

इन घटनाक्रमों का सीधा असर आगे चलकर कनाडा में, खासकर अल्बर्टा प्रांत में पढ़ाई, नौकरी या स्थायी निवास (PR) के लिए जाना चाहने वाले भारतीय नौजवानों पर पड़ सकता है, इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे